लंदन : दक्षिण अफ्रीका के एंग्लिकन आर्कबिशप (सेवानिवृत्त) डेसमंड टुटू ने आज कहा कि वे गंभीर रुप से बीमार लोगों के लिए इच्छा मृत्यु का समर्थन करते हैं. चर्च के इस पूर्व नेता ने इस बयान से एक दिन पहले ही ब्रिटेन में इसे कानूनी मान्यता देने वाले विधेयक का समर्थन किया था.
लेकिन चर्च आधिकारिक तौर पर इस विधेयक के विरोध में ही रहा और उसने इस मुद्दे पर सार्वजनिक जांच की मांग की है. ब्रिटेन के अखबार ऑब्जर्वर में टुटू ने विस्तार से लिखा है कि वे 28 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी क्रैग शोनेगेवेल के मामले से सहमत हैं, जो न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस नामक बीमारी से पीडित था और उसने आत्महत्या इसलिए कर ली क्योंकि डॉक्टर उसकी जिंदगी खत्म नहीं कर सकते थे.
नोबल पुरस्कार से सम्मानित टुटू ने कहा, कुछ लोगों का मानना है कि अच्छी उपचारात्मक देखभाल के साथ मृत्यु में सहयोग करने की जरुरत नहीं है. लोगों को कानूनी तौर पर दवाई की प्राणघातक खुराक देने का अनुरोध करने की जरुरत नहीं है. क्रैग शोनेगेवेल के साथ ऐसा मामला नहीं था. उन्होंने कहा कि उसने अपने परिवार से उसके जीवन को कृत्रिम तरीके से चलाते रहने से मना किया था. उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के अंतिम दिनों में उनके इलाज की भी निंदा की.
टुटू ने लिखा, मदीबा के साथ जो किया गया वह शर्मनाक था. उन्होंने लिखा, आप देख सकते थे कि मदीबा पूरी तरह वहां मौजूद नहीं थे. मेरा मित्र उस समय वैसा नहीं था, जैसा वह असल में था. यह मदीबा के सम्मान का तिरस्कार था. इससे पूर्व आर्कबिशप ने कल कहा था कि उन्होंने अपना विचार बदल लिया है और अब वे कुछ मामलों में इच्छा मृत्यु की अनुमति देने वाले ब्रितानी विधेयक का समर्थन करेंगे.
