US ने डुबोया ईरानी जहाज IRIS Dena, क्या भारत ने दी खुफिया जानकारी? रक्षा विशेषज्ञ ने उठाए सवाल

US sink IRIS Dena: भारतीय नौसेना की मेहमान पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया. ईरानी जहाज पर अमेरिकी टारपीडो हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री ने यह टिप्पणी की. वहीं इस घटना पर भारतीय रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने बड़ी टिप्पणी करते हुए सवाल उठाए कि क्या अमेरिका ने यह अटैक करने के लिए भारत से मिली खुफिया जानकारी की उपयोग किया?

US sink IRIS Dena: अमेरिकी सेना ने बुधवार को हिंद महासागर में मौजूद ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना (IRIS Dena) को टॉरपीडो हमले में डुबो दिया. इस अटैक में कम से कम 84 लोगों की मौत हो गई.  यह ईरानी जहाज कुछ दिन पहले ही भारत के साथ हुए नौसैनिक युद्धाभ्यास (मिलन-2026) में हिस्सा लेकर लौट रहा था, तभी श्रीलंका के पास उस पर हमला हुआ. जबकि 32 लोगों को श्रीलंकाई बलों ने बचा लिया. कई अन्य अब भी लापता हैं और उनके मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. इस घटना के बाद भारतीय रक्षा विश्लेषक ने सवाल उठाया है कि क्या अमेरिकी पनडुब्बी ने इस हमले के लिए भारत से मिली खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया.

नई दिल्ली के सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में रक्षा विशेषज्ञ और प्रोफेसर एमेरिटस ब्रह्मा चेलानी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, ‘सैन्य समझौतों कॉमकासा (COMCASA) और लेमोआ (LEMOA) के तहत भारत और अमेरिका संवेदनशील समुद्री जानकारी साझा करते हैं. अगर किसी अमेरिकी अटैक सबमरीन ने साझा की गई जानकारी का इस्तेमाल कर उस ईरानी फ्रिगेट का पता लगाया और उसे डुबो दिया, जो एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद अभी-अभी भारतीय बंदरगाह से निकली थी, तो यह रक्षा साझेदारी के लिए एक गंभीर उल्लंघन माना जाएगा.’

डेना यूएस अटैक सबमरीन के मुकाबले कुछ नहीं थी

उन्होंने आगे लिखा, ‘मौज (Moudge) श्रेणी की फ्रिगेट, जैसे आईआरआईएस डेना (IRIS Dena), भले ही पूरी तरह हथियारों से लैस क्यों न हो, लेकिन भारत के समुद्री क्षेत्र में सक्रिय किसी अमेरिकी न्यूक्लियर अटैक सबमरीन का मुकाबला करने में सक्षम नहीं होगी. लेकिन यहां परिस्थितियां अहम हैं. अगर डेना के पास बहुत कम या बिल्कुल भी हथियार नहीं थे, जैसा कि भारत के मिलान-2026 (MILAN-2026) नौसैनिक अभ्यास के “पीस प्रोटोकॉल” में अपेक्षित होता है, तो यह हमला किसी युद्ध जैसी स्थिति से अधिक एक सोची-समझी कार्रवाई जैसा प्रतीत होता है.’

‘भारतीय नेवी की मेहमान थी आइरिस डेना’

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जोर देकर कहा है कि डेना ‘भारतीय नौसेना की मेहमान’ थी और उस पर ‘बिना किसी चेतावनी के’ उस समय हमला किया गया, जब वह युद्ध की स्थिति में नहीं थी. प्रोफेसर चेलानी ने आगे कहा कि यह दावा पूरी तरह असंभव भी नहीं लगता. मित्रता और सहयोग पर केंद्रित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में आम तौर पर भाग लेने वाले युद्धपोत अपने साथ पूरी मात्रा में जीवित गोला-बारूद नहीं रखते, जब तक कि किसी निर्धारित लाइव-फायर अभ्यास की आवश्यकता न हो.

‘कम या बिना हथियार वाले फ्रिगेट को सबमरीन स्टाइल में नष्ट कर दिया’

एक्सपर्ट चेलानी ने लिखा, ‘विशाखापत्तनम में मिलान अभ्यास के हार्बर चरण के दौरान भाग लेने वाले जहाजों को सुरक्षित स्थिति में रहना होता है. इस चरण में सार्वजनिक दौरे, कूटनीतिक कार्यक्रम और फ्लीट रिव्यू जैसे आयोजन शामिल होते हैं, जिनके लिए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू रहते हैं. यहां तक कि समुद्री चरण में भी, जहां संचालन संबंधी अभ्यास और लाइव-फायर ड्रिल होती हैं. जहाजों के पास मौजूद गोला-बारूद को सख्ती से नियंत्रित किया जाता है और उसे केवल निर्धारित अभ्यासों के लिए ही सीमित रखा जाता है.’

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उन्होंने आगे कहा कि अगर डेना इसी सीमित और नियंत्रित स्थिति में अभ्यास क्षेत्र से रवाना हुई थी, तो लक्ष्य और हमलावर के बीच असमानता और भी स्पष्ट हो जाती है. एक हल्के हथियारों से लैस या संभवतः बिना हथियारों वाला मेहमान जहाज, जो सहयोगात्मक अभ्यास से लौट रहा था और दूसरी ओर दुनिया की सबसे उन्नत पनडुब्बी युद्ध प्रणाली द्वारा उसका पीछा कर उसे नष्ट कर दिया गया.

भारत ने चलाया था रेस्क्यू अभियान

हालांकि, हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना (IRIS Dena) के डूबने के तुरंत बाद भारतीय नौसेना ने खोज और बचाव अभियान शुरू किया. नौसेना के अनुसार, इसके लिए समुद्री निगरानी विमान और दो नौसैनिक जहाज तैनात किए गए.

श्रीलंकाई नौसेना ने बताया कि 4 मार्च (बुधवार) की सुबह कोलंबो स्थित मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर को आईआरआईएस डेना से आपातकालीन संदेश (डिस्ट्रेस सिग्नल) मिला था. उस समय यह फ्रिगेट श्रीलंका के गाले शहर से लगभग 20 नॉटिकल मील पश्चिम में मौजूद था और श्रीलंका के निर्धारित सर्च एंड रेस्क्यू जोन के भीतर काम कर रहा था.

सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने बुधवार सुबह 10 बजे एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान भेजा, ताकि श्रीलंका द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियान में मदद की जा सके. इसके अलावा एक दूसरा विमान भी तैयार रखा गया था, जिसमें हवा से गिराए जाने वाले लाइफ राफ्ट (जीवन रक्षक नावें) मौजूद थीं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके.

नजदीक में तैनात आईएनएस तरंगिणी को भी तुरंत खोज क्षेत्र की ओर भेजा गया और वह उसी दिन शाम 4 बजे घटनास्थल पर पहुंच गया. इस बीच श्रीलंकाई नौसेना और अन्य एजेंसियां पहले ही बचाव अभियान शुरू कर चुकी थीं.

अभियान को और मजबूत करने के लिए आईएनएस इक्षाक को कोच्चि से रवाना किया गया और वह भी क्षेत्र में तैनात है. भारतीय नौसेना ने कहा कि यह तैनाती जहाज दुर्घटना में फंसे लोगों की मानवीय सहायता के लिए की गई है. इस पूरे अभियान में श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ समन्वय जारी है.

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अमेरिका ने हमले की पुष्टि की

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि आईआरआईएस डेना को डुबोने की कार्रवाई अमेरिका ने की थी. उन्होंने इसे वॉशिंगटन के लिए ‘बहुत बड़ी जीत’ बताया. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका निर्णायक, विनाशकारी और बिना किसी दया के जीत रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप के सीधे आदेश पर युद्ध विभाग ने यह अभियान शुरू किया.’ हेगसेथ ने यह भी कहा कि अमेरिका इजराइल के साथ चल रहे संयुक्त अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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हालांकि ईरान ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के समुद्री तट से 2000 मील दूर एक जघन्य अपराध किया गया है. आईरिस डेना पर किया गया हमला बिना किसी चेतावनी के किया गया. अमेरिका को अपने इस कृत्य पर बहुत पछतावा होगा. अमेरिका ने आईरिस डेना पर मार्क 48 हैवीवेट टारपीडो दागा था, जिसकी वजह से यह हमला बेहद घातक रहा. टारपीडो से किसी जहाज को डुबाना द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली घटना है.  

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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