AI  के खतरे से वाकिफ हैं एंथ्रोपिक के सीईओ, कहा-सावधानी इसे जानलेवा बनने से रोक सकती है

क्या AI इंसानों को मार सकता है? यह सवाल पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है. इसकी वजह यह है कि एंथ्रोपिक के एक रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने 9 सितंबर को अपनी नौकरी छोड़ने के बाद यह कहा था कि एआई इस दशक के अंत तक इंसानियत के लिए खतरा बन जाएगा और वह लोगों की जान ले लेगा. अब एंथ्रोपिक के  CEO डारियो अमोदेई ने भी इस मामले में टिप्पणी की है. अमोदेई ने CNN के साथ बातचीत में एआई को लेकर अपनी राय रखी.

डारियो अमोदेई ने अपने बयान में कहा है कि वे इस बात से कुछ हद तक सहमत हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसानों को मार सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर सही रास्ता अपनाया जाए, तो गलत होने की संभावना बहुत कम है. एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने सुपरइंटेलिजेंट कंप्यूटर सिस्टम के जोखिमों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फर्मों से इस शक्तिशाली टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट को धीमा करने को कहा. 


सुपरइंटेलिजेंट कंप्यूटर सिस्टम को धीमा करने की जरूरत

डारियो अमोदेई ने AI कंपनियों से कहा कि वे इस पावरफुल टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट को धीमा करें, क्योंकि सुपरइंटेलिजेंट कंप्यूटर सिस्टम के रिस्क को लेकर चिंता बढ़ रही है. इंटरव्यू में डारियो अमोदेई ने कहा कि वह एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन की राय से असहमति से ज्यादा सहमति रखते हैं. उन्होंने कहा कि यह एक दिलचस्प इस्तीफा है क्योंकि जब उन्होंने छोड़ा, तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि एआई के क्षेत्र में एंथ्रोपिक सबसे जिम्मेदार कंपनी है. अमोदेई ने कहा कि चीजें खराब हो सकती हैं, यह संभव है, लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि चीजें गलत रास्ते पर ना जाएं.इस काम के लिए पूरे विश्व को साथ चलना होगा.

जैकब कॉक्सन की चेतावनी -एआई हम सबको मार सकता है


जैकब कॉक्सन ने AI के बारे में चेतावनी देते हुए यह कहा है कि यह हमारी जान ले सकता है. जैकब ने कहा है कि जो लोग एआई सिस्टम की ताकत को कम आंक रहे हैं वे गलती कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये जल्द ही सुपरह्यूमन सिस्टम बन जाएंगी और किसी भी चीज को हैक कर पाएंगे. रातों-रात किसी भी फील्ड में क्रांति ला पाएंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि ये सुपरइंटेलिजेंट AI सिस्टम कुछ ही सालों में इंसानियत को खत्म कर सकते हैं और इन्हें बनाने वाले लोग इस बात को जानते हैं. जैकब ने यह भी दावा किया है कि एंथ्रोपिक भी इस बारे में अच्छे से जानती है, लेकिन वह खुद को बेहतर AI सिस्टम बनाने वाली पहली कंपनी बनना चाहती है, इसलिए वह सभी चीजों को दरकिनार कर रही है.

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लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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