तेहरान: ईरान के सातवें राष्ट्रपति के रुप में शपथ लेने के बाद हसन रुहानी ने आज भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की बात कही.रुहानी ने भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी सहित विभिन्न देशों के नेताओं की उपस्थिति में पद की शपथ ली.
पहले ईरान में भारत के राजदूत रह चुके अंसारी ने रुहानी से भेंट की जिसमें दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के तरीकों को लेकर बातचीत हुई. ईरान के साथ मधुर संबंधों की ओर संकेत करते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी 64 वर्षीय उदारवादी धर्मगुरु के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए विशेष विमान से तेहरान पहुंचे. उनका स्वागत उपविदेश मंत्री अब्बास गार्सी ने किया. अंसारी ने मजलिस के अध्यक्ष अली लारीजानी से भी भेंट की.
मिल्ली मजलीस ईरान की संसद है. पहले विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद इस समारोह में सम्मिलित होने जाने वाले थे लेकिन बाद में भारत ने इसका उन्नयन करते हुए उपराष्ट्रपति के जाने की बात सुनिश्चित की.जून में राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के साथ ही रुहानी ने भारत के साथ अपने संबंधों में विस्तार करने की बात करते हुए उसे अपनी विदेश नीति की प्राथमिकता कहा था. रुहानी वर्ष 2002 में भारत की यात्रा पर भी गए थे.
चीन के बाद भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का ग्राहक है. वह प्रतिवर्ष अरबों डॉलर कीमत का कच्चा तेल ईरान से खरीदता है.उदारवादी धर्मगुरु रुहानी ने ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में आश्चर्यजनक तरीके से जीत हासिल की थी.अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण विभिन्न प्रतिबंधों की मार ङोल रहे ईरान को वैश्विक स्तर पर बेहतर बनाने को प्रतिबद्ध पूर्व परमाणु वार्ताकार ने देश की संसद मिल्ली मजलिस में शपथ ली. देश की न्यायिक व्यवस्था के प्रमुख सादिक लारीजानी ने रुहानी को पद की शपथ दिलाई.
