सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान एक ख़ास वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए.
इसकी वजह थी एक जैकेट जो उन्होंने रियाद में फॉर्मूला ई रेस के एक इवेंट के दौरान पहनी थी.
ये जैकेट जिस ब्रिटिश ब्रैंड की थी, उन्होंने ट्विटर पर अरबी में एक हैशटैग शुरू कर दिया, जिसका अर्थ था, ‘क्राउन प्रिंस की जैकेट’. इसके बाद सोशल मीडिया पर मोहम्मद बिन सलमान के इस ‘नए लुक’ की प्रशंसा शुरू हो गई.
https://twitter.com/Badermasaker/status/1197861086227247104
मोहम्मद बिन सलमान ने अपनी पारंपरिक सफ़ेद पोशाक के ऊपर यह जैकेट पहनी और साथ में एवियेटर सनग्लासेस और स्पोर्ट्स शूज़ से मध्य-पूर्व और पश्चिमी लुक का एक मिश्रण पेश किया.
एक यूज़र ने इस जैकेट को ऑनलाइन खोज निकाला और लिखा, "ये इसका सबसे बड़ा विज्ञापन है."
https://twitter.com/1993_725/status/1197939072209182720
https://twitter.com/TripleM0000/status/1197972628461539330
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एक यूज़र ने लिखा कि थोड़ी ही देर में ये जैकेट सोल्ड आउट हो गई.
https://twitter.com/FadilaAlJaffal/status/1197926844932202502
कुछ यूज़र्स ने इस जैकेट को ख़रीदने के स्क्रीनशॉट भी साझा किए हैं.
इससे पहले भी मोहम्मद बिन सलमान अपने कपड़ों को लेकर चर्चा में आ चुके हैं.
2016 में अमरीका में फेसबुक संस्थापक मार्क ज़करबर्ग से मुलाक़ात के दौरान वो शर्ट, ब्लेज़र और जीन्स में दिखाई दिए थे.
जून 2016 में अपने अमरीका दौरे पर उन्होंने पहले वॉशिंगटन में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात की थी.
इसके बाद वह माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला और फ़ेसबुक संस्थापक मार्क ज़करबर्ग से भी मिले.
माना जाता है कि प्रिंस सलमान सिलिकॉन वैली के साथ मज़बूत संबंध रखने के पक्षधर हैं. ये भी कहा जाता है कि इन मुलाक़ातों का मक़सद सऊदी अरब के विज़न 2030 के तहत वहां हाई-टेक सेक्टर को स्थापित करना था.
तब भी मोहम्मद बिन सलमान के पश्चिमी पहनावे को बाहरी दुनिया को एक ‘उदार’ संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा गया था.
उनकी एक और तस्वीर चर्चित हुई थी जब वे सऊदी अरब में ही एक पहाड़ पर वरिष्ठ मंत्रियों के साथ टीशर्ट और शॉर्ट्स में नज़र आए थे.
मोहम्मद बिन सलमान ने कई स्तरों पर सऊदी अरब में सुधारवादी बदलाव किए हैं. इनमें सिनेमा, कॉन्सर्ट और महिलाओं की ड्राइविंग से पाबंदी हटा ली गई है.
हालांकि कुछ आलोचक इसे एक पीआर कार्यक्रम का हिस्सा मानते हैं और उनका कहना है कि क्राउन प्रिंस ने सत्ता मिलने के बाद से राजनीतिक विरोध की आवाज़ों को दबाया है.
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