100 साल में पहली बार, कनाडा को सताया अमेरिका के हमले का डर; पहली बार बनाया 'डिफेंस प्लान'

कनाडाई सेना ने एक खास मिलिट्री मॉडल डेवलप किया है जो अमेरिका से होने वाले संभावित हमले का एनालिसिस करता है. इस मॉडल में, कनाडा ने तालिबान के खिलाफ लड़ी गई लड़ाइयों को भी शामिल किया है.

कनाडाई सेना ने एक हाइपोथेटिकल सिच्यूशन के आधार पर एक मिलिट्री मॉडल तैयार किया है, खासकर यह कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्या होगा और हालात कैसे होंगे. The Globe and Mail की रिपोर्ट के अनुसार, यह करीब 100 साल में पहली बार है जब कनाडाई सेना ने ऐसा कोई थ्योरेटिकल और सोच-विचार पर आधारित नजरिया ढांचा तैयार किया है. हालांकि, कनाडा को नहीं लगता कि ट्रंप प्रशासन वास्तव में ऐसा हमला करने का आदेश देगा, लेकिन फिर भी यह मॉडल तैयार रखा गया है.

ट्रंप और ग्रीनलैंड विवाद के बीच आया मामला

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क से ग्रीनलैंड लेने की योजना को तेज किया है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसका विरोध किया है. इसी बैकग्राउंड में कनाडा की इस तैयारी को देखा जा रहा है.

दो दिन में कनाडा पर कब्जे की आशंका

रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई अधिकारियों ने बताया कि इस मॉडल में यह माना गया है कि अमेरिकी सेना दक्षिण दिशा से हमला करेगी. इस स्थिति में अमेरिकी सेना जमीन और समुद्र दोनों रास्तों से कनाडा के अहम ठिकानों पर बहुत जल्दी कब्जा कर सकती है और यह काम महज दो दिनों में हो सकता है.

सैनिकों और मॉडर्न वेपन्स की कमी

कनाडाई सेना के अधिकारियों के मुताबिक, कनाडा के पास न तो पर्याप्त सैनिक हैं और न ही अत्याधुनिक हथियार (मॉडर्न वेपन्स), जिससे वह अमेरिकी सेना को सीधे रोक सके. इसी वजह से इस मॉडल में आमने‑सामने की लड़ाई को ज्यादा असरदार नहीं माना गया है. इस काल्पनिक योजना (हाइपोथेटिकल सिच्यूशन) में अलग तरह की लड़ाई पर भरोसा किया गया है. इसमें शामिल हैं छोटे‑छोटे समूह, अचानक हमला करना, जरूरी ढांचे को नुकसान पहुंचाना, ड्रोन का इस्तेमाल और तेजी से हमला कर पीछे हट जाना. इन तरीकों को इसलिए चुना गया है क्योंकि सीधे युद्ध में अमेरिका को रोकना मुश्किल माना गया है. 

अफगानिस्तान की लड़ाइयों से ली गई सीख

The Globe and Mail की रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल में उन तरीकों को भी शामिल किया गया है जो 1979 से 1989 के बीच अफगान मुजाहिदीन ने सोवियत सेना के खिलाफ अपनाए थे और बाद में तालिबान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ इस्तेमाल किए. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2001 से 2014 के बीच अफगानिस्तान में मारे गए 158 कनाडाई सैनिकों में से कई IED हमलों का शिकार हुए थे.

अमेरिका से रिश्ते अब भी सामान्य

हालांकि इस तरह का मॉडल तैयार किया गया है, लेकिन कनाडाई सेना ने साफ कहा है कि अमेरिका के साथ उसके सैन्य रिश्ते अच्छे हैं. दोनों देश मिलकर ‘Golden Dome’ परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिसका मकसद रूस और चीन से आने वाली मिसाइलों से बचाव करना है. कनाडाई सेना ने यह भी बताया है कि उसने रूस या चीन की ओर से कनाडा के शहरों और अहम ढांचे पर मिसाइल हमलों को लेकर भी अलग‑अलग मॉडल तैयार किए हैं.

अगर हमला हुआ तो क्या संकेत मिलेंगे?

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका हमला करता है तो कनाडा को करीब तीन महीने की तैयारी का समय मिल सकता है. सबसे पहला संकेत यह हो सकता है कि अमेरिका यह कहे कि अब दोनों देशों के बीच साझा आसमान नीति लागू नहीं है. ऐसी स्थिति में यूरोपीय देशों से मदद मांगी जाएगी.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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