नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर सिर्फ भारत ही नहीं, चीन के मीडिया की भी खास नजर है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से लेकर ग्लोबल टाइम्स तक की कवरेज में इस बैठक को भारत-चीन रिश्तों में स्थिरता और आगे बढ़ते संवाद के संदर्भ में पेश किया जा रहा है. चीनी मीडिया का जोर इस बात पर है कि दोनों बड़े पड़ोसी देशों के बीच मतभेदों को संभालते हुए सहयोग के लिए नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं.
चीनी मीडिया ने मोदी-शी मुलाकात को कैसे दिखाया?
- चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने मोदी और शी जिनपिंग की बैठक को BRICS शिखर सम्मेलन की प्रमुख घटनाओं में जगह दी है. उसकी कवरेज में शी जिनपिंग के BRICS बैठक में पहुंचने और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को प्रमुखता दी गई. साथ ही चीन की ओर से BRICS को ग्लोबल साउथ के देशों के सहयोग और वैश्विक शासन में बड़ी भूमिका वाले मंच के तौर पर पेश किया गया है.
- वहीं ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्टिंग का एक अहम हिस्सा भारत-चीन रिश्तों पर केंद्रित है. अखबार ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा कि मोदी-शी संवाद को सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इसे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और रिश्तों को स्थिर दिशा में ले जाने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है.
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कजान से नई दिल्ली तक बन रही मुलाकातों की कड़ी
- चीनी मीडिया के नैरेटिव में मोदी और शी की लगातार हो रही मुलाकातें खास महत्व रखती हैं. अक्टूबर 2024 में कजान में दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद अगस्त 2025 में तियानजिन में बातचीत हुई थी. अब नई दिल्ली में हुई बैठक को इसी सिलसिले की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.
- चीनी मीडिया में इसे इस संकेत के तौर पर पेश किया जा रहा है कि सीमा विवाद और दूसरे मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत जारी है. विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार राजनीतिक संपर्क गलतफहमियों को कम करने और रिश्तों में स्थिरता लाने में मदद कर सकता है.
- ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञ के हवाले से लिखा है कि वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, जलवायु परिवर्तन और विकास के लिए वित्तीय मदद जैसे मुद्दों पर भारत और चीन के बीच सहयोग की काफी संभावनाएं हैं.
- BRICS, SCO और G20 जैसे मंच दोनों देशों को इन मुद्दों पर साथ मिलकर काम करने का मौका देते हैं. ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा जितना बढ़ेगा, आपसी मतभेद उतने ही कम अहम रह जाएंगे.
चीन के मीडिया में भरोसे पर इतना जोर क्यों?
- ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञों के हवाले से भारत-चीन रिश्तों में रणनीतिक भरोसा बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है. चीन के नजरिए से राजनीतिक स्तर पर संवाद के साथ-साथ सीमा प्रबंधन, व्यापार, लोगों के बीच संपर्क और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाना जरूरी है.
- पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों, सीमा व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को फिर से बढ़ाने की दिशा में कदम उठे हैं.
- चीन की मीडिया कवरेज में ऐसे कदमों को रिश्तों में सुधार के ठोस संकेत के तौर पर जगह मिल रही है. भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवा भी चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू हो रही है.
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नई दिल्ली में BRICS Summit को किस नजर से देख रहा है चीन?
- चीनी मीडिया की कवरेज का दूसरा बड़ा पहलू BRICS Summit है. शिन्हुआ की रिपोर्टिंग में संगठन को वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने वाले मंच के रूप में प्रमुखता दी गई है.
- चीन के लिए BRICS सिर्फ आर्थिक सहयोग का मंच नहीं है, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने का माध्यम भी है.
- यही वजह है कि चीन की नजर में नई दिल्ली सम्मेलन का महत्व भारत-चीन रिश्तों से कहीं बड़ा है. बीजिंग यह संदेश देने की कोशिश करता दिख रहा है कि भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच सहयोग BRICS की सामूहिक ताकत को भी बढ़ा सकता है.
भारत से रिश्ते और BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर क्या है चीन का संदेश ?
- हालांकि चीनी मीडिया की भाषा में सकारात्मकता साफ दिखाई देती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत और चीन के बीच सभी विवाद खत्म हो गए हैं. सीमा का सवाल, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अब भी मौजूद हैं.
- दरअसल, हालिया घटनाक्रम को ज्यादा सही तरीके से 'रिश्तों का सामान्यीकरण' की कोशिश कहना होगा, न कि पूरी तरह सामान्य रिश्तों की वापसी. विशेषज्ञ विश्लेषण भी यही बताते हैं कि 2020 के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गहरा अविश्वास पैदा हुआ था और अब दोनों पक्ष धीरे-धीरे संवाद और व्यावहारिक संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
- चीनी मीडिया की मौजूदा कवरेज को एक लाइन में समझें तो संदेश यह है कि भारत और चीन के बीच मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन संवाद और सहयोग का रास्ता खुला रहना चाहिए. मोदी-शी मुलाकात को इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
- नई दिल्ली BRICS सम्मेलन के मंच से चीन यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि भारत के साथ प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देश वैश्विक दक्षिण, विकास और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम कर सकते हैं.
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