वाशिंगटन: ओबामा प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने आज कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अपने शपथ ग्रहण समारोह में अफगानिस्तान और पाकिस्तान समेत दक्षिण एशियाई देशों के नेताओं को आमंत्रित करना क्षेत्रीय सहयोग में उनकी रुचि को प्रदर्शित करता है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि जेम्स डोबिन्स ने कहा, ‘‘
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति (अफगानिस्तान) हामिद करजई और प्रधानमंत्री (पाकिस्तान) नवाज शरीफ के साथ अन्य क्षेत्रीय नेताओं को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया जो क्षेत्रीय सहयोग में उनकी रुचि को प्रदर्शित करता है.’’ सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष गवाही देते हुए डोबिन्स ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिरता के पक्ष में सबसे सकारात्मक बात यह है कि इसमें क्षेत्रीय हित लगातार बढ रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘ क्षेत्र के देश इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी स्थिरता अफगानिस्तान की स्थिरता और समृद्धि से जुडी है.’’ डोबिन्स ने कहा कि पिछले वर्ष जब करजई द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने को टाल रहे थे तब चीन, रुस, भारत और पाकिस्तान ने उनसे समझौते को अंतिम रुप देने का आग्रह किया था.अमेरिका के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘‘ यह अभूतपूर्व है कि रुसी, चीनी, भारतीय और पाकिस्तानी सभी अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो के मिशन को कम से कम कुछ वर्ष और जारी रखने का समर्थन कर रहे हैं.’’
उन्होंने कहा कि स्पष्ट रुप से इस तरह के क्षेत्रीय विचारों का अस्वाभाविक मेल संकेत देता है कि क्षेत्रीय शक्तिओं में अमेरिका और नाटो के प्रति उत्सुकता है. पाकिस्तान, उजबेकिस्तान और चीन सभी को यह भय है कि अफगानिस्तान उनके प्रति शत्रुता रखने वाले आतंकवादी गुटों का पनाहगाह बन जायेगा. भारत को आशंका है कि अफगानिस्तान फिर से उन्हें निशाना बनाने वाले आतंकवादी समूहों का प्रशिक्षण केंद्र बन जायेगा. अधिकारी ने कहा कि रुस को मादक पदार्थ के प्रवाह के बारे में चिंता है और ईरान एवं पाकिस्तान को नये शरणार्थियों के आने का भय है.
उन्होंने कहा कि इन वर्तमान चिंताओं के मद्देनजर आम राय अमेरिका और नाटो की उपस्थिति बने रहने के पक्ष में हैं.एशिया प्रशांत सुरक्षा मामलों के कार्यकारी सहायक रक्षा सचिव केली मागसामेन ने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच बेहतर संबंध के लिए क्षेत्रीय स्थिरता जरुरी है.
