अमेरिकी ग्रीन कार्ड के इंतजार में मर जायेंगे 4.24 लाख आवेदक? जिसमें 90% भारतीय!

ग्रीन कार्ड मूल रूप से एक स्थायी निवासी कार्ड है. ग्रीन कार्ड को आधिकारिक स्थायी निवासी कार्ड के रूप में जाना जाता है. यह दस्तावेज अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को जारी किया जाता है, जो इस बात का सबूत होता है कि कार्डधारक को स्थायी रूप से देश में रहने का विशेषाधिकार दिया गया है.

वाशिंगटन डीसी स्थित कैटो इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगभग 11 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड बैकलॉग से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. दावा यह भी किया जा रहा है कि भारत के नए आवेदकों को जीवन भर इंतजार करना पड़ सकता है. रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 4.24 लाख आवेदक ग्रीन कार्ड के इंतजार में मर सकते हैं, इनमें से 90 फीसदी भारतीय हैं.

ग्रीन कार्ड बैकलॉग इस साल रिकॉर्ड 1.8 मिलियन तक पहुंचा

रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग इस साल रिकॉर्ड 1.8 मिलियन मामलों तक पहुंच गया. इस बैकलॉग में वे अप्रवासी शामिल हैं जो ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

कैसे वेटिंग में जाता है ग्रीन कार्ड

जब कोई नियोक्ता कर्मचारी के लिए ग्रीन कार्ड के लिए याचिका दायर करता है, तो देश सीमा के तहत कोई ग्रीन कार्ड उपलब्ध नहीं होने पर याचिका को प्रतीक्षा सूची में रखा जाता है. ग्रीन कार्ड स्पॉट उपलब्ध होने पर कोई व्यक्ति स्थिति को स्थायी निवास में समायोजित करने के लिए याचिका दायर कर सकता है.

क्या है ग्रीन कार्ड

ग्रीन कार्ड मूल रूप से एक स्थायी निवासी कार्ड है. ग्रीन कार्ड को आधिकारिक स्थायी निवासी कार्ड के रूप में जाना जाता है. यह दस्तावेज अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को जारी किया जाता है, जो इस बात का सबूत होता है कि कार्डधारक को स्थायी रूप से देश में रहने का विशेषाधिकार दिया गया है.

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राष्ट्रपति के सलाहकार पैनल ने दो लाख अप्रयुक्त ग्रीन कार्ड को वापस लेने की सिफारिश मंजूर की

अमेरिका में राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग ने 1992 के बाद से इस्तेमाल नहीं किए गए परिवार एवं रोजगार श्रेणियों के 2,30,000 से अधिक ग्रीन कार्ड वापस लेने की सिफारिश मंजूर कर ली है, जिससे इस कार्ड के लिए इंतजार कर रहे हजारों भारतीय-अमेरिकियों को लाभ हो सकता है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के ‘एडवाइजरी कमीशन ऑन एशियन अमेरिकन्स, नेटिव हवाइयन्स एंड पेसिफिक आइलैंडर्स’ के सदस्य एवं भारतीय अमेरिकी उद्यमी अजय भुटोरिया ने आयोग के सामने अपनी सिफारिशों के बारे में पिछले महीने बताया था कि 1992 से 2022 तक इस्तेमाल नहीं किए गए रोजगार आधारित 2,30,000 से अधिक ग्रीन कार्ड को वापस लिया जाएगा और हर वित्त वर्ष में इनमें से कुछ कार्ड को जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. ये कार्ड इस श्रेणी के लिए तय 1,40,000 कार्ड की वार्षिक सीमा के अतिरिक्त होंगे.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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