Canadian PhD Scholar Missing Pakistan: कनाडा से पाकिस्तान अपनी पीएचडी की रिसर्च पूरी करने आए एक छात्र के लापता होने से हड़कंप मच गया है. लाहौर पुलिस के मुताबिक, हमजा अहमद खान नाम का यह कनाडाई नागरिक इसी महीने की शुरुआत में पाकिस्तान पहुंचा था. वह ‘साम्राज्यवाद-विरोधी राजनीति’ (anti-imperialist politics) जैसे गंभीर विषय पर शोध कर रहा था, लेकिन 19 फरवरी की रात से उसका कुछ पता नहीं चल पाया है. पुलिस ने अब इस मामले में अपहरण (किडनैपिंग) का केस दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है.
दोस्त के घर से कैब बुक कर निकला, फिर नहीं लौटा
लाहौर पुलिस ने यह एफआईआर हमजा के दोस्त यूसुफ राशिद की शिकायत पर दर्ज की है. यूसुफ के अनुसार, हमजा 13 फरवरी को पाकिस्तान आया था और लाहौर के पॉश इलाके डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (DHA) में उन्हीं के साथ रुका हुआ था. 19 फरवरी की रात को हमजा ने कहीं जाने के लिए एक ऑनलाइन टैक्सी बुक की और घर से निकला, लेकिन वह वापस नहीं आया. यूसुफ को डर है कि रास्ते में कुछ अनजान लोगों ने हमजा को अगवा कर लिया है.
क्या रिसर्च का विषय बनी गायब होने की वजह?
लाहौर के पुलिस अधिकारी (DIG) फैसल कामरान ने बताया कि पुलिस हर एंगल से इस केस को देख रही है. पुलिस इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि कहीं हमजा का रिसर्च टॉपिक (साम्राज्यवाद-विरोधी राजनीति) ही उसके गायब होने की वजह तो नहीं बना? फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य टेक्निकल सबूतों के जरिए हमजा की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश कर रही है.
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मानवाधिकार संगठन और एक्टिविस्ट्स ने उठाए सवाल
इस घटना पर ‘ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान’ (HRCP) ने गहरी चिंता जताई है. आयोग के अनुसार, टोरंटो यूनिवर्सिटी के इस होनहार छात्र का इस तरह गायब होना बेहद डरावना है. उन्होंने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द हमजा को ढूंढकर सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाए. वहीं, राजनीतिक कार्यकर्ता अम्मार अली जान ने आरोप लगाया है कि हमजा को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह सत्ता के खिलाफ उठने वाली आवाजों और राजनीति पर काम कर रहा था.
विपक्ष ने भी घेरा, कहा- ये लोकतंत्र पर हमला है
इमरान खान की पार्टी के करीबी संगठन ‘तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान’ ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में रिसर्च करना और अपनी राय रखना सबका हक है. उनके अनुसार, रिसर्च करने वालों को इस तरह डराना-धमकाना या गायब कर देना बौद्धिक आजादी को खत्म करने जैसा है. हमजा खान को इंसाफ मिलना चाहिए ताकि वह बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई पूरी कर सके.
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