मुझे अंधेरे में रखा, पद से हटाने की कोशिश और वो डरावनी रात… बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने खोले यूनुस के काले राज

Bangladesh President accuses Muhammad Yunus: बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस अब सत्ता से दूर हैं. उनकी जगह अब लोगों द्वारा चुनी गई सरकार है, जिसके मुखिया तारिक रहमान हैं. हालांकि, यूनुस ने अपने शासन के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रपति के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया. प्रेसिडेंट मोहम्मद शहाबुद्दीन ने इसके बारे में खुल कर बात की है.

Bangladesh President accuses Muhammad Yunus: बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि यूनुस ने अपने लगभग डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति पद को हाशिये पर डाला. यूनुस ने संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया और उनकी भूमिका सीमित करने की कोशिश की. उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस ने उनके साथ संविधान के तहत आवश्यक संवाद नहीं बनाए रखा. राष्ट्रपति ने कहा कि न तो उन्हें विदेश यात्राओं की जानकारी दी गई और न ही महत्वपूर्ण सरकारी मामलों पर कोई ब्रीफिंग दी गई. उन्होंने बांग्लादेश के एक दैनिक समाचार पत्र कालेर कांथो को दिए गए एक इंटरव्यू में यह आरोप लगाए हैं. 

मोहम्मद शहाबुद्दीन ने क्या-क्या आरोप लगाए

अलग-थलग करने का प्रयास: राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा कि अपने 18 महीने के शासनकाल में यूनुस ने उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से अलग-थलग करने के बार-बार प्रयास किए गए. इंटरव्यू में राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान के अनुसार मुख्य सलाहकार को नियमित रूप से राष्ट्रपति से परामर्श करना चाहिए, लेकिन यूनुस ने इस प्रावधान का पालन नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘संविधान कहता है कि विदेश यात्रा से लौटने के बाद उन्हें राष्ट्रपति से मिलकर लिखित रूप में चर्चा और नतीजों की जानकारी देनी होती है. उन्होंने 14-15 बार विदेश यात्रा की, लेकिन एक बार भी मुझे सूचित नहीं किया.’

ट्रेड डीलों पर अंधेरे में रखा: राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ हुए एक अहम समझौते सहित कई बड़े राज्य मामलों से उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया. उन्होंने कहा, ‘मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था. ऐसा राज्य समझौता राष्ट्रपति को बताया जाना संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन न मौखिक रूप से और न लिखित रूप से मुझे जानकारी दी गई.’  बांग्लादेश की नवनियुक्त सरकार भी इससे सहमत नहीं दिख रही है. उसने इस ट्रेड डील की समीक्षा करने की बात कही है. 

राष्ट्रपति की सार्वजनिक उपस्थिति को देश और विदेश दोनों जगह से मिटाने की कोशिश: शहाबुद्दीन ने कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोहों और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया. एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि विदेश दौरों के दौरान एक सलाहकार की आपत्ति के बाद रातों-रात विदेशी मिशनों से राष्ट्रपति की तस्वीरें हटा दी गईं. उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में दूतावासों में राष्ट्रपति की तस्वीर लगती है क्योंकि वही राज्य का प्रतिनिधित्व करता है. यह परंपरा एक झटके में खत्म कर दी गई.’

प्रेस विंग हटाना और कार्यालय को अलग-थलग करना: राष्ट्रपति ने कहा कि उनके कार्यालय को जानबूझकर अलग-थलग किया गया, जिसमें ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी के नवनिर्वाचित नेताओं के साथ एक शिष्टाचार भेंट के बाद बांगाभवन के पूरे प्रेस विंग को हटा दिया गया. उन्होंने बताया कि यह मुलाकात चुनाव जीतने के बाद एक सामान्य औपचारिक बातचीत और फोटो सेशन तक सीमित थी. लेकिन जब अगले दिन इसकी खबरें और तस्वीरें अखबारों में छपीं, तो मुख्य सलाहकार के प्रेस विंग ने इसे ‘सामान्य रूप से’ नहीं लिया.

उन्होंने कहा, ‘बेहद बेशर्मी से प्रेस सचिव, उप-प्रेस सचिव और सहायक प्रेस सचिव को एक साथ हटा दिया गया.’ इसके अलावा, करीब 30 वर्षों से काम कर रहे दो फोटोग्राफरों को भी हटा दिया गया. शहाबुद्दीन के अनुसार, पूरा प्रेस विंग लगभग खत्म कर दिया गया, जिससे राष्ट्रपति कार्यालय सामान्य प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं कर पा रहा.

उन्होंने कहा कि उनकी सार्वजनिक उपस्थिति सीमित करने के लिए ऐसे कदम उठाए गए. प्रेस विंग बहाल कराने के लिए उन्होंने कई बार कैबिनेट सचिव, प्रधान सचिव और स्थापना सचिव से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिम सरकार के दौरान महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवसों पर प्रकाशित राज्य परिशिष्टों में उनके संदेश और तस्वीरें भी शामिल नहीं की गईं.

राष्ट्रपति पद से हटाने की कोशिश: उन्होंने दावा किया कि उन्हें पद से हटाने के लिए राजनीतिक और संस्थागत दबाव बनाए गए, यहां तक कि असंवैधानिक तरीके से किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश को राष्ट्रपति बनाने की योजना भी बनी, लेकिन वह नाकाम रही.

डरावनी रात: 22 अक्टूबर 2024 को बंगभवन की घेराबंदी का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भीड़ ने परिसर में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन सेना ने तीन स्तर की सुरक्षा देकर स्थिति संभाली. उन्होंने बंगभवन के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शनों को डरावनी रात बताया और कहा कि भीड़ जुटाई गई थी तथा राष्ट्रपति आवास में लूटपाट की कोशिशें हुईं, जिन्हें सेना की तैनाती के बाद काबू में लाया गया. उन्होंने कहा, ‘मेरे खून की आहुति भी देनी पड़े तो दूंगा, लेकिन संवैधानिक निरंतरता बनाए रखूंगा.’

यूनुस ने कभी समन्वय नहीं किया: शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया की शुरुआत उन्होंने की थी, फिर भी यूनुस ने कभी उनके साथ समन्वय नहीं किया. ‘वे मुझसे मिलने एक बार भी नहीं आए और मुझे पूरी तरह अंधेरे में रखने की कोशिश की,’ उन्होंने कहा. उन्होंने यह भी दावा किया कि बिना परामर्श के उनकी विदेश यात्राएं रुकवाई गईं. कोसोवो और कतर के आमंत्रणों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उनके नाम से मना करने के पत्र तैयार कर दिए गए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘क्या हमारे संविधान के तहत राष्ट्रपति इतना व्यस्त होता है?’

विपक्षी बीएनपी के नेताओं और सशस्त्र बलों के समर्थन: उनके अनुसार, तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनसे स्पष्ट कहा, ‘आप सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं. आपकी हार का मतलब पूरे सशस्त्र बलों की हार होगी. हम किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने देंगे.’ उन्होंने कहा कि बीएनपी नेताओं ने भी उन्हें भरोसा दिलाया कि वे राष्ट्रपति को असंवैधानिक तरीके से हटाने के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने सब कुछ सहा, केवल इसलिए कि संवैधानिक व्यवस्था बनी रहे. राष्ट्रपति पद को कमजोर करने की कोशिशें हुईं, लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं.’

18 महीने बाद हुए चुनाव

12 फरवरी को बांग्लादेश की 13वें जातीय संसद का चुनाव हुआ. इसमें तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने लैंडस्लाइड विक्ट्री जीत दर्ज की. 299 सीटों वाली संसदीय चुनाव में बीएनपी गठबंधन ने 212 सीटें जीतकर 18 साल बाद सत्ता में वापसी. वहीं अंतरिम सरकार में मुखिया रहे मोहम्मद यूनुस अपने पुराने पेशे में लौट गए हैं. हालांकि, तारिक रहमान की जीत के बाद, यह खबरें भी सामने आई थीं कि यूनुस राष्ट्रपति बन सकते हैं, लेकिन रहमान के शपथ ग्रहण के बाद वह चुपचाप बांग्लादेश छोड़कर चले गए.  

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By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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