Bangladesh Army Reshuffle: बांग्लादेश की सेना के शीर्ष नेतृत्व में रविवार को एक बड़ा और अहम फेरबदल किया गया. इसमें नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) की नियुक्ति भी शामिल है. यह बदलाव देश में मोहम्मद यूनुस की विदाई और तारिक रहमान के नेतृत्व में नई राजनीतिक सत्ता के गठन के तुरंत बाद हो रहा है. इसे सेना के ढांचे को नए सिरे से संतुलित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है. इन नियुक्तियों और तबादलों का असर न केवल प्रमुख रणनीतिक सैन्य कमानों पर पड़ा है, बल्कि देश की अहम सैन्य खुफिया एजेंसी भी इस बदलाव की जद में आई है. आर्मी चीफ वकार उज जमां का नियंत्रण भी अब थोड़ा बहुत कमजोर हो सकता है.
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ये तबादले सेना मुख्यालय द्वारा जारी किए गए हैं. बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम आलो ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि सेना मुख्यालय स्तर पर सबसे अहम बदलाव चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) के पद को लेकर हुआ है. लेफ्टिनेंट जनरल एमडी मैनुर रहमान को नया सीजीएस नियुक्त किया गया है. इससे पहले वे आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड (ARTDOC) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. CGS का पद सेना में रणनीतिक फैसलों और ऑपरेशनल समन्वय के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस नियुक्ति को तारिक रहमान सरकार के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
डिवीजन कमांड में बदलाव
इसी क्रम में मोहम्मद यूनुस के करीबी माने जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल एस. एम. कमरुल हसन को सेना के एक प्रभावशाली पद से हटा दिया गया है. वे अंतरिम सरकार के दौरान आर्म्ड फोर्सेज डिवीजन (AFD) के प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर थे, लेकिन अब उन्हें विदेश मंत्रालय के अधीन राजदूत बनाकर देश से बाहर भेज दिया गया है. उनकी जगह 24 इन्फैंट्री डिवीजन के GOC रहे मेजर जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को प्रमोशन देकर लेफ्टिनेंट जनरल बनाया गया है और AFD का नया प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर नियुक्त किया गया है.
भारत में नियुक्त एडवाइजर को वापस बुलाया
डिवीजन स्तर पर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. भारत में बांग्लादेश हाई कमीशन में डिफेंस एडवाइजर के तौर पर तैनात ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हफीजुर रहमान को स्वदेश वापस बुलाया गया है. उन्हें मेजर जनरल के पद पर पदोन्नति देकर 55वीं इन्फैंट्री डिवीजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग बनाया गया है. वहीं, 55वीं इन्फैंट्री डिवीजन के कमांडर रहे मेजर जनरल जे. एम. इमदादुल इस्लाम को ईस्ट बंगाल रेजिमेंट सेंटर (EBRC) का कमांडेंट नियुक्त किया गया है. EBRC में तैनात मेजर जनरल फिरदौस मलिक को 24 इन्फैंट्री डिवीजन का नया GOC बनाया गया है.
खुफिया तंत्र में भी हुआ बदलाव
इसके अलावा सैन्य खुफिया तंत्र में भी बड़ा फेरबदल हुआ है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ डिफेंस इंटेलिजेंस (DGFI) के महानिदेशक मोहम्मद जहांगीर आलम को विदेश मंत्रालय भेज दिया गया है. उनकी जगह ब्रिगेडियर जनरल कैसर राशिद चौधरी को प्रमोशन देकर मेजर जनरल बनाया गया है और DGFI की कमान सौंपी गई है. इन बदलावों को सेना के भीतर इंटेलिजेंस सिस्टम को नए सिरे से मजबूत करने और सरकार के नियंत्रण को पुख्ता करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
क्या है इन बदलावों का लक्ष्य?
इन सभी बदलावों में बीएनपी के साथ अच्छे रिश्ता रखने वाले अधिकारियों को नियुक्त किया गया है. इन तबादलों और नियुक्तियों के बाद यह संदेश साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय चाहता है कि सेना के अहम पदों पर ऐसे अधिकारी हों, जो सीधे सरकार के साथ तालमेल में काम करें. खासतौर पर खुफिया और रणनीतिक पदों पर बदलाव इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में सेना और सरकार के रिश्तों में नया पावर बैलेंस देखने को मिल सकता है. जानकारों के मुताबिक, यह फेरबदल सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर सेना की कमांड चेन को नए सिरे से आकार देने की कोशिश है.
तारिक रहमान के पीएम बनते ही विदा हुए यूनुस
प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के 17 फरवरी को सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों बाद किए गए हैं. राजनीतिक संदर्भ में देखें तो बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) ने 12 फरवरी को हुए महत्वपूर्ण आम चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था. इसके बाद 60 वर्षीय तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, जिसके साथ ही नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चला 18 महीने का अंतरिम शासन समाप्त हो गया. नई सरकार के गठन के बाद सेना में हुआ यह बड़ा फेरबदल देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था, दोनों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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