मातृत्व के मामले में जिंबाबवे और बांग्लादेश से पीछे है भारत

लंदन: मां बनने के लिए बेहतरीन देश के मामले में भारत और भी पिछड गया है और अब वह जिंबाबवे तथा बांग्लादेश जैसे देशों से भी पीछे 140वें स्थान पर चला गया है. ‘सेव द चिल्ड्रेन’ संगठन की 2015 के लिए ‘विश्व की माताओं की स्थिति’ रिपोर्ट में भारत को मातृत्व सूचकांक पर 179 देशों […]

लंदन: मां बनने के लिए बेहतरीन देश के मामले में भारत और भी पिछड गया है और अब वह जिंबाबवे तथा बांग्लादेश जैसे देशों से भी पीछे 140वें स्थान पर चला गया है.

‘सेव द चिल्ड्रेन’ संगठन की 2015 के लिए ‘विश्व की माताओं की स्थिति’ रिपोर्ट में भारत को मातृत्व सूचकांक पर 179 देशों की सूची में 140वें स्थान पर रखा गया है. पिछले साल वह 137वें स्थान पर था. इस तरह वह तीन पायदान और नीचे चला गया. यह सूचकांक चार बिंदुओं पर आधारित है और यह जच्चा-बच्चा मौत तथा पांच साल से कम के बच्चों की मौत के खतरे, औपचारिक शिक्षा पूरी करने के लिए वांछित वर्ष, प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय और सरकार में महिलाओं की भागीदारी का आकलन करता है.

अनुसंधानकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र के आंकडों का उपयोग कर 179 देशों का सूचकांक तैयार किया जो दिखाता है कि कहां मां और बच्चे सबसे बेहतर हालत में है और कहां उन्हें सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड रहा है.

‘सेव द चिल्ड्रेन’ के अनुसार भारतीय बच्चे औपचारिक स्कूली शिक्षा में औसतन 11.7 साल लगाते हैं जबकि अपनी पांचवी सालगिरह मनाने से पहले 1000 भारतीय बच्चों में से 52.7 बच्चों की मौत हो जाती है.

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