<figure> <img alt="असम, नागरिकता संशोधन क़ानून, गुवाहाटी" src="https://c.files.bbci.co.uk/14D62/production/_110164358_06ba0d87-6fac-4aea-af0c-b8e8c5ab73e2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>RAVI PRAKASH/BBC</footer> </figure><p>नागरिकता संशोधन क़ानून में ताज़ा संशोधन के ख़िलाफ़ गुवाहाटी में गण-सत्याग्रह कर रहे ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) के नेता समुज्जल भट्टाचार्य और लुरिन ज्योति गोगोई को पुलिस ने हिरासत में लेने के कुछ घंटों के भीतर ही रिहा कर दिया. इनके साथ 100 अन्य लोग भी रोके गए थे.</p><p>असम पुलिस ने उन्हें गुवाहाटी (कामरुप मेट्रो) के डीसी दफ़्तर जाते वक्त हिरासत में लिया. तब वे ख़ुद को गिरफ़्तार करने या नागरिकता क़ानून के संशोधनों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे थे.</p><p>असम सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने इसकी पुष्टि की.</p><p>एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि समुज्जल भट्टाचार्य ने खुद अपनी गिरफ़्तारी दी थी. पुलिस की उनको गिरफ़्तार करने की कोई योजना नहीं थी. उन्होंने कहा कि असम सरकार प्रजातांत्रिक आंदोलनों के ख़िलाफ़ नहीं है. हम दरअसल आंदोलन की आड़ में अशांति फ़ैलाने वालों के ख़िलाफ़ हैं.</p><p>इधर, समुज्जल भट्टाचार्य को हिरासत में लिए जाने के बाद उनकी गिरफ़्तारी की अफवाह फैल गई. इसके बाद राज्य में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए. बाद में जब लोगों को यह पता चला कि उन्हें रिहा कर दिया गया है, तब जाकर लोगों ने अपना प्रदर्शन ख़त्म किया.</p><figure> <img alt="समुज्जल भट्टाचार्य" src="https://c.files.bbci.co.uk/180D4/production/_110161589_a507d175-4d62-4307-b097-d1211e6271bb.jpg" height="549" width="976" /> <footer>ANI</footer> <figcaption>समुज्जल भट्टाचार्य</figcaption> </figure><h3>विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे समुज्जल</h3><p>नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंज़ूरी मिलने के बाद से गुवाहाटी में सैकड़ों लोगों ने समुज्जल भट्टाचार्य के नेतृत्व में ही सामूहिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है.</p><p>समुज्जल ने तब पत्रकारों से कहा था, "राष्ट्रपति संविधान के कस्टोडियन (रक्षक) होते हैं. हमें उम्मीद थी कि वो संवैधानिक प्रावधानों का ख़्याल रखते हुए इस विधेयक को मंज़ूरी नहीं देंगे लेकिन उन्होंने रात में ही कैब को मंज़ूरी दी. इसका हमें दुख है."</p><p>उन्होंने कहा था, "हम कैब को नहीं मानते और न कभी मानेंगे, भले ही इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिल गई हो. कोई भी सरकार हम पर अपना क़ानून जबरन नहीं थोप सकती है. असम के लोग इसके ख़िलाफ़ हैं और हमारा नारा है: कैब आमी ना मानू, ना मानू ना मानू. हमें कैब किसी क़ीमत पर मंज़ूर नहीं है. हम इसका प्रजातांत्रिक तरीक़े से विरोध करते रहेंगे."</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50795607?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नागरिकता संशोधन: असम में ‘गुस्सा’ क्यों फूटा?</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50794760?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">असम: आख़िर सैम स्टफर्ड का कसूर क्या था?</a></li> </ul><h3>18 दिसंबर तक गण-सत्याग्रह</h3><p>इस दौरान गौहाटी हाईकोर्ट के पास लताशील मैदान में सैकड़ों लोग गण-सत्याग्रह पर बैठे रहे. यह 18 दिसंबर तक चलेगा. हिरासत में लिए जाने से पहले समुज्जल भट्टाचार्य भी सत्याग्रह में शामिल हुए थे. आसू ने सोमवार से तीन दिनों तक चलने वाले गण-सत्याग्रह का आह्वान किया है. इस दौरान पूरे राज्य में सत्याग्रह के जरिए नागरिकता संशोधन क़ानून को ख़ारिज करने की मांग की जा रही है.</p><p>गुवाहाटी में कई जगहों पर लोग सत्याग्रह कर रहे हैं लेकिन मुख्य आयोजन लताशील मैदान में हुआ. यहां विभिन्न लोक कलाकारों ने गीत गाकर अपना विरोध दर्ज कराया. इस दौरान जय अखोम की गूंज सुनायी देती रही.</p><p>इधर हिरासत में लिए जाने के बाद समुज्जल भट्टाचार्य ने मीडिया से कहा कि उनका शांतिपूर्ण आंदोलन नागरिकता क़ानून के ताज़ा संशोधनों के वापस लिए जाने तक जारी रहेगा.</p><p>बकौल समुज्जल, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में कोई सरकार धर्म के नाम पर नागरिकता कैसे तय कर सकती है. हमारे संविधान में ऐसी बातों की इजाज़त नहीं है. इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने इसे थोपने की कोशिश की है. असम के लोग इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे.</p><p>उन्होंने बताया कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ आसू की याचिका सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर ली गई है. हम वहां मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे. आसू अब सत्याग्रह के साथ ही क़ानूनी लड़ाई भी लड़ेगा.</p><figure> <img alt="गुवाहाटी में विरोध प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/10B68/production/_110165486_7785aee8-d637-455c-ab9c-ea38f058bd70.jpg" height="549" width="976" /> <footer>RAVI PRAKASH/BBC</footer> </figure><h3>कर्फ़्यू में ढील लेकिन इंटरनेट बंद</h3><p>गुवाहाटी में सोमवार को भी कर्फ़्यू में ढील दी गई. रात नौ बजे कर्फ़्यू फिर से लगा दिया जाएगा. कामरुप मेट्रो के डीसी विश्वजीत पेगू ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने बीबीसी को बताया कि इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध मंगलवार की सुबह तक के लिए बढ़ा दिया गया है.</p><p>असम प्रशासन ने 11 दिसंबर की शाम गुवाहाटी समेत राज्य के कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी. तबसे असम के अधिकतर इलाको में डिजिटल ब्लैक आउट की स्थिति है.</p><p>सोमवार को डिब्रूगढ़, जोरहाट और तिनसुकिया में भी कर्फ़्यू में ढील दी गई. इस दौरान अब तक किसी ताज़ा हिंसा की कोई ख़बर नहीं मिली है. हालांकि, तिनसुकिया में रविवार की रात कर्फ़्यू के बावजूद कुछ लोगों ने कई दुकानों में आग लगा दी थी. पुलिस ने इसकी पुष्टि की है. मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि रात का कर्फ़्यू अभी जारी रहेगा.</p><figure> <img alt="असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल" src="https://c.files.bbci.co.uk/15988/production/_110165488_91558884-04fd-46a4-9270-8b868324b448.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Twitter</footer> <figcaption>असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल</figcaption> </figure><h3>सीएम सोनोवाल का ताज़ा बयान</h3><p>मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के गृह क्षेत्र तिनसुकिया में सैकड़ों लोगों ने आज भी प्रदर्शन किया. जोरहाट और डिब्रूगढ़ से भी जगह-जगह विरोध प्रदर्शन की ख़बरें मिली हैं.</p><p>इस बीच स्थानीय अख़बारों में विज्ञापन देकर मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति की अपील की है. सर्वानंद सोनोवाल के दस्तखत के साथ छपे इस विज्ञापन की चर्चाएं हो रही हैं. उसमें उन्होंने एक व्यक्ति की ग़लतबयानी का ज़िक्र किया है.</p><p>मुख्यमंत्री ने कहा कि गोविंद चंद्र प्रमाणिक नामक एक व्यक्ति के हवाले से समाचार माध्यमों ने समाचार प्रकाशित किया है कि इस क़ानून के लागू होने से बांग्लादेश के ढाई करोड़ नागरिक भारत मे नागिरकता हासिल कर लेंगे. ऐसे आधारहीन और असत्य समाचारों से राज्यवासियों में शंका पैदा होना स्वाभाविक है. मगर पूरी दृढ़ता से यह बात कहना चाहते हैं कि यह समाचार पूरी तरह से आधारहीन और असत्य है.</p><p>उन्होंने आंदोलनकारियों को फिर से बातचीत का प्रस्ताव दिया.</p><p><a href="https://www.youtube.com/embed/EeOlKaVSel4">https://www.youtube.com/embed/EeOlKaVSel4</a></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>
नागरिकता क़ानूनः विरोध की अगुवाई करने वाले असम में क्या हो रहा है?
<figure> <img alt="असम, नागरिकता संशोधन क़ानून, गुवाहाटी" src="https://c.files.bbci.co.uk/14D62/production/_110164358_06ba0d87-6fac-4aea-af0c-b8e8c5ab73e2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>RAVI PRAKASH/BBC</footer> </figure><p>नागरिकता संशोधन क़ानून में ताज़ा संशोधन के ख़िलाफ़ गुवाहाटी में गण-सत्याग्रह कर रहे ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) के नेता समुज्जल भट्टाचार्य और लुरिन ज्योति गोगोई को पुलिस ने हिरासत में लेने के कुछ घंटों के भीतर ही रिहा कर दिया. इनके […]
