बर्लिन की दीवार गिरने के 30 साल बाद यूरोप में क्यों खड़ी हो रही हैं नई दीवारें?

<figure> <img alt="बर्लिन की दीवार 9 नवंबर 1989 में तोड़ी गई थी." src="https://c.files.bbci.co.uk/BEBB/production/_109572884_bfc81711-47f1-459f-bcbd-55431eb7a4f4.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Huw Evans picture agency</footer> <figcaption>बर्लिन की दीवार 9 नवंबर 1989 में तोड़ी गई थी.</figcaption> </figure><p>यूरोप जर्मनी में बर्लिन की दीवार गिराए जाने की तीसवीं सालगिरह मना रहा है. शीतयुद्ध के दौर की गवाह इस दीवार को 9 नवंबर 1991 […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 8, 2019 2:08 PM

<figure> <img alt="बर्लिन की दीवार 9 नवंबर 1989 में तोड़ी गई थी." src="https://c.files.bbci.co.uk/BEBB/production/_109572884_bfc81711-47f1-459f-bcbd-55431eb7a4f4.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Huw Evans picture agency</footer> <figcaption>बर्लिन की दीवार 9 नवंबर 1989 में तोड़ी गई थी.</figcaption> </figure><p>यूरोप जर्मनी में बर्लिन की दीवार गिराए जाने की तीसवीं सालगिरह मना रहा है. शीतयुद्ध के दौर की गवाह इस दीवार को 9 नवंबर 1991 को ढहाया जाना समकालीन इतिहास की एक बड़ी घटना माना जाता है.</p><p>इस दीवार की वजह से शीत युद्ध के दौरान पूर्वी यूरोप के कम्युनिस्ट पश्चिमी यूरोप में दाख़िल नहीं हो पाते थे.</p><p>लेकिन तीन दशक बाद पूरे महाद्वीप में सैकड़ों किलोमीटर लंबी नई दीवारें बनाई जा रही हैं ताकि लोगों की निर्बाध आवाजाही रोकी जा सके.</p><p>इसके केंद्र में हैं प्रवासियों के साथ यूरोप के मुश्किल संबंध, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसकी वजह से यूरोप के बाहर ज़मीन और समुद्र में बड़ी संख्या में शरणार्थी मारे जा चुके हैं.</p><p>ये एक ऐसा घटनाक्रम है जिसकी वजह से यूरोप के कई देश ऐसे प्रतीत होते हैं कि उन्हें प्रवासियों के मानवीय पहलू के बजाए उनके कारण होने वाले आर्थिक और राजनीतिक असर की अधिक चिंता है.</p><p>सवाल ये है कि प्रवासियों के प्रति यूरोपीय देशों का नज़रिया क्यों और कैसे बदला?</p><h3>खंडित महाद्वीप</h3><figure> <img alt="बर्लिन की दीवार के मायने थे अवरोधक जो किसी भी शक्ल में हो सकते थे." src="https://c.files.bbci.co.uk/10E9A/production/_109547296_gettyimages-3364748.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>बर्लिन की दीवार के मायने थे अवरोधक जो किसी भी शक्ल में हो सकते थे.</figcaption> </figure><p>दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोप कम्युनिस्ट पूर्वी और पूंजीवादी पश्चिमी दो भागों में बंट गया था.</p><p>पूर्वी भाग वाले देशों की सरकारें अपना आधिपत्य जता रही थीं. साल 1949 से 1961 के बीच लाखों लोग पूर्वी जर्मनी से पश्चिमी जर्मनी गए.</p><p>जवाब में सोवियत नेतृत्व में कई देशों ने सीमा पर नियंत्रण बढ़ाया जिसमें बिजली के करंट वाले तारों की बाड़ और हथियारबंद सैनिकों की तैनाती शामिल थी.</p><p>शीतयुद्ध की समाप्ति पर ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने कहा था कि पूर्वी यूरोपीय देशों ने ऐसा करके अपनी ‘बर्बरता’ का परिचय दिया.</p><p>इसका सबसे कुख्यात उदाहरण था बर्लिन की दीवार जो वर्ष 1961 में बनाई गई थी जिसने जर्मनी को दो हिस्सों में बांट दिया था.</p><p>साल 2017 में बर्लिन की फ्री यूनिवर्सिटी ने अपने एक अध्ययन में कहा था कि बर्लिन की दीवार को पार करने की कोशिश के दौरान 262 लोग मारे गए थे.</p><figure> <img alt="बर्लिन की दीवार का एक हिस्सा अब स्मारक है उन लोगों का जो इसे पार करने की कोशिश के दौरान मारे गए थे." src="https://c.files.bbci.co.uk/6B52/production/_109547472_gettyimages-496369456.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>बर्लिन की दीवार का एक हिस्सा अब स्मारक है उन लोगों का जो इसे पार करने की कोशिश के दौरान मारे गए थे.</figcaption> </figure><p>पूर्वी हिस्से से भागकर पश्चिमी देशों में पहुंचे प्रवासियों का स्वागत किया गया. प्रवासियों ने पूर्वी हिस्से में उन पर लगी रोक और प्रतिबंधों की भर्त्सना की.</p><p>पश्चिमी देशों ने बड़े पैमाने पर लोगों के प्रवास का स्वाभाविक रूप से स्वागत किया लेकिन उनक ये रुख़ हमेशा कायम नहीं रहा.</p><p>शीत युद्ध के नज़रिए से ये घटनाक्रम पूर्वी देशों को शर्मसार करने वाला था कि उनके अपने नागरिक वहां नहीं रहना चाहते और वहां जाकर बसना चाहते हैं जो वैचारिक विरोधी हैं.</p><figure> <img alt="शीतयुद्ध के दौरान बर्लिन की दीवार एक तरह का प्रतीक बन गई थी." src="https://c.files.bbci.co.uk/10792/production/_109547476_gettyimages-79187499.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>शीतयुद्ध के दौरान बर्लिन की दीवार एक तरह का प्रतीक बन गई थी.</figcaption> </figure><p>ठीक उसी समय पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेज़ी से बढ़ रही थीं, बेरोज़गारी की दर कम थी, प्रवासियों से अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने में मदद मिली.</p><p>युद्ध के बाद मानव संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए ब्रिटेन ने ऐसी सरकारी योजनाएं शुरू की जिससे पूर्वी यूरोप से प्रवासियों को ब्रिटेन आने में मदद मिली.</p><p>बर्लिन की दीवार खड़ी होने के बाद पश्चिमी जर्मनी को अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तुर्की और मोरक्को जैसे देशों के साथ समझौते करने पड़े.</p><p>मज़दूरों की इस नियंत्रित आपूर्ति ने पश्चिमी राजनयिकों को ख़ुश रखा कि वो पूर्वी देशों की इस बात के लिए आलोचना तो कर सकते हैं कि उन्होंने बड़े पैमाने पर लोगों को जाने से रोका. इसके साथ ही उन्हें पूर्वी सीमाओं पर प्रवासियों के सैलाब से भी नहीं जूझना पड़ा.</p><p>लेकिन आराम की ये स्थिति हमेशा के लिए नहीं थी. पूर्वी देशों का गुट दरकने लगा था और कई पूर्व सोवियत देश अब यूरोपीय संघ के सदस्य बन गए थे. </p><p>लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों के प्रवास के प्रति उनका रुख़ बहुत अलग हो गया था.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/magazine-43689207?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बर्लिन की दीवार बनने की असल कहानी क्या थी</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-50144467?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">दुनिया भर में नेताओं के ख़िलाफ़ क्यों बढ़ रहा ग़ुस्सा</a></li> </ul><figure> <img alt="यूरोपीय यूनियन के सदस्यों ने सैकड़ों किलोमीटर लंबी नई बाड़ सीमा पर खड़ी कर दी है." src="https://c.files.bbci.co.uk/211A/production/_109547480_gettyimages-645195188.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>यूरोपीय यूनियन के सदस्यों ने सैकड़ों किलोमीटर लंबी नई बाड़ सीमा पर खड़ी कर दी है.</figcaption> </figure><p>कई देश ऐसे हैं जिनके अपने नागरिकों को पहले बैरियरों में फंसकर रहना पड़ा था, आज वे खुद बाक़ियों को दूर रखने के लिए बैरियर बना रहे हैं.</p><p>यूरोपीय संघ के अंदर लोगों के लिए इधर-उधर जाना आसान है मगर इसने अपनी बाहरी सीमाओं को मज़बूत करने के लिए कई क़दम उठाए हैं. इस संबंध में यूरोपीय संघ की नीति को &quot;यूरोप की किलेबंदी&quot; कहा जाता है. </p><p>सीमा सुरक्षा को लेकर यूरोपीय संघ का ज़्यादा ध्यान दक्षिण की ओर केंद्रित है जो अफ़्रीका, मध्यपूर्व और एशिया से आने वाले प्रवासियों का मुख्य रास्ता है.</p><p>हंगरी ने सर्बिया के साथ लगती अपनी सीमा पर 155 किलोमीटर लंबे हिस्से में दो तहों वाला बैरियर बना दिया है. यहां अलार्म और थर्मल इमेजिंग कैमरे लगाए गए हैं.</p><p>बुल्गारिया ने तुर्की के साथ लगती सीमा पर 260 किलोमीटर लंबे हिस्से पर इसी तरह के इंतज़ाम किए हैं.</p><figure> <img alt="हेलिकॉप्टर" src="https://c.files.bbci.co.uk/B6B6/production/_109547764_gettyimages-674713558.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images/HUNGARIAN INTERIOR MINISTRY PRESS OFF</footer> <figcaption>यूरोपीय संघ की सीमा सुरक्षा को लेकर बनी नीति को ‘यूरोप की किलेबंदी’ के नाम से पुकारा जाता है</figcaption> </figure><p>उत्तरी अफ़्रीका से भूमध्यसागर के रास्ते नाव से यूरोपीय संघ पहुंचने की कोशिश करने वालों को रोककर उनके देश की ओर वापस भेज दिया जाता है. इस प्रक्रिया को ट्रांज़िशनल इंस्टिट्यूट जैसे कुछ समूह ‘समुद्री दीवार’ का नाम देते हैं. इस रास्ते से आने वाले प्रवासी मुख्यत: इटली, ग्रीस और स्पेन जाना चाहते हैं.</p><p>मगर ये बैरियर, ये बाधाएं सिर्फ़ यूरोपीय संघ की बाहरी सीमाओं पर ही नहीं हैं. ये यूरोपीय संघ के अंदर भी हैं ताकि प्रवासियों को यूरोप के भीतरी हिस्सों में पहुंचने से रोका जा सके.</p><p>हंगरी ने क्रोएशिया के साथ लगती सीमा पर 300 किलोमीटर लंबी बाड़ लगा दी है. ऑस्ट्रिया ने स्लोवेनिया के साथ लगती सीमा पर बैरियर बनाए हैं जबकि स्लोवेनिया ने क्रोएशिया के साथ लगने वाली सीमा पर.</p><p>स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले चैरिटी समूह एमएसएफ़ का दावा है कि यूरोपीय संघ ने ‘सीमा सुरक्षा और प्रवासियों के प्रबंधन के माध्यम से एक ऐसे मानवीय संकट को जन्म दिया है जिसके बारे में अभी ज़्यादा चर्चा नहीं हो रही है.'</p><h3>शरणार्थियों के लिए दरवाज़े बंद</h3><p>प्रवासन को लेकर यूरोपीय संघ का कड़ा रुख़ इसलिए है क्योंकि इसे लेकर नज़रिये में भी बड़े स्तर पर बदलाव आया है.</p><p>साम्यवादी पूर्वी यूरोपी की सख़्त नीतियों रे लामने अपने यहां आने-जाने की आज़ादी की वकालत करना पहले राजनीतिक रूप से फ़ायदेमंद हुआ करता था. </p><figure> <img alt="बच्चा बर्लिन वॉल तोड़ता हुआ" src="https://c.files.bbci.co.uk/17A06/production/_109547769_gettyimages-118895948.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>मगर 2015 में, शीतयुद्ध ख़त्म होने के बहुत लंबे समय बाद, प्रवासन एक बेहद गंभीर मुद्दा बन गया. हज़ारों, लाखों प्रवासी यूरोपीय संघ में आना शुरू हो गए. उस साल अक्तूबर में ही 2 लाख 20 हज़ार लोग यूरोप पहुंचे थे.</p><p>पूरे यूरोप में अति दक्षिणपंथी पार्टियां आप्रवासन और आप्रवासियों के ख़िलाफ़ प्रचार करने के कारण मज़बूत होकर उभरीं और मुख्यधारा की कई पार्टियों को भी अपनी नीतियों में बदलाव लाना पड़ा.</p><p>2008 के आर्थिक संकट के बाद से यूरोप की अर्थव्यवस्था अभी भी लड़खड़ा ही रही है. अब दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का अधिक ग्रोथ और कम बेरोज़गारी वाला दौर भी नहीं रहा.</p><p>प्रवासियों को बांटकर पूरे यूरोप में थोड़ा-थोड़ा करके बसाने की कोशिशें भी नाकाम रही हैं क्योंकि देशों के बीच इस बात को लेकर मतभेद रहा है कि कौन सा देश कितने प्रवासियों को अपने यहां लेगा.</p><p>यही कारण यहा कि प्रवासियों को यूरोप में आने से रोकने के लिए बैरियर बनाए जाने लगे और 2017 में यूरोप मे सिर्फ़ 7 हज़ार प्रवासी आए.</p> <ul> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2015/05/150506_vert_cul_berlin_magnet_artists_pk?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">क्यों हर कलाकार बर्लिन में बसना चाहता है-</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/vert-cap-49086507?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">मुल्क जहां कोई नहीं बनना चाहता कसाई</a></li> </ul><figure> <img alt="प्रदर्शनकारी" src="https://c.files.bbci.co.uk/883A/production/_109547843_gettyimages-1024644062.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>आप्रवासन के ख़िलाफ यूरोप में कई प्रदर्शन हुए हैं</figcaption> </figure><h3>बाड़</h3><p>शीत युद्ध के दौरान साम्यवादी पूर्वी यूरोप से होने वाले आप्रवासन के समर्थन में जो मानवतावादी तर्क दिए जाते थे ,वे आज की सदी के प्रवासियों के लिए नहीं दिए जाते जबकि इन प्रवासियों के विस्थापन के लिए ज़िम्मेदार हालात और भी डरावने हैं. </p><p>2015 में 33 फ़ीसदी लोग सीरिया से आए, 15 प्रतिशत अफ़ग़ानिस्तान से और छह प्रतिशत इराक़ से. ये सभी देश बेहद ख़ूनी आंतरिक संघर्षों की गिरफ़्त में हैं जिनकी वजह से अब तक लाखों जानें जा चुकी हैं.</p><p>मगर इन लोगों की स्थिति को उस तरह से नहीं देखा जाता, जिस तरह से दशकों पहले पूर्वी गुट से भागे लोगों को देखा जाता था.</p><p>ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह शायद यह देखा जाने लगा है कि प्रवासी हैं कौन.</p><p>हंगरी के इतिहासकार गुज़्ताव केशेकेस ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, &quot;शीत युद्ध के दौरान प्रचार के लिहाज से शरणार्थियों का मसला महत्वपूर्ण हो गया था. जो भी शरणार्थी सोवियत गुट छोड़ता, वह पश्चिमी देशों की श्रेष्ठता की बात करता.&quot;</p><figure> <img alt="रिफ़्यूजी कैंप" src="https://c.files.bbci.co.uk/1247A/production/_109547847_gettyimages-1175911411.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>इनमें अधिकतर लोग ईसाई थे. वे आमतौर पर युवा व शिक्षित होते थे. सबसे ख़ास बात कि वे साम्यवाद विरोधी होते थे. इसका मतलब था कि वे विचारधारा के हिसाब से उन देशों से मेल खाते थे जहां वे शरण लेने के लिए आ रहे होते थे.</p><p>लेकिन अभी जो शरणार्थी आ रहे हैं, वे मिले-जुले हैं. इनमें अकुशल भी हैं और प्रोफ़ेशनल भी, ग्रामीण भी हैं और शहरी भी. कुछ सीरियाई हैं, कुछ इराक़ी तो कुछ अफ़ग़ान. इनमें वयस्क हैं तो बच्चे भी हैं. वे अलग-अलग परिवेश से आ रहे हैं- ऐसे युद्धों से भागकर जिनका अंत नज़र नहीं आता.</p><p>नस्लीय और धार्मिक आधार पर भी वे उन देशों की आबादी से अलग हैं जिन देशों के लिए वे शरण लेने आ रहे हैं. इसी कारण अति दक्षिणपंथी पार्टियां और अन्य लोग उन्हें ‘अवांछित’ मानते हैं.</p><p>और ऐसा भी लगता है कि यूरोपीय संघ अब इन लोगों को बड़ी संख्या में अपने यहां लेने का या तो इच्छुक नहीं है या फिर ऐसा करने में राजनीतिक रूप से अक्षम है.</p><p>जबकि यूरोपीय संघ की सीमाओं के बाहर ही तुर्की इस समय दुनिया की सबसे बड़ी शरणार्थी आबादी को अपने यहां रख रहा है. इनमें अकेले सीरिया से ही आए 36 लाख लोग हैं.</p><p>यह संख्या प्रवासियों को अपने यहां लेने में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी दिखाने वाले यूरोपीय संघ के सदस्य जर्मनी द्वारा अपने यहां रखे 10 लाख लोगों से कहीं अधिक है. </p><p>जर्मनी की आबादी तुर्की से थोड़ी ही अधिक है मगर इसकी अर्थव्यवस्था चार गुनी बड़ी है. फिर भी यह तुर्की के मुक़ाबले एक तिहाई शरणार्थियों को ही अपने यहां रख रहा है.</p><p>लेकिन फिर भी इस मामले में जर्मनी यूरोपीय संघ में सबसे आगे है. ब्रिटेन ने मात्र 1 लाख 26 हज़ार लोगों को शरण दी है. </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-50022871?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">तुर्की के हमले के बाद सीरिया में एक लाख लोग विस्थापित</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-49968631?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">क्या कुर्दों को छोड़ तुर्कों के क़रीब जा रहा अमरीका? </a></li> </ul><p>यूरोपीय संघ का तर्क है कि &quot;दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पैदा हुए सबसे गंभीर शरणार्थी संकट के दौरान इसने 7 लाख 20 हज़ार लोगों को शरण देकर उनका पुनर्वास किया है.&quot; उसका कहना है कि यह संख्या ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमरीका ने मिलकर अपने यहां जितने लोगों को शरण दी है, उससे तीन गुनी है.</p><p>मगर संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि यूरोपीय संघ की नीतियां &quot;यूरोपीय संघ की सीमाओं को और उभारती हैं और प्रवासियों की सुरक्षा को ख़तरे में डालकर उनके मानवाधिकार को संकट में डालती है क्योंकि इससे उन्हें यातनाओं, यौन हिंसा और अन्य गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.&quot;</p><p>संयुक्त राष्ट्र का यह मानना बताता है कि आज का यूरोप 1989 से बहुत बदल गया है जब यह आशावादी भाव से भरा था. ये वह दौर था जब पश्चिमी देश ख़ुद को सहिष्णुता और स्वतंत्रता के ध्वजवाहक मानते थे जिसके दम पर उन्होंने साम्यवादी सर्वसत्तावाद का मुक़ाबला कर उसे परास्त किया था.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>