France Violence Reason: फ्रांस में क्यों भड़की हिंसा, क्या बार-बार बदलती सरकारें हैं असंतोष की वजह?

France Violence Reason: फ्रांस में प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू की सरकार गिरने के एक दिन बाद राजधानी पेरिस और अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कें अवरुद्ध कर दीं, आगजनी की और पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले दागे. गृह मंत्री ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के शुरुआती घंटों में लगभग 200 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की. नेपाल के बाद अब फ्रांस हिंसा की आग में जल रहा है. तो आखिर ऐसा क्या हो गया कि फ्रांस के लोग उग्र हो गये और विरोध प्रदर्शन में उतर गए.

फ्रांसीसी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे

France Violence Reason: नेपाल में युवाओं ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जो आगे चलकर हिंसा का रूप ले लिया. अब फ्रांस से भी हिंसा की खबरें हैं. जहां प्रदर्शनकारी लगातार हिंसा कर रहे हैं. विरोध प्रदर्शन हालांकि ऑनलाइन शुरू हुआ था लेकिन बाद में यह तीव्र होता गया और 80,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती को चुनौती देते हुए प्रदर्शनकारियों ने अवरोधकों को तोड़ दिया जिसके बाद पुलिस ने तेजी से गिरफ्तारियां कीं. गृह मंत्री ब्रूनो रिटेलेउ ने कहा कि पश्चिमी शहर रेन्नेस में एक बस में आग लगा दी गई और दक्षिण-पश्चिम में एक बिजली लाइन को नुकसान पहुंचने से रेलगाड़ियां बाधित हुईं.

फ्रांस में क्यों भड़की हिंसा?

फ्रांस में हिंसा भड़कने के पीछे सबसे बड़ी वजह बार-बार सत्ता परिवर्तन को बताया जा रहा है. लगभग एक साल में देश को चौथी बार नया प्रधानमंत्री मिला है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार 9 सितंबर देर रात रक्षा मंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू को देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था. पूर्व पीएम फ्रांस्वा बायरू ने संसदीय विश्वास मत हारने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. बार-बार सरकार बदलने से लोगों में असंतोष और अविश्वास फैला है. इसकी वजह से Bloquons tout” (Block Everything) जैसे आंदोलन उभरे.

आर्थिक कटौती

हिंसा भड़कने के पीछे एक और वजह बताई जा रही है बायरू की नीति. बायरू सरकार ने बजट में लगभग €40-44 बिलियन की कटौती की थी. उन्होंने सार्वजनिक अवकाशों में कटौती और पेंशन पर रोक लगाने सहित व्यापक मितव्ययिता उपायों की घोषणा की थी. स्वास्थ्य सेवाओं में भी कटौती की थी. जिससे मजदूर वर्ग और आम लोगों में असंतोष फैल गया.

प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करते फ्रांसीसी पुलिसकर्मी

Bloquons tout आंदोलन का उदय

इस आंदोलन की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई. जो बजट कटौतियों और मौजूदा राजनीतिक सिस्टम को चुनौती देने के लिए सभी कुछ ब्लॉक का आह्वान करती है. इस आंदोलन को दक्षिणपंथ और वामपंथ का भी समर्थन मिला.

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ भी गुस्सा

आम लोगों का गुस्सा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ भी है. जिन्होंने मैक्रों पर व्यापक असंतोष को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. यूनियनों और विरोध आयोजकों ने तर्क दिया कि बायरू के इस्तीफे से उनकी शिकायतें कम नहीं हुईं. रेल यूनियन सूद-रेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया, “सरकार का गिरना अच्छा है, लेकिन यह अपर्याप्त है.”

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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