F-35 Fighter Jet: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान F-35 की साख दांव पर लगी है. अमेरिका का यह ‘अजेय’ माना जाने वाला विमान ईरान के सामने संघर्ष कर रहा है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से तेहरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुई इस जंग में पहली बार अमेरिकी लड़ाकू विमानों के गिराए जाने की खबरें आ रही हैं.
ईरान का दावा: मार गिराए दो F-35 लड़ाकू विमान
ईरानी सेना ने शुक्रवार (3 अप्रैल) को दावा किया कि उन्होंने अमेरिका के दूसरे F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है. इससे पहले 19 मार्च को सीएनएन की रिपोर्ट में बताया गया था कि एक अमेरिकी F-35 ईरानी हमले की चपेट में आया था, जिसकी मिडिल ईस्ट के एक बेस पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी. ईरान की ओर से यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने एक F-15E फाइटर जेट को भी गिराया है और उसके पायलट को हिरासत में ले लिया है. अमेरिका ने फिलहाल किसी भी F-35 के पूरी तरह नष्ट होने की बात से इनकार किया है, लेकिन वे जांच की बात स्वीकार कर रहे हैं.
अमेरिका के ‘ओवरकॉन्फिडेंस’ को लगा बड़ा झटका
युद्ध शुरू होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सैन्य लीडरशिप को भरोसा था कि ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम पुराना हो चुका है और वह F-35 जैसे 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा. हालांकि, हकीकत में ईरान ने अपनी ज्योग्राफिकल लोकेशन और अचानक हमला करने वाली ‘सैमबुश’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर अमेरिका को चौंका दिया है. ईरान के इन हमलों ने साबित कर दिया है कि सिर्फ आधुनिक टेक्नोलॉजी के भरोसे जंग नहीं जीती जा सकती, मैदानी हौसला भी मायने रखता है.
F-35 की टेक्नोलॉजी और कीमत पर उठ रहे सवाल
लॉकहीड मार्टिन और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन द्वारा बनाए गए एक F-35 विमान की कीमत करीब 82 से 110 मिलियन डॉलर (लगभग 760 से 1,000 करोड़ रुपये, जो इसे दुनिया के सबसे महंगे लड़ाकू विमानों में से एक बनाता है) के बीच है. यह विमान रेडार की नजरों से बचने और सुपरसोनिक रफ्तार से उड़ने के लिए डिजाइन किया गया है. रक्षा विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार संदीप उन्नीथन के अनुसार, स्टील्थ टेक्नोलॉजी पूरी तरह अदृश्य नहीं होती और विमान को उसकी गर्मी (Heat Signatures) से पकड़ा जा सकता है. आशंका है कि ईरान ने इसके लिए ‘358’ या SA-67 मिसाइल का उपयोग किया है.
F-35 फाइटर जेट के बारे में
- मल्टी-रोल फाइटर: यह दुनिया का सबसे आधुनिक 5वीं पीढ़ी का विमान है, जिसे हवा से हवा में लड़ाई, जमीन पर हमला और खुफिया जानकारी जुटाने (इंटिलेजेंस) के लिए बनाया गया है.
- अदृश्य तकनीक (स्टील्थ): इसकी खास बनावट और कोटिंग इसे दुश्मन के रेडार की पकड़ से बाहर रखती है, जिससे यह चुपके से हमला करने में सक्षम है.
- सुपरसोनिक रफ्तार: यह मैक 1.6 (करीब 1,900 किमी/घंटा) की तेज रफ्तार से उड़ सकता है और इसमें लगा इंजन 43,000 पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है.
- सेंसर फ्यूजन: इसके हेलमेट और सिस्टम में लगे सेंसर्स पायलट को 360-डिग्री व्यू देते हैं, जिससे वह विमान के आर-पार और अंधेरे में भी साफ देख सकता है.
- तीन अलग वेरिएंट: इसे तीन तरह से बनाया गया है. F-35A (रनवे से उड़ान), F-35B (सीधे ऊपर उठने और लैंड करने वाला), और F-35C (नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए).
कनाडा ने विमान खरीदने के फैसले पर शुरू किया विचार
इस युद्ध में F-35 के खराब प्रदर्शन का असर अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा अब अमेरिका से इन विमानों को खरीदने के अपने पुराने फैसले पर दोबारा विचार कर रहा है. कनाडा को चिंता है कि अगर जंग के मैदान में यह टेक्नोलॉजी फेल हो रही है, तो इतना महंगा निवेश करना कितना सही होगा. साथ ही सॉफ्टवेयर अपडेट और स्पेयर पार्ट्स के लिए अमेरिका पर निर्भरता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
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जंग में अब तक का नुकसान
छह हफ्ते से चल रही इस जंग में अमेरिका ने अब तक कई विमान गंवाए हैं. ईरान की सीधी फायरिंग के अलावा, तीन F-15 जेट कुवैत के एयर डिफेंस की गलती से गिर गए और एक KC-135 रिफ्यूलिंग प्लेन इराक में क्रैश हो गया. वर्तमान में ईरान के पास मौजूद एक अमेरिकी पायलट को लेकर तनाव बढ़ गया है. पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में स्थित ईरानी दूतावासों ने सोशल मीडिया (एक्स) पर कहा है कि बंदी बनाए गए पायलट ईरान की कस्टडी में ज्यादा सुरक्षित हैं. फिलहाल दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में दूसरे लापता पायलट की तलाश जारी है.
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