इस बदलते मौसम में वायरल फीवर, ब्रॉन्काइटिस, खांसी, सर्दी, जुकाम के साथ आइ फ्लू व चिकनपॉक्स के मामले भी सामने आ रहे हैं. एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बदलता है तो वायरस स्ट्रॉन्ग हो जाता है. इसकी वजह से वायरल फीवर और खांसी होती है. दिन-रात के तापमान में बदलाव को तुरंत हमारा शरीर खुद को ढाल नहीं पाता और फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस बढ़ता है.
बॉडी में तरल पदार्थों की कमी के कारण डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों की ऐंठन और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं. वायरल इन्फेक्शन की शुरुआती पहचान थकान और शरीर में दर्द होना है. ज्यादातर मामलों में बुखार के साथ सांस संबंधी लक्षण भी होते हैं, जैसे गले में सूजन, जुकाम, नाक में जकड़न और आंखों का लाल होना. ऐसे में काफी मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए.
