आप खुद को लोगों से बेहतर जानते हैं

दक्षा वैदकर यूट्यूब पर आगाज प्रोडक्शन की शॉर्ट फिल्म ‘सेल्फी’ देखी. इस फिल्म में सांवला-सा एक आम युवक दिखता है, जो ट्रेन में सफर कर रहा है. जब उसका स्टेशन आनेवाला होता है और वह फोन पर बात करते हुए ट्रेन के दरवाजे तक पहुंचता है, तो जेब में फोन रखते वक्त उसका हाथ सामने […]

By Prabhat Khabar Print Desk | February 10, 2016 12:42 AM
दक्षा वैदकर
यूट्यूब पर आगाज प्रोडक्शन की शॉर्ट फिल्म ‘सेल्फी’ देखी. इस फिल्म में सांवला-सा एक आम युवक दिखता है, जो ट्रेन में सफर कर रहा है. जब उसका स्टेशन आनेवाला होता है और वह फोन पर बात करते हुए ट्रेन के दरवाजे तक पहुंचता है, तो जेब में फोन रखते वक्त उसका हाथ सामने खड़े एक व्यक्ति की पिछली पॉकेट से टच हो जाता है.
व्यक्ति पलटता है और उसे गाली देते हुए अपना वॉलेट बैग में डाल लेता है. यह घटना देख आसपास खड़े लड़के उस पर हंसते हैं. उसे बहुत बुरा लगता है कि लोगों ने उसे पर्स चोर समझा और उस पर हंसे. वह बाहर आता है. टीटी उसके कपड़े व शक्ल देख यही सोचता है कि वह बिना टिकट सफर कर रहा था. वह उसे रोक लेता है और टिकट मांगता है.
वह उन्हें टिकट दिखा भी देता है, लेकिन उस दौरान भी ट्रेनवाले वही युवक उस पर हंसते हुए चले जाते हैं. उसे और बुरा लगता है. वह रास्ते में रुक कर एक टैक्सी से टिक कर खड़े होते हुए चाय पीता है. तभी एक लड़की आती है और उसे टैक्सीवाला समझ कर पूछती है ‘टैक्सी खाली है क्या?’ वह ‘नहीं’ कह देता है. अब वह पूरी तरह डिप्रेशन में चला जाता है.
घर जाकर वह इंगलिश में बात करने की प्रैक्टिस करता है. आइने में खुद को घंटों देखता है और अपना चेहरा बार-बार धोता है. दूसरे दिन वह फिर ट्रेन से सफर कर रहा होता है. गाली देनेवाला आदमी उसी तरह गेट पर खड़ा होता है, लेकिन इस बार उसके पीछे कोई दूसरा लड़का खड़ा होता है. वह चुपके से उस आदमी की पॉकेट को हाथ लगाता है और दूर हट जाता है, ताकि अबकी बार इल्जाम दूसरे लड़के पर आये. होता भी ऐसा ही है.
वह आदमी फिर पीछे पलटता है और उस लड़के को गाली देते हुए अपना वॉलेट बैग में डाल लेता है. इस युवक को तसल्ली मिलती है कि उसकी तरह किसी और को भी चोर समझा गया. तभी वह देखता है कि डांट खाने वाला लड़का हंस रहा है. वह पूछता है, तुम्हें बुरा लगा होगा न. तुम्हें उसने चोर समझा. वह कहता है, ‘वह आदमी मुझे एक स्टेशन पहले से जानता है, जबकि मैं खुद को 21 साल से जानता हूं.’
daksha.vaidkar@prabhatkhabar.in
बात पते की..
– लोग आपको कुछ भी समझ सकते हैं. आपके साथ कैसा भी व्यवहार कर सकते हैं. यह उनकी अपनी समझ है. आप खुद को बेहतर जानते हैं.
– अगर लोग आपको छोटी-सी गलतफहमी से चोर समझने लगते हैं, तो यह उनकी गलती है. आपको बुरा मानने की जरूरत नहीं है.

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