अनाथालय से कांग्रेस तक, अमेरिकी संसद में पहुंची अफगान मूल की पहली महिला; आयशा वहाब ने रचा इतिहास

आयशा वहाब कैलिफोर्निया के विशेष चुनाव में जीतकर अमेरिकी कांग्रेस पहुंचने वाली पहली अफगान-अमेरिकी बन गई हैं. 53.1% वोट से जीत के साथ उनकी कहानी ने नया इतिहास रचा.

अमेरिकी राजनीति में आयशा वहाब ने शुक्रवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल की. 39 वर्षीय प्रगतिशील डेमोक्रेट ने कैलिफोर्निया के विशेष चुनाव में जीत दर्ज कर अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनी जाने वाली पहली अफगान-अमेरिकी होने का इतिहास रच दिया. 18 अगस्त को हुए इस चुनाव में उन्होंने साथी डेमोक्रेट मेलिसा हर्नांडेज को 53.1 फीसदी वोटों से हराया. खास बात यह रही कि वहाब के खिलाफ और हर्नांडेज के समर्थन में इजरायल समर्थक समूहों ने करीब 63 लाख डॉलर खर्च किए थे, लेकिन इसके बावजूद वहाब चुनाव जीतने में सफल रहीं.

एरिक स्वालवेल की खाली सीट से कांग्रेस तक पहुंचीं आयशा

यह चुनाव पूर्व कांग्रेस सदस्य एरिक स्वालवेल की खाली हुई सीट के लिए कराया गया था. स्वालवेल ने अप्रैल में यौन दुराचार के आरोपों के बीच इस्तीफा दिया था. हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे इन आरोपों को खारिज किया है.

आयशा वहाब फिलहाल कैलिफोर्निया की स्टेट सीनेटर हैं. विशेष चुनाव में जीत के बाद वह इस सीट का बचा हुआ कार्यकाल जनवरी तक पूरा करेंगी. इसके बाद नवंबर में एक बार फिर उनका मुकाबला मेलिसा हर्नांडेज से होगा. इस बार दोनों नेता पूरे दो साल के कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में उतरेंगी.

मुश्किल हालात से निकलीं और कांग्रेस तक पहुंचीं

आयशा वहाब की कहानी उनकी चुनावी जीत से कहीं ज्यादा दिलचस्प है. उनके माता-पिता सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान अफगानिस्तान छोड़कर अमेरिका आ गए थे. उनका जन्म 11 जनवरी 1987 को न्यूयॉर्क के क्वींस में हुआ. वह अभी छोटी ही थीं कि उनके पिता की हत्या कर दी गई. कुछ समय बाद उनकी मां का भी निधन हो गया. इसके बाद आयशा और उनकी बहन को फोस्टर केयर में जाना पड़ा. बाद में कैलिफोर्निया के एक दंपति ने दोनों को गोद ले लिया.

फ्रेमोंट में हुई परवरिश, टेक और बिजनेस में भी किया काम

आयशा की परवरिश कैलिफोर्निया के फ्रेमोंट में हुई. उन्होंने जॉन एफ. कैनेडी हाई स्कूल और ओहलोन कॉलेज में पढ़ाई की. इसके बाद सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की. उन्होंने आगे कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, ईस्ट बे से एमबीए किया और 2024 में यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया से सोशल वर्क में डॉक्टरेट पूरी की.

राजनीति में कदम रखने से पहले भी उनका करियर काफी वर्सेटाइल रहा. उन्होंने टेक्नोलॉजी और बिजनेस सेक्टर में काम किया और अकाउंट मैनेजर, बिजनेस डेवलपमेंट डायरेक्टर और आईटी कंसल्टेंट जैसे पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं.

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आर्थिक संकट ने बदली जिंदगी की दिशा

2008 के आर्थिक संकट का असर आयशा और उनके परिवार पर भी पड़ा. उनकी नौकरी चली गई और परिवार के कारोबार को भी नुकसान हुआ. इसी दौरान उनके पिता की तबीयत खराब होने लगी. आर्थिक मुश्किलों के चलते परिवार को अपना घर तक गंवाना पड़ा. इसके बाद उन्हें फ्रेमोंट से हेवर्ड जाना पड़ा. इन अनुभवों ने आयशा के भीतर किफायती आवास और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को लेकर गहरी दिलचस्पी पैदा की.

2018 में राजनीति में रखा पहला बड़ा कदम

आयशा वहाब ने 2018 में हेवर्ड सिटी काउंसिल का चुनाव जीतकर औपचारिक रूप से राजनीति में अपनी जगह बनाई. इसके साथ ही वह अमेरिका में सार्वजनिक पद हासिल करने वाली शुरुआती अफगान-अमेरिकी महिलाओं में शामिल हो गईं.

उन्होंने 2018 से 2022 तक सिटी काउंसिल में काम किया और इस दौरान मेयर प्रो टेम्पोर की जिम्मेदारी भी संभाली. इसके बाद 2022 में उन्होंने कैलिफोर्निया स्टेट सीनेट का चुनाव जीता. इस जीत के साथ वह कैलिफोर्निया स्टेट सीनेट के लिए चुनी जाने वाली पहली मुस्लिम और अफगान-अमेरिकी बनीं.

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जातिगत भेदभाव के खिलाफ भी उठाई आवाज

2023 में आयशा वहाब ने कैलिफोर्निया में जातिगत भेदभाव को गैरकानूनी बनाने वाला बिल पेश किया. इस पहल के बाद उन्हें विरोध के साथ-साथ धमकियों का भी सामना करना पड़ा.

उन्होंने बताया था कि उनके कार्यालय में धमकी भरे फोन आए और सैकड़ों ईमेल भी भेजे गए. वहाब का कहना था कि भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति उसी समुदाय से आता हो जिसे भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, उनका यह विधेयक कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम के वीटो के कारण कानून नहीं बन सका.

कांग्रेस चुनाव में खुलकर अपनाया प्रगतिशील एजेंडा

2026 में आयशा वहाब ने कैलिफोर्निया के 14वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा. इस चुनाव में उन्होंने अपने प्रगतिशील एजेंडे को खुलकर सामने रखा. उनके प्रमुख मुद्दों में 'मेडिकेयर फॉर ऑल', अरबपतियों पर ज्यादा टैक्स, छात्र कर्ज माफी, मजबूत सामाजिक कल्याण योजनाएं और कॉरपोरेट ताकत को सीमित करने वाली नीतियां शामिल थीं. उनके अभियान को डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख प्रगतिशील नेताओं अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज और प्रमिला जयपाल का समर्थन भी मिला.

'फोस्टर केयर से कांग्रेस तक' का सफर

आयशा वहाब की जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह अमेरिकी कांग्रेस की पहली अफगान-अमेरिकी सदस्य बन गई हैं. अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि 'फोस्टर केयर से कांग्रेस तक' का उनका सफर अमेरिकी सपने की संभावनाओं को सामने लाता है.

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अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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