COVID19 : वुहान शहर में कोरोना वायरस के टीके के क्लिनिकल ट्रायल के लिए 5,000 लोगों ने नाम कराया दर्ज

चीन ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए इसका टीका बनाने के प्रयास तेज कर दिये हैं.

बीजिंग : चीन ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए इसका टीका बनाने के प्रयास तेज कर दिये हैं. देश के वुहान शहर में लगभग 5,000 लोगों ने कोरोना वायरस का टीका के लिए पहले चरण के क्लिनिकल ट्रायल (चिकित्सीय परीक्षण) के लिए अपने नाम दर्ज कराये हैं. वुहान में पिछले साल के अंत में यह वायरस पहली बार उभरा था. सरकार द्वारा संचालित ‘बीजिंग न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें भाग लेने वालों के लिए भर्ती इस सप्ताह समाप्त हो गयी, जिसमें लगभग 5,000 लोगों ने परीक्षण के लिए अपना नाम दर्ज करवाया है.

चाइना क्लिनिकल ट्रायल रजिस्टर के अनुसार, कोरोना वायरस टीका (एडेनोवायरल वेक्टर) का परीक्षण 18 से 60 वर्ष की आयु वाले स्वस्थ वयस्कों पर किया जाएगा. एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेज के विशेषज्ञों के नेतृत्व में होने वाले इस परीक्षण को 16 मार्च को मंजूरी मिल गयी थी और शोध के छह महीने तक चलने की संभावना है. इसमें भाग लेने वाले लोगों को टीकाकरण के बाद 14-दिन तक आइसोलेट रहना होगा और उनकी स्वास्थ्य स्थिति हर दिन दर्ज की जाएगी.

गौरतलब है कि चीन में कोरोना वायरस के कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 81,218 हो गयी. इनमें से 3,281 लोगों की मौत हो गयी है, 4,287 मरीजों का इलाज चल रहा है और 73,650 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गयी है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >