काबुल : अशरफ गनी ने आज अफगानिस्तान के नए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली. शपथ लेने के बाद के अपने संबोधन में उन्होंने तालिबान के उग्रवादियों के साथ शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा. ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी राष्ट्रपति ने शपथ लेते ही युद्ध के बाद तालिबान उग्रवादियों से शांति वार्ता में शामिल होने का आह्वान किया. काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन में हुए इस समारोह में गनी द्वारा नए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लिए जाने के साथ ही वर्ष 2001 में अमेरिकी नेतृत्व में तालिबान को सत्ता से हटाए जाने और हामिद करजई के शासन के बाद देश की सत्ता का पहली बार लोकतांत्रिक हस्तांतरण हुआ.
राष्ट्रपति पद के लिए जून में हुए चुनाव में जालसाजी को लेकर विवादों में घिर गए थे लेकिन आज जब नए राष्ट्रपति ने शपथ ली तो विभिन्न देशों ने इस हस्तांतरण का स्वागत किया. अमेरिका की अगुवाई में नाटो का उग्रवाद के खिलाफ अभियान तीन माह में खत्म हो जाएगा लेकिन राष्ट्रीय स्थिरता के लिए तालिबान अब भी खतरा बना हुआ है और हालिया महीनों में उसने कई हमले किए हैं. शपथ लेने के बाद गनी ने कहा कि हमने सरकार के विरोधियों, खास कर तालिबान और हिज्ब ए इस्लामी (अन्य उग्रवादी गुट) से राजनीतिक वार्ता में शामिल होने को कहा है.
गनी ने कहा, अगर उन्हें कोई समस्या है तो उन्हें हमसे कहना चाहिए, हम समाधान निकालेंगे. हम प्रत्येक ग्रामीण से शांति के लिए आह्वान करने को कहते हैं. हमने मुस्लिम आलिमों से तालिबान को सलाह देने को कहते है और अगर वे उनकी बात नहीं सुनते तो उन्हें सभी संबंध तोड लेने चाहिए. करजई भी तालिबान के साथ शांति वार्ता कर रहे थे लेकिन पिछले साल शुरुआती प्रयास उस समय खत्म हो गए जब कतर में खोले गये तालिबान के एक कार्यालय को निर्वासन की सरकार के लिए दूतावास के तौर पर पेश किया गया. काबुल के मध्य में हवाईअड्डे के समीप आज एक आत्मघाती हमला हुआ जिसमें चार नागरिक मारे गए.
तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है. जानीमानी अफगान हस्तियां सुबह से ही राष्ट्रपति भवन में एकत्र हो गयी थीं. विदेशी प्रतिनिधि भी वहां पहुंचे. राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार जॉन पोडेस्टा ने जहां 10 सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया वहीं राष्ट्रपति मनमून हुसैन पाकिस्तान और उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी भारत का प्रतिनिधित्व किया. ब्रिटेन और फ्रांस सहित कई देशों का प्रतिनिधित्व काबुल में उनके राजनयिकों ने किया जबकि चीन ने मानव संसाधन मंत्री यिन वेमिन को भेजा था.
