हसीना के बिना पहली बार बांग्लादेश में वोटिंग, क्या ‘जुलाई चार्टर’ से बदलेगा पूरा संविधान?

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में आज ऐतिहासिक चुनाव हो रहे हैं. शेख हसीना के बिना 15 साल बाद, 127 मिलियन वोटर फैसला करेंगे. क्या तारिक रहमान की BNP जीतेगी, या जमात-ए-इस्लामी कोई सरप्राइज देगी? जुलाई चार्टर पर पहली बार हुए रेफरेंडम और सेना की भारी तैनाती से देश की किस्मत बदल जाएगी.

Bangladesh Election 2026: आज 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश अपनी आजादी के बाद के सबसे बड़े और सबसे अहम चुनाव में वोट डाल रहा है. यह चुनाव इसलिए भी ‘स्पेशल’ है क्योंकि अगस्त 2024 में छात्रों के जिस आंदोलन ने शेख हसीना की सरकार को कुर्सी से उतारा था, उसके बाद यह पहली बार है जब जनता अपने असली लीडर को चुनने निकली है.

इसे बांग्लादेश में ‘सेकंड इंडिपेंडेंस’ (दूसरी आजादी) कहा जा रहा है. 15 साल बाद बिना शेख हसीना के हो रहे इस चुनाव में न केवल नई सरकार चुनी जाएगी, बल्कि देश के संविधान की किस्मत का भी फैसला होगा.

चुनाव का पूरा शेड्यूल: सुबह 7:30 से वोटिंग शुरू

इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, वोटिंग आज सुबह 7:30 बजे से शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चलेगी. पिछली बार के मुकाबले वोटिंग का समय 1 घंटा बढ़ाया गया है. नॉमिनेशन का काम 29 दिसंबर 2025 को ही पूरा हो गया था और कैंपेनिंग 22 जनवरी से शुरू होकर 10 फरवरी की शाम को रुक गई थी.

300 सीटें और 12.7 करोड़ वोटर्स: 2026 का सबसे बड़ा चुनाव

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नंबरों के मामले में यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव है.

  • टोटल वोटर्स: 12.7 करोड़ से ज्यादा (12,769,5183).
  • सीटें: संसद की 300 जनरल सीटों पर चुनाव हो रहा है. 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं, जिन्हें बाद में पार्टियों की परफॉरमेंस के हिसाब से भरा जाएगा.
  • मैदान में कितने: कुल 1,981 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. इसमें 50 राजनीतिक पार्टियों के 1,755 कैंडिडेट और 273 निर्दलीय शामिल हैं.
  • महिला उम्मीदवार: इस बार सिर्फ 83 महिला उम्मीदवार ही मैदान में हैं.

वोटिंग में ‘ट्विस्ट’: एक साथ दो बैलेट पेपर

इस बार का चुनाव एकदम अलग है. वोटर्स को दो बैलेट पेपर दिए जा रहे हैं.

  • संसद के लिए: अपना पसंदीदा नेता चुनने के लिए.
  • संविधान के लिए (रेफरेंडम): अंतरिम सरकार के ‘जुलाई चार्टर’ पर हां या ना कहने के लिए.

क्या है जुलाई चार्टर? मोहम्मद यूनुस की सरकार ने कुछ बड़े बदलावों का सुझाव दिया है:

  • कोई भी व्यक्ति 2 बार से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं बन पाएगा.
  • जजों की नियुक्ति के लिए अलग से कमीशन बनेगा, ताकि पीएम का दखल खत्म हो.
  • एक्सपर्ट्स और अल्पसंख्यकों के लिए संसद का एक ‘अपर हाउस’ (ऊपरी सदन) बनाया जाएगा.
  • भ्रष्टाचार रोकने के लिए ‘ओम्बुड्समैन’ (लोकपाल) का पद फिर से शुरू होगा.

कौन-कौन है रेस में? (हसीना की पार्टी बाहर)

इस बार शेख हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ इलेक्शन से बाहर है (सस्पेंडेड). अब मुकाबला मुख्य रूप से दो गुटों के बीच है:

1. BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी): इसे इस चुनाव का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है. पार्टी के चीफ तारिक रहमान 18 साल के वनवास (लंदन) के बाद 25 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश लौटे हैं.

इनका वादा: ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नारा दिया है. गरीबों के लिए ‘फैमिली कार्ड’ स्कीम लाएंगे जिससे खाने-पीने की मदद मिलेगी.

2. जमात-ए-इस्लामी: यह पार्टी भी मजबूती से उभरी है. इनके चीफ शफीकुर रहमान का कहना है कि अगर वे जीते तो भारत के साथ ‘सम्मानजनक और मजबूत’ रिश्ते बनाएंगे.

पहली बार ड्रोन और बॉडी कैमरों का इस्तेमाल

इलेक्शन को शांति से निपटाने के लिए सुरक्षा के तगड़े इंतजाम हैं:

सेना की तैनाती: करीब 92,500 सैन्यकर्मी तैनात हैं. यह 1971 के बाद सबसे बड़ी तैनाती है.

टेक का इस्तेमाल: चुनाव आयुक्त सनाउल्लाह के मुताबिक, 25,000 बॉडी कैमरों और ड्रोन्स से नजर रखी जा रही है. 90% पोलिंग बूथ्स पर CCTV लगाए गए हैं.

रिस्की बूथ: ढाका के 2,131 केंद्रों में से 1,614 को पुलिस ने रिस्की बताया है.

पहली बार मिलेगा ‘डिजिटल’ वोटिंग का मौका

बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार विदेश में रहने वाले (Expatriates) करीब 8 लाख लोग IT-बेस्ड पोस्टल बैलेट के जरिए वोट डाल सकेंगे. साथ ही, इस बार 3.58% वोटर्स ऐसे हैं जो पहली बार (First Time Voters) वोट डाल रहे हैं.

एक्सपर्ट्स को है डर: क्या चुनाव निष्पक्ष होगा?

भले ही सरकार इसे ‘ऐतिहासिक’ कह रही है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स को चिंता भी है.

देबप्रिया भट्टाचार्य (इकोनॉमिस्ट): उनके अनुसार, अभी भी कई अनिश्चितताएं हैं. क्या हर कोई बिना डरे वोट दे पाएगा? क्या गिनती सही होगी? उनके मुताबिक, अंतरिम सरकार ने पुराने सिस्टम (पैसा और पावर) को पूरी तरह नहीं बदला है.

जिलुर रहमान (CGS): उनका मानना है कि अगर वोटिंग ज्यादा हुई तो BNP को फायदा होगा, लेकिन अगर लोग कम निकले तो जमात-ए-इस्लामी बाजी मार सकती है.

जॉन डैनिलोविज (पूर्व अमेरिकी राजनयिक): उनके मुताबिक, असली परीक्षा 13 फरवरी को होगी जब नतीजे आएंगे. क्या पार्टियां हार को स्वीकार करेंगी?

यूनुस की अपील- शांति बनाए रखें

अंतरिम सरकार के हेड मोहम्मद यूनुस ने संदेश दिया है कि यह चुनाव एक लोकतांत्रिक देश की बुनियाद है. उन्होंने सभी से संयम बरतने और अपनी मर्जी से वोट डालने की अपील की है. मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने भी भरोसा दिलाया है कि 45 देशों के ऑब्जर्वर्स की मौजूदगी में चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ होंगे.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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