कनाडाई PM कार्नी बोले- हम पर हमला हुआ है, हम युद्ध में हैं, अमेरिका पर लगाया जवाबी टैरिफ, 8 सितंबर से लागू

कनाडा ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में 8 सितंबर से कई अमेरिकी सामानों पर जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की है. यह निर्णय दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध को और तेज कर रहा है.

अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी रिश्ते अब एक बड़े टकराव में बदलते दिखाई दे रहे हैं. अमेरिकी टैरिफ के जवाब में कनाडा ने भी कड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ऐलान किया कि 8 सितंबर से अमेरिका से आने वाले कई सामानों पर कनाडा ‘डॉलर-फॉर-डॉलर’ जवाबी टैरिफ लगाएगा. इस फैसले के साथ दोनों पुराने सहयोगियों के बीच चल रही ट्रेड वॉर और तेज हो गई है.

किन अमेरिकी सामानों पर लगेगा कनाडा का टैरिफ?

शनिवार को कार्नी ने टेलीविजन पर दिए 22 मिनट के भाषण में बताया कि कनाडा की जवाबी कार्रवाई कई क्षेत्रों से आने वाले अमेरिकी उत्पादों पर लागू होगी. इनमें डेयरी उत्पाद, स्टील, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और पल्प एवं पेपर जैसे सामान शामिल हैं. कार्नी ने अपने संबोधन में बेहद सख्त लहजे में कहा, 'जब आप पर हमला होता है, तो आप युद्ध में होते हैं और हम पर हमला हुआ है.' सरकार ने कहा है कि इन जवाबी टैरिफ का विवरण बाद में जारी किया जाएगा और ये लेबर डे के बाद आने वाले मंगलवार से लागू होंगे.

अमेरिकी टैरिफ शनिवार रात से लागू

दूसरी ओर, अमेरिका ने शनिवार से करीब 28 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है. यह शुल्क शनिवार को पूर्वी अमेरिकी समय के अनुसार रात 12:01 बजे से प्रभावी हुआ. हालांकि, इसका असर कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल सालाना निर्यात के करीब 5 प्रतिशत हिस्से पर पड़ता है. अमेरिकी शुल्क की चपेट में आने वाले सामानों में हॉकी स्टिक और मेडिकल इस्तेमाल में आने वाली टंग डिप्रेसर जैसी छोटी वस्तुओं से लेकर सीमेंट जैसे कई औद्योगिक उत्पाद तक शामिल हैं.

समझौते के लिए कनाडा ने क्या-क्या पेश किया था?

कार्नी ने बताया कि कनाडा समझौता करने के लिए काफी आगे बढ़ने को तैयार था. उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका अपने शुल्क में पर्याप्त कमी करता है, तो वह अमेरिकी एल्युमिनियम, स्टील और मोटर वाहनों पर लगाए गए अपने मौजूदा जवाबी शुल्क हटा सकता है.

इसके अलावा कनाडा अपनी प्रांतीय सरकारों को अमेरिकी शराब की बिक्री दोबारा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने को भी तैयार था. लेकिन बातचीत के आखिरी चरण में अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तें कनाडा को मंजूर नहीं हुईं.

कार्नी ने कहा, 'लेकिन ट्रंप प्रशासन की ओर से पेश की गई अंतिम शर्तें स्वीकार करने लायक नहीं थीं. उन्होंने बहुत ज्यादा मांगा और बहुत कम देने की पेशकश की. हम उनकी पेशकश स्वीकार नहीं कर सकते और जो उन्होंने मांगा है, वह हम नहीं देंगे. हम कनाडा की संप्रभुता से समझौता करने या अपने प्रमुख उद्योगों को कमजोर करने के लिए तैयार नहीं थे.'

सिर्फ 48 घंटे पहले समझौते की उम्मीद थी

दिलचस्प बात यह है कि टकराव की यह स्थिति अचानक इतनी तेजी से बनी. इसके ठीक 48 घंटे पहले तक दोनों देशों के अधिकारी समझौते के काफी करीब दिखाई दे रहे थे. वॉशिंगटन में तीन दिनों तक बातचीत चली थी. कनाडा की ओर से अमेरिका के साथ व्यापार के लिए जिम्मेदार मंत्री डोमिनिक लेब्लांक और अमेरिका की ओर से जेमिसन ग्रीर बातचीत कर रहे थे. लेकिन लंबे समय से चल रही बातचीत आखिरकार किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी.

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एक साल से ज्यादा चली बातचीत भी बेनतीजा

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार समझौते को लेकर एक साल से अधिक समय से बातचीत चल रही थी. इसके बावजूद दोनों पक्ष किसी अंतिम सहमति पर नहीं पहुंच सके. इसके बाद कार्नी ने बातचीत रोकने का फैसला किया और कनाडा की वार्ता टीम को वापस ओटावा लौटने का निर्देश दिया. कार्नी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बातचीत के अंतिम चरण में अपनी प्रस्तावित शर्तों में बदलाव कर दिया.

अमेरिका की नई शर्तों पर कनाडा को क्यों आपत्ति थी?

कार्नी के मुताबिक, अमेरिकी प्रस्ताव में आखिरी समय पर जो बदलाव किए गए, उनसे कनाडा के लिए कई अहम नुकसान पैदा हो सकते थे. उनके अनुसार, नई शर्तों से कनाडा में बने वाहनों को मिलने वाली टैरिफ रियायतें कम हो जातीं. इसके अलावा कनाडा की दूसरे देशों के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते करने की क्षमता भी सीमित होती. कार्नी ने यह भी कहा कि प्रस्ताव में राष्ट्रीय संप्रभुता, भाषा और संस्कृति से जुड़े सुरक्षा उपायों को कमजोर करने वाली शर्तें शामिल थीं.  कनाडाई सरकार ने इन सभी शर्तों को अस्वीकार्य माना.

कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी दूसरे देश के दबाव में आकर कनाडा यह तय नहीं करेगा कि उसे किस देश के साथ व्यापार करना है. कार्नी ने दोहराया कि दुनिया भर में व्यापार समझौते करने की कनाडा की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह की पाबंदी उनके लिए रेड लाइन है. कार्नी ने साफ कर दिया है कि कनाडा अमेरिकी नए व्यापार शुल्क का जवाब समान आर्थिक मूल्य के टैरिफ से देगा.

कनाडा अब दुनिया के दूसरे बाजारों पर भी करेगा जोर

कार्नी सरकार लंबे समय से अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने और दूसरे देशों के साथ संबंध बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है. कनाडा ने पिछले एक साल में 20 से अधिक नए आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी समझौते किए हैं. कार्नी का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और निर्यात बाजारों में विविधता लाने की नीति आगे भी जारी रहेगी.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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