अमेरिका में ट्रंप की इमिग्रेशन नीति पर अदालत का फैसला, 75 देशों का वीजा बैन रद्द

अमेरिकी संघीय अदालत के फैसले से अफगानिस्तान, ईरान, इराक, नाइजीरिया और यमन समेत 75 देशों के नागरिकों को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने देश के आधार पर इमिग्रेंट वीजा रोकने की ट्रंप प्रशासन की नीति को ‘कानून के खिलाफ’ बताया.

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति को कानूनी झटका लगा. न्यूयॉर्क की एक अमेरिकी संघीय अदालत ने 75 देशों के नागरिकों के लिए लागू किए गए इमिग्रेंट वीजा प्रतिबंध को रद्द कर दिया. अदालत का यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो अमेरिका में स्थायी रूप से बसने के लिए इमिग्रेंट वीजा का इंतजार कर रहे थे.

75 देशों के नागरिकों को मिली राहत

ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में 75 देशों के नागरिकों के इमिग्रेंट वीजा की प्रक्रिया रोक दी थी. इस सूची में अफगानिस्तान, ब्राजील, मिस्र, ईरान, इराक, नाइजीरिया, सोमालिया, थाईलैंड और यमन जैसे देश शामिल थे. प्रशासन का तर्क था कि इन देशों से आने वाले कुछ अप्रवासी अमेरिकी कल्याण व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं और सरकार के लिए आर्थिक जोखिम पैदा कर सकते हैं.

जज ने कहा- ‘कानून के खिलाफ’ है नीति

न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय जज जेनेट वर्गास ने शुक्रवार को अपने फैसले में इस नीति को ‘कानून के खिलाफ’ करार दिया. अदालत ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इमिग्रेंट वीजा जारी करने से जुड़ी अपनी वैधानिक शक्तियों से आगे जाकर ऐसा आदेश लागू किया.

अदालत के मुताबिक, केवल किसी व्यक्ति के देश के आधार पर उसका इमिग्रेंट वीजा रोकना उचित नहीं है. कई आवेदक वीजा पाने के लिए निर्धारित अन्य सभी कानूनी शर्तें पूरी करते थे, लेकिन केवल उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर उनकी आवेदन प्रक्रिया रोक दी गई.

वीजा रिजेक्शन के आदेश भी रद्द

अदालत ने केवल भविष्य में इस नीति के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई, बल्कि इस नीति के आधार पर किए गए वीजा इनकार के आदेशों को भी रद्द कर दिया. इससे उन आवेदकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके इमिग्रेंट वीजा आवेदन को केवल संबंधित देश की सूची में शामिल होने के कारण प्रभावित किया गया था.

यह फैसला अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में राष्ट्रीयता के आधार पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल खड़ा करता है. अदालत के फैसले से अब ट्रंप प्रशासन को अपनी इस नीति का बचाव ऊपरी अदालत में करना पड़ सकता है.

ट्रंप प्रशासन कर सकता है अपील

अदालत के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन के पास इसे चुनौती देने का विकल्प मौजूद है. प्रशासन पहले ही यह दलील देता रहा है कि कुछ देशों से आने वाले अप्रवासियों की आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अतिरिक्त जांच और प्रतिबंध जरूरी हैं.

हालांकि, संघीय अदालत के ताजा फैसले ने प्रशासन के इस तर्क को फिलहाल बड़ा झटका दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि अमेरिकी सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करती है या नहीं और अगर करती है तो ऊपरी अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है.

ट्रंप के इमिग्रेशन एजेंडे पर बढ़ा कानूनी दबाव

डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सीमा सुरक्षा मजबूत करने और बड़े पैमाने पर निर्वासन का वादा किया था। राष्ट्रपति बनने के बाद उनके प्रशासन ने अवैध घुसपैठ रोकने, निर्वासन तेज करने और इमिग्रेशन नियमों को सख्त करने के लिए कई कदम उठाए.

आगे क्या होगा?

अदालत के फैसले के बाद अब प्रभावित देशों के नागरिकों के इमिग्रेंट वीजा मामलों पर आगे की प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार है. वहीं, ट्रंप प्रशासन के संभावित अपील कदम से मामला आगे भी अदालत में जारी रह सकता है.

फिलहाल, संघीय अदालत का यह आदेश ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिसके तहत आवेदकों की व्यक्तिगत पात्रता के बजाय उनके देश के आधार पर इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया रोकी गई थी. 75 देशों के नागरिकों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इससे अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की उनकी उम्मीद एक बार फिर मजबूत हुई है.

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By सत्येन्द्र गिरि

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पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

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