भारत के 'चिकन नेक' पर चीन को ले आए तारिक रहमान! बांग्लादेश की डील ने बढ़ाई चिंता

Bangladesh China Teesta River Cooperation: चीन और बांग्लादेश ने तीस्ता समेत अन्य नदियों के जल प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपने चीन दौरे पर बीजिंग से इस पर तकनीकी और वित्तीय सहायता मांगी है.यह परियोजना भारत के बॉर्डर सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है.

Bangladesh China Teesta River Cooperation: तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग और मजबूत होने जा रहा है. बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने तीस्ता समेत अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन से जल संसाधन प्रबंधन और तीस्ता परियोजना में तकनीकी सहयोग की भी मांग की, जिस पर चीन ने पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया. यह समझौता भारत की टेंशन बढ़ाने वाला है, क्योंकि तीस्ता नदी पर चीन का सहयोग मिलने को मतलब होगा चिकेन नेक के पीस चीन की पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी. 

बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संस्था (BSS) के मुताबिक, गुरुवार को चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने बीजिंग में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की. इसी बैठक में तीस्ता और अन्य नदियों के बेहतर प्रबंधन को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. तारिक रहमान इसी सप्ताह चीन के दौरे पर पहुंचे हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका दूसरा विदेश दौरा है. इससे पहले उन्होंने अपना पहला विदेशी दौरा मलेशिया का किया था. 

22 जून को वे कुआलालंपुर से चीन के डालियान पहुंचे थे, जहां उन्होंने वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इसके बाद बुधवार को वे हाई-स्पीड ट्रेन से डालियान से बीजिंग पहुंचे. इस दौरे के दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, प्रधानमंत्री ली च्यांग और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी होनी है.

बाढ़ रोकने और जल प्रबंधन के लिए मांगा सहयोग

जल संसाधन मंत्री के साथ बैठक के दौरान तारिक रहमान ने बताया कि उनकी सरकार देश में नदी खुदाई का बड़ा अभियान चला रही है. इसका मकसद बाढ़ के खतरे को कम करना, पर्यावरण की रक्षा करना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है. तारिक रहमान ने बैठक में चीन से नदी किनारों के कटाव को रोकने, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और देश के अंदरूनी जल परिवहन को मजबूत करने में भी सहयोग मांगा. इसी सिलसिले में उन्होंने चीन से जल संसाधन प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में सहयोग देने का अनुरोध किया. साथ ही तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता भी मांगी.

चीन ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा

चीनी जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने बांग्लादेश सरकार को भरोसा दिलाया कि जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े सभी प्रयासों में चीन पूरा सहयोग देगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) और पिछले साल बांग्लादेश का दौरा करने वाले चीनी जल विशेषज्ञों की टीम इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देशों के बीच जल संसाधन प्रबंधन को लेकर सहयोग व्यावहारिक और शोध आधारित रहा है.

ली गुओयिंग ने यह भी कहा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में चीन के अनुभव का लाभ बांग्लादेश उठा सकता है. उन्होंने बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए चीन आने का भी निमंत्रण दिया. यानी यह साफ हो रहा है कि बांग्लादेश अब भारत के बॉर्डर इलाके में चीन को मौका देने का फैसला कर चुका है. 

भारत-बांग्लादेश संबंधों में संवेदनशील है तीस्ता परियोजना

तीस्ता परियोजना लंबे समय से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक संवेदनशील मुद्दा रही है. इस साल फरवरी में तारिक रहमान के सत्ता संभालने के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मिले थे. इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था.

इसी पृष्ठभूमि में भारत ने वर्ष 2024 में तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी विकास के लिए बांग्लादेश को सहयोग देने की पेशकश की थी. इसके जरिए दोनों देशों के बीच साझा नदियों के प्रबंधन में सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश की गई थी. हालांकि, बांग्लादेश ने इस पर आगे बढ़ने से मना कर दिया.  पिछले महीने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग दौरे के दौरान औपचारिक रूप से चीन से तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना में सहयोग और समर्थन का अनुरोध किया था. यानी तीस्ता के मुद्दे पर बांग्लादेश चीन के पाले में ही जा रहा है.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है तीस्ता परियोजना?

तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है. बांग्लादेश में यह लाखों लोगों की सिंचाई और आजीविका का प्रमुख स्रोत है. चीन कई वर्षों से तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट में रुचि दिखाता रहा है. यह परियोजना भारत के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है. इसी वजह से यह परियोजना भारत की रणनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम मानी जाती है.

ये भी पढ़ें:- NATO चीफ के बयान पर भड़कीं मेलोनी, उतारी मंत्रियों की फौज; ईरान में करवाया फोन, ट्रंप से भी जुड़ा है मामला

ये भी पढ़ें:- होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव, ओमान के पास जहाज पर हमला, UN एजेंसी ने रोका जहाजों का निकासी अभियान

गंगा जल संधि भी बनी हुई है अहम मुद्दा

भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारा हमेशा से महत्वपूर्ण विषय रहा है. इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि गंगा नदी के सूखे मौसम में जल बंटवारे को लेकर 1996 में हुई भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि इस वर्ष अपनी 30 वर्ष की अवधि पूरी कर रही है. अगर दोनों देश इसे आगे नहीं बढ़ाते हैं तो यह संधि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में आने वाले समय में जल साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों का एक प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Anant Narayan Shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >