काठमांडो : नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने हजारों जिंदगियों के साथ ही 200 से अधिक ऐतिहासिक स्मारकों की चूलें बुरी तरह हिला दी हैं जिनमें राजधानी स्थित कई विश्व विरासत स्थल भी हैं. ऐसी इमारतों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए नेपाल ने यूनेस्को की मदद मांगी है. इन ऐतिहासिक स्मारकों में से अधिकतर के डिजाइन पुरातत्व विभाग के पास उपलब्ध हैं और विभाग के प्रमुख भेष नारायण दहल ने कहा है कि क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत और उनका पुराना स्वरुप लौटाने में 5-7 साल का समय लगेगा.
यूनेस्को द्वारा 1979 में विश्व विरासत घोषित की गयी काठमांडो घाटी में कुल मिलाकर सात क्षेत्र हैं. इनमें हनुमान ढोका को महल इलाके के रुप में जाना जाता है. इसके साथ ही पाटन दरबार, भक्तपुर दरबार स्क्वेयर , स्वयंभुनाथ , बौद्धनाथ , छांग्यूनारायण और पशुपतिनाथ मंदिर प्रमुख हैं.
इनमें से केवल पशुपतिनाथ मंदिर को ही कम नुकसान हुआ है जबकि बाकी स्थलों को भारी नुकसान झेलना पडा है. इन इमारतों की अपने किस्म की अनोखी पैगोडा शैली है जो नेपाल की खासियत है. घाटी में पाटन जिले में सर्वाधिक नुकसान हुआ है जहां भूकंप से 11 स्मारक प्रभावित हुए हैं. इसके बाद भक्तपुर और गोरखा जिले में सात प्रमुख स्मारक नष्ट हो गए हैं.
हालांकि कुछ स्मारक भूकंप की भयावहता से बच गए जिनमें कुमारी मंदिर , न्यातापोला और तलेजु मंदिर शामिल हैं. नेपाल पुरातत्व विभाग के महानिदेशक दहल ने बताया, करीब 59 स्मारक पूरी तरह नष्ट हो गए और 191 को आंशिक क्षति पहुंची है. हमने यूनेस्को से इन स्मारकों को हुए नुकसान का आकलन करने को कहा है.
