पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने 1971 में पाकिस्तान के बंटवारे के लिए सेना को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दशकों से सेना के प्रभाव और स्वार्थी नीतियों ने देश को कमजोर किया है. फजलुर रहमान ने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं बदले तो पाकिस्तान एक बार फिर बंटवारे की राह पर जा सकता है.
देश के प्रति वफादारी का सर्टिफिकेट आपसे नहीं चाहिए
फजलुर रहमान ने कहा कि पाकिस्तान किसी एक व्यक्ति या सत्ता में बैठे लोगों का देश नहीं है, बल्कि यह सभी नागरिकों का है. उन्होंने कहा कि हम शासक को देश के प्रति वफादारी या गद्दारी का पैमाना नहीं मान सकते. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने देश के प्रति वफादारी का प्रमाणपत्र किसी सत्ता पक्ष से लेने की जरूरत नहीं है.
आपकी वजह से देश टूटा
JUI-F प्रमुख ने सैन्य प्रतिष्ठान पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि देश के मौजूदा हालात दशकों से लिए जा रहे फैसलों का नतीजा हैं. उन्होंने कहा, “आपकी वजह से देश टूटा और अब यह देश अपने 80 साल पूरे करने की ओर बढ़ रहा है.” फजलुर रहमान ने सैन्य प्रतिष्ठान से पिछले 80 वर्षों की भूमिका के लिए खुद को जवाबदेह ठहराने को कहा.
हर दौर में अपने हित साधने वाली सोच हावी रही
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के अलग-अलग दौर में एक ही तरह की सोच हावी रही, जिसमें सत्ता में मौजूद लोगों ने अपने हितों को प्राथमिकता दी. फजलुर रहमान ने कहा कि आज देश जिस गिरावट की स्थिति में पहुंचा है, वह पिछले आठ दशकों की इसी सोच और स्वार्थी राजनीति का नतीजा है.
यह देश सिर्फ आपका नहीं, हमारा भी है
फजलुर रहमान ने देशभक्ति पर किसी एक संस्था के अधिकार को चुनौती देते हुए कहा कि पाकिस्तान केवल सत्ता में बैठे लोगों का नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि देशभक्ति और वफादारी को अहंकार का मुद्दा क्यों बनाया जाता है. उन्होंने कहा, “क्या यह देश सिर्फ आपका है? यह देश हमारा भी है.”
ब्रिटिश दौर से चली आ रही रणनीति का लगाया आरोप
JUI-F प्रमुख ने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कथित तरीकों पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जब उनके तर्कों का जवाब नहीं मिलता तो उनके खिलाफ लोगों को खड़ा कर दिया जाता है. उन्होंने दावा किया कि ऐसी रणनीति ब्रिटिश शासन के दौर से चली आ रही है.
‘36 साल से इन्हीं लोगों से निपट रहा हूं’
फजलुर रहमान ने कहा कि वह इस तरह के दबाव से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने अपनी लंबी राजनीतिक पारी का जिक्र करते हुए कहा कि वह 36 वर्षों से इन लोगों से निपटते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी ताकत, उनका तर्क और काम करने का तरीका अच्छी तरह पता है.
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