‘सीजफायर का मतलब कम गोलीबारी’, ट्रंप की अलबेली परिभाषा; कहा- US सैनिक मरे तो फिर बदल जाएगी स्थिति

Donald Trump Ceasefire: अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच डोनाल्ड ट्रंप का सीजफायर को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है, ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व में सीजफायर का मतलब ‘कम तीव्रता से गोलीबारी’ भी हो सकता है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए ईरान जिम्मेदार पाया गया तो सीजफायर खत्म किया जा सकता है.

Donald Trump Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सैन्य टकराव और कूटनीतिक बातचीत दोनों साथ-साथ चल रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से साफ कहा है कि यदि अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए ईरान जिम्मेदार पाया गया, तो मौजूदा संघर्षविराम समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है. संघर्षविराम की ऐसी स्थिति पर, ट्रंप ने सीजफायर की ऐसी व्याख्या की है, जिसने नई बहस छेड़ दी है.

संघर्षविराम पर ट्रंप ने क्या कहा?

बुधवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि वह मौजूदा हालात में सीजफायर को कैसे परिभाषित करेंगे. जवाब में ट्रंप ने कहा कि दुनिया के उस हिस्से में सीजफायर का मतलब अलग हो सकता है. उनके मुताबिक, वहां संघर्षविराम का अर्थ यह भी हो सकता है कि दोनों पक्ष पहले की तुलना में कम तीव्रता से गोलीबारी कर रहे हों. ट्रंप की यह परिभाषा ऐसे समय में आई है, जब कुछ घंटे पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई हुई थी.

ट्रंप ने सहयोगियों को क्या संदेश दिया?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निजी तौर पर अपने करीबी अधिकारियों से कहा है कि फिलहाल ईरान के साथ जारी संघर्षविराम लागू रहेगा, लेकिन इसकी एक सीमा है. सूत्रों के अनुसार ट्रंप का मानना है कि क्षेत्र में छोटे स्तर की झड़पों को कुछ समय तक सहन किया जा सकता है, लेकिन यदि किसी हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत होती है और उसके पीछे ईरान की भूमिका साबित होती है, तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है.

पहले क्या हुआ, जिसने तनाव बढ़ाया?

उनका यह बयान तुरंत चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि उसी दिन खाड़ी क्षेत्र में नए हमले हुए थे. ताजा घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप स्थित एक सैन्य नियंत्रण केंद्र और होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया.

ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताते हुए जवाबी हमला किया. बुधवार को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने कुवैत और बहरीन में कई ठिकानों को निशाना बनाया. सबसे गंभीर हमला कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ, जहां एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई. इसके अलावा कम से कम 63 यात्री और कर्मचारी घायल हुए.

ट्रंप बोले- हर कार्रवाई के पीछे कोई वजह होती है

पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूछा कि क्या सीजफायर अब भी प्रभावी है, तो उन्होंने कहा कि हर घटना के पीछे कोई न कोई कारण होता है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में ईरान पर काफी कड़े हमले किए हैं और ईरान की हालिया प्रतिक्रिया उसी का परिणाम है. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि तेहरान की कार्रवाई एक तरह से जवाबी प्रतिक्रिया थी. हालांकि, उन्होंने ताजा हमलों के महत्व को कम करके दिखाया और कहा कि स्थिति को जल्द नियंत्रण में ले लिया गया.

क्या बातचीत बंद हो गई है?

हाल के दिनों में ईरानी सरकारी मीडिया में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता रुक गई है. लेकिन ट्रंप ने इन दावों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है और बातचीत की प्रक्रिया जारी है. उनके अनुसार, संवाद के रास्ते बंद नहीं हुए हैं और वार्ता बिना रुकावट आगे बढ़ रही है.

तीन महीने से ज्यादा समय से जारी है संकट

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था. इसके बाद से खाड़ी क्षेत्र में कई बार मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं. ईरान ने इस दौरान उन इलाकों को भी निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं. लगातार बढ़ते तनाव के बीच 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच एक संघर्षविराम लागू हुआ था. हालांकि, इसके बाद भी समय-समय पर हिंसक घटनाएं होती रहीं और सीजफायर पूरी तरह स्थिर नहीं रह पाया.

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होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा मुद्दा

इस पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. संघर्ष शुरू होने के बाद से यह मार्ग काफी हद तक प्रभावित रहा है. युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का परिवहन इसी रास्ते से होता था. 

अमेरिका लगातार इस जलमार्ग को फिर से पूरी तरह खोलने की मांग कर रहा है, जबकि ईरान इस मुद्दे को व्यापक सुरक्षा और राजनीतिक समझौते से जोड़कर देख रहा है. साथ ही ईरान होर्मुज पर टोल व्यवस्था लगाना चाहता है, जिससे वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से पैसे वसूल कर सके.  

अमेरिका ईरान को किसी भी कीमत पर न्यूक्लियर पावर बनते नहीं देखना चाहता. वह चाहता है कि ईरान अपने 400 किग्रा से ज्यादा के एनरिच्ड यूरेनियम को नष्ट करे या फिर किसी अन्य देश को सौंप दे. लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं. इसके साथ ही ईरान अपने फ्रीज किए गए एसेट्स को भी वापस चाहता है, जो पश्चिमी और अन्य देशों में है. वह युद्ध में  हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह प्रयास कर रहा है. 

आगे क्या?

मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है. एक ओर बातचीत जारी है, तो दूसरी ओर मिसाइल और ड्रोन हमले भी रुक नहीं रहे हैं. ऐसे में ट्रंप का यह बयान कि ‘सीजफायर का मतलब कम तीव्रता वाली गोलीबारी भी हो सकता है’, उस जटिल स्थिति को दर्शाता है जिसमें कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों एक साथ चल रहे हैं.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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