कोलंबो: श्रीलंका के एक शीर्ष मंत्री ने कहा है कि राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 2009 में लिट्टे के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने के लिए कुछ देशों के दबाव के सामने झुकने से इंकार कर दिया था.
सरकार के प्रवक्ता और सूचना मंत्री केहेलिया रामबुकवेला ने कहा कि कुछ देशों ने श्रीलंका पर दबाव बनाया था, जब 2009 में युद्ध निर्णायक चरण में पहुंच गया था. मध्य जिला कैंडी में एक सभा में उन्होंने कहा, ‘‘कुछ देशों ने अग्रिम टीमें भेजी और पोत भेजने के लिए भी तैयार थी. लेकिन, राष्ट्रपति :राजपक्षे: ने झुकने से इंकार कर दिया.’’ रामबुकवेला ने अंतरराष्ट्रीय दबाव का हवाला शायद उस समय ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड और फ्रांस के उनके तत्कालीन समकक्ष बर्नार्ड कचनर के 2009 में राजपक्षे से मुलाकात को लेकर दिया.
रामबुकवेला ने कहा कि 1987 में भारत सरकार के हस्तक्षेप की तुलना में 2009 संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय दबाव बहुत ज्यादा था. 1987 में श्रीलंकाई सैनिक लिट्टे नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरण के ठिकाने के करीब पहुंच गए थे.
