विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना ज्यादातर युवाओं का होता है. लेकिन, विदेशी संस्थान अपने यहां दाखिला देने से पहले कुछ खास योग्यताएं देखते हैं, जिनका निर्धारण कुछ टेस्ट के माध्यम से किया जाता है. अगर आप भी विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं, तो विदेश जाने से पहले आपको भी कुछ जरूरी टेस्ट क्लियर करने होंगे…
शिखर चंद जैन
उच्च शिक्षा के लिए हर साल लाखों की संख्या में भारतीय छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों का रुख करते हैं. दुनिया के बेहतरीन संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने की राह आसान नहीं होती, इसके लिए कड़ी प्रतियोगिता से गुजरना पड़ता है. पासपोर्ट और एमिग्रेशन की तमाम जटिलताओं के साथ-साथ छात्रों को हर स्तर पर सतर्क होकर आगे बढ़ना होता है. विदेश में पढ़ाई के लिए एप्लीकेशन का प्लान बनाने से पहले आपको यह जानना जरूरी है कि वह कौन से एग्जाम हैं, जो आपकी पात्रता को सुनिश्चित करेंगे.
सैट : अगर आप अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट हैं और यूएस के किसी इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको सेट एग्जाम देना पड़ेगा. इसमें एविडेंस बेस्ड रीडिंग, राइटिंग और मैथ्स का एग्जाम होता है. इसका पूर्णांक 1600 होता है. सिंगापुर और कनाडा के कुछ कॉलेज भी एडमिशन से पहले सेट एग्जाम को वरीयता देते हैं. आप निर्धारित फीस जमा करके सेट एग्जाम में शामिल हो सकते हैं. जिस प्रयास में आप को अधिकतम नंबर मिले, उसके रिजल्ट को भेज सकते हैं. इसे स्कोर्स च्वॉइस प्रॉसेस से भेजा जा सकता है. यूएस के कुछ पॉपुलर इंस्टीट्यूट्स एडमिशन के लिए सेट सब्जेक्ट टेस्ट क्लियर करने को कहते हैं. ये सब्जेक्ट टेस्ट फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, मैथ्स, वर्ल्ड हिस्ट्री, यूएस हिस्ट्री, फ्रेंच, स्पेनिश और लिटरेचर हो सकते हैं. अगर आप अपने आवेदन की स्वीकृति के चांस बढ़ाना चाहते हैं, तो सेट सब्जेक्ट टेस्ट जरूर दें.
एसीटी (एक्ट): यह एक स्टैंडर्ड टेस्ट है, जो अमेरिका के प्रवेश के लिए पास करना होता है. इसे एक्ट नामक एनजीओ संचालित करती है. इसके तहत इंग्लिश, मैथ्स, रीडिंग और साइंस रीजनिंग टेस्ट लिये जाते हैं. इसमें वैकल्पिक तौर पर डायरेक्ट राइटिंग टेस्ट का चयन भी किया जा सकता है. कक्षा 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट इस एग्जाम को क्लियर करके दाखिले का चांस बढ़ा सकते हैं. ज्यादातर कॉलेज सेट और एक्ट दोनों एग्जाम स्वीकार करते हैं. जिस इंस्टीट्यूट में दाखिला लेना चाहते हैं, वहां संपर्क करके उनकी प्राथमिकता को जाना जा सकता है.
इंग्लिश के ये टेस्ट भी जरूरी
विदेश में पढ़ाई के लिए स्थानीय भाषा और अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ जरूरी है. विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए या फिर अपनी प्रतिभा को परखने के लिए तीन तरह के टेस्ट आपके लिए उपलब्ध हैं- टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज (टॉफेल), इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (आइलेट्स) और पियर्सन टेस्ट ऑफ इंग्लिश एकेडमिक (पीटीई). शुरू के दो टेस्ट तो दशकों से प्रचलित हैं और लगभग सभी यूनिवर्सिटी इन्हें मान्यता देती हैं, लेकिन पीटीई कुछ नया है और धीरे-धीरे यह भी दुनिया के ज्यादातर विश्वविद्यालयों में स्वीकार किया जाने लगा है.
जान लें खास बातें
इतने विकल्पों की उपलब्धता के कारण स्टूडेंट अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं. सभी विश्वविद्यालय इन तीनों टेस्टों को मान्यता नहीं देते. इसलिए कुछ बातें जान लेना जरूरी है. टॉफेल आमतौर पर नॉर्थ अमेरिका (यूएस और कनाडा) और आईईएलटीएस आमतौर पर यूके, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में स्वीकार किया जाता है. हालांकि, पीटीई को अब दुनियाभर में मान्यता मिलने लगी है. बेहतर तो यह होगा कि आप जिस यूनिवर्सिटी विशेष के लिए यह टेस्ट दे रहे हैं, पहले वहां से पूछताछ कर ली जाये.
कुछ अलग है हर टेस्ट : वैसे तो हर एग्जाम ऑर्गनाइजर अपने टेस्ट को इंग्लिश का ‘यूनिवर्सल’ टेस्ट बताता है, लेकिन सब में कुछ अंतर है. जैसे आईईएलटीएस में ब्रिटिश स्टाइल की इंग्लिश पर जोर दिया जाता है जबकि टॉफेल में यूएस की. पीटीई दोनों शैलियों का मिश्रण है. पियर्सन इंडिया के वाइस प्रेसीडेंट विकास सिंह के मुताबिक टेस्ट लेने के लिए कोई भी स्टूडेंट 24 घंटे पहले बुकिंग कर सकता है. पियर्सन देशभर में 200 सेंटर्स पर साल भर टेस्ट लेने के लिए तत्पर रहता है.
स्पीकिंग सेक्शन- कई विद्यार्थी फिजिक्स, केमिस्ट्री या बायोलॉजी जैसे कोर सब्जेक्ट में तो महारथी होते हैं, लेकिन जब बात अंग्रेजी भाषा की आती है, तो उनकी परेशानी थोड़ी बढ़ जाती है. ऐसे विद्यार्थियों को अगर च्वॉइस मिले, तो आईईएलटीएस ही चुनना चाहिए. तुलनात्मक रूप से इस टेस्ट को ज्यादा स्टूडेंट पसंद करते हैं.
