संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत 8 मुस्लिम बहुल देशों ने बृहस्पतिवार को एक संयुक्त बयान जारी कर इजरायल की गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन देशों का कहना है कि इजराइल के लगातार हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित गाजा शांति योजना को पटरी से उतार सकते हैं. बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई युद्ध समाप्त करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है.
किन देशों ने किया संयुक्त बयान जारी
यह संयुक्त बयान यूएई, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की ओर से जारी किया गया. इन देशों ने कहा कि कई फिलिस्तीनी गुट ट्रंप के शांति रोडमैप को स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन इजराइल का सैन्य अभियान समझौते के दूसरे चरण को लागू होने से रोक रहा है.
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डालता, तब तक इजरायली सेना गाजा में अपनी मौजूदा स्थिति से पीछे नहीं हटेगी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भेजे गए मसौदे पर इजरायल की सहमति नहीं बनी है और तेल अवीव ने अपनी अलग टिप्पणियां भेजी हैं.
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन का आरोप
संयुक्त बयान में कहा गया कि गाजा में इजराइल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है. देशों ने आरोप लगाया कि अस्पतालों, चिकित्सा सुविधाओं और नागरिक ढांचे पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं. बयान में कहा गया कि ऐसी कार्रवाई पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को कमजोर कर रही है.
मानवीय संकट पर जताई गहरी चिंता
आठों देशों ने कहा कि गाजा में चिकित्सा सुविधाओं, स्वास्थ्यकर्मियों और राहत एजेंसियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है. उन्होंने मांग की कि दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य राहत सहायता को बिना किसी रुकावट के सुरक्षित तरीके से गाजा के सभी इलाकों तक पहुंचने दिया जाए. इन देशों का कहना है कि मौजूदा हालात मानवीय संकट को और गंभीर बना रहे हैं.
वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम का भी उठाया मुद्दा
इस संयुक्त बयान में कहा गया कि गाजा संकट को वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम की स्थिति से अलग नहीं देखा जा सकता. 8 देशों ने दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) के प्रति अपना समर्थन दोहराया और फिलिस्तीनी क्षेत्रों के किसी भी संभावित विलय या लोगों के जबरन विस्थापन का विरोध किया.
युद्धविराम की राह में सबसे बड़ी अड़चन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित योजना के अनुसार हमास को चरणबद्ध तरीके से हथियार सौंपने थे, जबकि इसके बदले इजरायल को सैन्य कार्रवाई रोककर धीरे-धीरे गाजा से सेना हटानी थी. लेकिन इजराइल पहले पूर्ण निरस्त्रीकरण और उसके बाद ही सैनिक वापसी की बात पर अड़ा हुआ है. यही मतभेद फिलहाल युद्धविराम और शांति समझौते के अगले चरण में सबसे बड़ी बाधा बन गया है.
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