लश्कर आतंकी लखवी की हिरासत निलंबित, रिहाई का आदेश

लाहौर/नयी दिल्ली: पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड एवं लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी जकीउर रहमान लखवी को लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी कानून के तहत हिरासत में रखने संबंधी पंजाब सरकार के आदेश को आज निलंबित कर दिया तथा उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया. इस पर भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने […]

लाहौर/नयी दिल्ली: पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड एवं लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी जकीउर रहमान लखवी को लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी कानून के तहत हिरासत में रखने संबंधी पंजाब सरकार के आदेश को आज निलंबित कर दिया तथा उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया. इस पर भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने सीमा पार से जारी आतंकवाद पर बार बार भारत को जुबान दी थी लेकिन इस घटना से उसकी जुबान का ‘मोल’ गिर गया है.

इस बीच, अदालत के आदेश के बावजूद पंजाब की सरकार ने अदियाला जेल के प्रशासन को अब तक लखवी को रिहा करने का आदेश नहीं दिया है.रावलपिंडी स्थित जेल के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें अब लखवी की रिहाई के संदर्भ में लाहौर हाईकोर्ट का आदेश नहीं मिला है.’’
लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने कहा कि सरकार के पास उनके मुवक्किल को रिहा करने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है. यह पूछे जाने पर कि पंजाब सरकार ने जेल के अधीक्षक को लखवी की रिहाई का आदेश दिया है तो जेल अधिकारी ने कहा, ‘‘जेल प्रशासन किसी भी कैदी के मामले में कानून के मुताबिक कदम उठाता है.’’ लाहौर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मुहम्मद अनवारुल हक ने 55 वर्षीय लखवी की हिरासत को निलंबित कर दिया क्योंकि सरकार अदालत में जरुरी रिकॉर्ड पेश करने में नाकाम रही.
न्यायाधीश ने लखवी को आदेश दिया कि वह अपनी रिहाई के लिए दो मुचलकों पर 10-10 लाख रुपये जमा करे. लाहौर हाईकोर्ट के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘विधि अधिकारी ने लखवी के बारे में सूचना सौंपी थी लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया और घोषित किया कि सबूत संतोषजनक नहीं है.’’ न्यायमूर्ति हक ने बीते सात अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई पर सरकार के वकील को आदेश दिया था कि वह लखवी की गतिविधियों के बारे में गोपनीय दस्तावेजों के रिकॉर्ड आज की सुनवाई पर अदालत में सौंपें.
लखवी ने पंजाब सरकार के जिला समन्वय अधिकारी (ओकारा) के 14 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे 30 दिन के लिए हिरासत में रखने की बात की गई थी. इस घटनाक्रम पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान ने सीमा पार से जारी आतंकवाद पर बार बार भारत को जुबान दी थी लेकिन इस घटना से उसकी जुबान का ‘मोल’ गिर गया है.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, ‘‘ इस मुद्दे पर हमारी जो चिंताएं हैं उनसे पूर्व में पाकिस्तान सरकार को अवगत कराया गया था. इन्हें फिर दोहराया जाएगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ ज्ञात आतंकवादियों पर प्रभावी तरीके से मुकदमा नहीं चलाया जाना भारत और विश्व के लिए असली सुरक्षा खतरा है. यह सीमा पार आतंकवाद के संबंध में हमें बार बार दिए गए आश्वासनों के महत्व को भी कम करता है.’’
भारतीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ यह बेहद निराशाजनक घटनाक्रम है. पाकिस्तान को हरसंभव यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लखवी जैसे आतंकवादी जेल से बाहर न आने पाएं.’’ अधिकारी ने बताया, ‘‘ मुंबई आतंकवादी हमले के पीडितों के प्रति न्याय सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान को तत्काल उचित मंच पर सभी कानूनी उपाय करने चाहिएं.’’
लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने दलील दी कि लाहौर हाईकोर्ट के पहले के निर्देश के मुताबिक उनके मुवक्किल ने पंजाब के गृह सचिव के समक्ष अपनी ‘गैरकानूनी’ हिरासत के बारे में अपना पक्ष रखा था लेकिन गृह सचिव ने इसे खारिज कर दिया और 30 दिन तक हिरासत में रखने संबंधी जिला समन्वय अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा.अब्बासी ने कहा कि किसी व्यक्ति को समीक्षा बोर्ड से आदेश मिले बिना 90 दिन से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता और उनके मुवक्किल की 90 दिन की हिरासत की मियाद पूरी हो चुकी है. प्रांतीय समीक्षा बोर्ड में हाईकोर्ट के न्यायाधीश होते हैं.
अब्बासी ने कहा कि निचली अदालत ने लखवी को दिसंबर, 2014 में जमानत पर रिहा किया था, लेकिन इस्लामाबाद के जिला मजिस्ट्रेट ने उसके खिलाफ हिरासत का आदेश जारी किया. बाद में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने लखवी की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया और उसकी रिहाई का आदेश दिया.
इसके बाद पंजाब के ओकारा के जिला समन्वय अधिकारी की ओर से हिरासत संबंधी आदेश जारी किया गया और उसे रिहा नहीं किया गया. लखवी ने लाहौर हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी कि उसके खिलाफ हिरासत संबंधी आदेश को निरस्त किया जाए और उसकी रिहाई के लिए सरकार को निर्देश दिया जाए.भारत ने बीते 13 मार्च को आए इस्लामाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर कडी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि पाकिस्तानी एजेंसियों ने लखवी के खिलाफ पर्याप्त सबूत अदालत के समक्ष पेश नहीं किए.
मुंबई में नवंबर, 2008 के आतंकी हमलों के संदर्भ में लखवी के अलावा छह अन्य अभियुक्तों अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हम्माद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनुस अंजुम के खिलाफ मामला चल रहा है.लखवी को जमात-उद-दावा के संस्थापक सरगना हाफिज सईद का निकट संबंधी माना जाता है. सईद को भी मुंबई हमले के संदर्भ में दिसंबर, 2008 में गिरफ्तार किया गया था और 25 नवंबर, 2009 को उसे छह अन्य आरोपियों के साथ अभ्यारोपित भी किया गया था.पाकिस्तान में मुंबई हमले के मामले में 2009 से मामला चल रहा है. मुंबई हमले में 166 लोग मारे गए थे.

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