फिनलैंड के राष्ट्रपति का दावा: पुतिन हुए फेल, यूक्रेन जंग में हर महीने मारे जा रहे 35 हजार रूसी सैनिक

Finland President Claims: रूस-यूक्रेन जंग के बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने चौंकाने वाला दावा किया है. ISW की रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने बताया कि पुतिन के सैन्य लक्ष्य फेल हो चुके हैं और रूस हर महीने 35 हजार सैनिक खो रहा है. जानिए कि ड्रोन हमलों ने युद्ध का रुख पूरी तरह से कैसे बदल दिया है.

Finland President Claims: यूक्रेन के साथ जारी जंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने बड़े लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रहे हैं. फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा है कि रूस के हमले के चार साल बाद अब यूक्रेन पहले से कहीं ज्यादा यूरोपीय और अमेरिकी गुट (नाटो) के करीब आ गया है. इस दौरान रूस का दुनिया भर में दबदबा कम हुआ है और ईरान, सीरिया, वेनेजुएला जैसे उसके सहयोगियों की ताकत भी घटी है.

रूसी सेना को हर महीने भारी नुकसान

अलेक्जेंडर स्टब ने रूसी सेना की मौतों पर बड़ा दावा करते हुए कहा कि रूस हर महीने 30 से 35 हजार सैनिक खो रहा है. उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों में यूक्रेन ने जितने रूसी सैनिकों को ढेर किया या घायल किया है, उनमें से 95% हमले ड्रोन्स से किए गए हैं. स्टब के मुताबिक, इस जंग में एक यूक्रेनी सैनिक की मौत के बदले रूस के पांच सैनिक मारे जा रहे हैं.

रिपोर्ट्स में भी बड़े नुकसान की पुष्टि

इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) की रिपोर्ट भी राष्ट्रपति स्टब के आंकड़ों का समर्थन करती है. ISW के असेसमेंट के अनुसार, मार्च महीने में यूक्रेनी ड्रोन हमलों में करीब 33,988 रूसी सैनिक हताहत हुए थे. यह डेटा दिखाता है कि रूस को युद्ध के मैदान में कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है और यूक्रेन की स्थिति पिछले साल के मुकाबले बेहतर हुई है.

यूक्रेन ने वापस ली अपनी जमीन

मौजूदा समय में यूक्रेन ने पिछले 10 महीनों में सबसे ज्यादा इलाका वापस पाने में कामयाबी हासिल की है. ISW की रिपोर्ट बताती है कि अकेले मार्च महीने में यूक्रेन ने करीब 27 वर्ग किलोमीटर जमीन पर फिर से कब्जा जमा लिया है. फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब इस समय यूरोप और अमेरिका के बीच एक अहम कड़ी बनकर उभरे हैं और वह लगातार यूक्रेन को सैन्य मदद देने की वकालत कर रहे हैं.

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युद्ध को लेकर तीन बड़े रास्ते

अलेक्जेंडर स्टब ने युद्ध के भविष्य को लेकर तीन संभावनाएं जताई हैं. उनके अनुसार, या तो यह जंग लंबे समय तक खिंचेगी, या बातचीत से कोई समझौता होगा, या फिर बाहरी कारणों से कोई एक पक्ष कमजोर पड़ जाएगा. फिलहाल स्टब का मानना है कि यह युद्ध बिना किसी समझौते के जारी रहेगा, इसलिए उन्होंने सहयोगी देशों से यूक्रेन को अगले सर्दियों के सीजन के लिए तैयार रहने को कहा है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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