कानो (नाइजीरिया) : बोको हराम के बंदूकधारियों ने तीन अलग-अलग हमलों में 50 से अधिक लोगों को मार डाला. इन तीन हमलों में से दो नाइजीरिया के चिबोक शहर के निकट हुये जहां से पिछले महीने, 200 से अधिक स्कूली छात्राओं का अपहरण किया गया था.
नाम नहीं बताने की शर्त पर कुछ स्थानीय निवासियों ने बताया कि कि उत्तर-पूर्वी बोरनो राज्य में चिबोक से लगभग सात किलोमीटर दूर शवा गांव में सोमवार की दोपहर को हुये पहले हमले में 10 लोग मारे गये. मंगलवार को देर रात बंदूकधारियों ने नजदीकी अलागारनो गांव में जा कर खाद्य सामग्री लूटी और घरों में तोड़फोड़ की. उन्होंने भाग रहे ग्रामीणों पर गोली भी चलाई.
एक निवासी हारुना बिटरस ने बताया यह हमला अचानक किया गया था. उन्होंने बताया उन्होंने गोली चलाई और घरों में आग लगा दी. हम झाडियों में छिपने भागे. उन्होंने हमारे 20 लोगों को मार डाला. अन्य लोगों ने भी ऐसा ही कहा. अलागारनो हमले के बाद कई लोग चिबोक की ओर भागे. बोको हराम ने चिबोक से ही 14 अप्रैल को 276 स्कूली छात्राओं का अपहरण कर लिया था. इनमें से 223 अभी भी लापता हैं.
तीसरे हमले में, संदिग्ध उग्रवादियों ने लेक चाड के तट पर स्थित चुकोंगुदो में हमला कर कम से कम 25 लोगों को मार डाला. यह घटना कल स्थानीय समयानुसार दिन में लगभग एक बजे हुयी. हथियारों से लैस लगभग एक दर्जन बंदूकधारी दो वाहनों में सवार होकर गांव पहुंचे, वहां के निवासियों पर गोलीबारी की और 300 से अधिक घरों को आग लगा दी. घर जल कर नष्ट हो गए.
चुकोंगुदो निवासी जरानी एलीदे ने बताया उन्होंने गांव में दिन दहाडे बंदूकों और बमों से हमला किया. उन्होंने पूरे गांव को जला दिया और करीब 25 लोगों को मार डाला. उसने बताया कि वह चुकोंगुदो से करीब 20 किमी दूर स्थित गैम्बोरु न्गाला गांव भाग गया था.
गैम्बोरु न्गाला गांव में दो सप्ताह पहले बोको हराम ने भीषण हमला किया था. बताया जाता है कि इस हमले में करीब 300 लोग मारे गए थे, कई घरों और बाजार को आग लगा दी गई थी. एलीदे ने बताया कि उग्रवादियों ने लोगों से गांव खाली करने को कहा और ऐसा न होने पर हमला करने की धमकी दी थी. कुछ लोग वहां से चले गए लेकिन कुछ लोग वहां सैनिकों की मौजूदगी की वजह से रुके रहे.
नाइजीरिया की सेना ने कहा है कि उसने अब तक लापता 223 छात्राओं का पता लगाने के लिए चिबोक इलाके में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए हैं. प्रभावित गांवों के लोगों की शिकायत है कि हमलों के दौरान सैनिकों ने कोई कार्रवाई नहीं की.
