370 हटाए जाने से कारगिल के लोग क्यों हैं नाराज़: ग्राउंड रिपोर्ट

<figure> <img alt="करगिल" src="https://c.files.bbci.co.uk/14351/production/_108296728_fbc0a995-c507-4eba-bf99-b796de198e76.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>कारगिल के ऊँचे पहाड़ों पर लातू गाँव पाकिस्तान से केवल तीन किलोमीटर की दूरी पर है. यहाँ से पाकिस्तान के गाँव दूरबीन से देखे जा सकते हैं. </p><p>लातू के सबसे चर्चित व्यक्ति ‘क्रिकेट चाचा’ गाँव के कुछ बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं. इस ढलती उम्र […]

<figure> <img alt="करगिल" src="https://c.files.bbci.co.uk/14351/production/_108296728_fbc0a995-c507-4eba-bf99-b796de198e76.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>कारगिल के ऊँचे पहाड़ों पर लातू गाँव पाकिस्तान से केवल तीन किलोमीटर की दूरी पर है. यहाँ से पाकिस्तान के गाँव दूरबीन से देखे जा सकते हैं. </p><p>लातू के सबसे चर्चित व्यक्ति ‘क्रिकेट चाचा’ गाँव के कुछ बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं. इस ढलती उम्र में भी वो आक्रामक बल्लेबाज़ी कर रहे थे. </p><p>उनसे बात करके समझ में आया, उनकी आक्रामक बैटिंग का राज़. वो कारगिल को जम्मू-कश्मीर से हटाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए लद्दाख़ में शामिल किए जाने पर सरकार से नाराज़ हैं. </p><p>क्रिकेट चाचा का असल नाम असग़र अली है. वो कारगिल युद्ध में भारतीय सेना को यहाँ के पहाड़ों की बुलंदियों पर सामान पहुँचाने और घायल फ़ौजियों को वहाँ से नीचे लाने में आगे-आगे थे. </p><p>&quot;हमने 65 की जंग में भारतीय सेना की मदद की. कारगिल युद्ध में मैं 45 वर्ष का था. हमने भारतीय फ़ौज को पानी, खाने का सामान और तेल पहुँचाया लेकिन आज हम भारत सरकार के फ़ैसले से ख़ुश नहीं. हमारे साथ धोखा हुआ है.&quot;</p><figure> <img alt="करगिल" src="https://c.files.bbci.co.uk/08FC/production/_108300320_1829f34f-684a-44ce-8af4-33e1703b4656.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>चालीस घरों वाले लातू गाँव का भारतीय सेना के साथ चोली-दामन का रिश्ता है. दोनों को एक दूसरे की ज़रूरत पड़ती है. </p><p>इस नाराज़गी के बाद भी असग़र अली ने सेना को सामान भेजने का काम जारी रखा है. </p><p>क्रिकेट के दीवाने क्रिकेट चाचा के अनुसार उनका भविष्य अंधकार में जाता नज़र आता है. वो कहते हैं, &quot;हमारी पहचान ख़त्म हो जाएगी. हमारी आने वाली नस्ल हमारी संस्कृति की रक्षा नहीं कर सकेगी.&quot; </p><p>1999 में हुए कारगिल युद्ध में इस जगह के सभी युवाओं ने भारतीय सेना की मदद की थी. शाहनवाज़ वार भी उनमें से एक थे. </p><p>वो कहते हैं, &quot;मैं उस समय 19 वर्ष का था. यहाँ के दूसरे युवाओं की तरह मैंने भारतीय सेना की मदद की. मैं भारत का वफ़ादार हूँ. मैं एक भारतीय हूँ. लेकिन आज मैं मायूस हूँ. भारत सरकार ने हमारे राज्य के स्टेट्स को कम कर दिया है. कारगिल के साथ नाइंसाफ़ी की है.&quot; </p><p>सरकार के फ़ैसले का कारगिल वालों ने कड़ा विरोध किया. कश्मीर घाटी की तरह यहाँ कारगिल में भी पाँच अगस्त से जन-जीवन ठप रहा.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49293272?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">किसने दिलाया था जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा?</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49325008?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">एक कश्मीरी लड़की की पाँच दिन की डायरी</a></li> </ul><figure> <img alt="करगिल" src="https://c.files.bbci.co.uk/571C/production/_108300322_86ee5747-03c6-4ce2-8409-3b45a75c3922.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><h1>70 प्रतिशत शिया मुसलमान</h1><p>धारा 144 के लागू किए जाने के बावजूद सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच दो दिनों तक झड़पें हुईं.</p><p>दुकानें और बाज़ार बंद रहे. पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बीबीसी को फ़िल्म करने और स्थानीय लोगों से बातें करने से रोकने की कोशिश की. </p><p>स्थानीय व्यापारी शाहनवाज़ वार कहते हैं कि उन्होंने अपने 40 वर्ष के जीवन में कारगिल में इतनी कड़ी सुरक्षा नहीं देखी. मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड की सुविधाएँ भी प्रभावित हुईं. </p><p>सरकार के नए क़दम के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित कर दिया – जम्मू कश्मीर और लद्दाख़. </p><p>लद्दाख़ में दो बड़े जिले हैं- बौद्ध धर्म बहुल लेह और मुस्लिम बहुल कारगिल. इस ज़िले में 70 प्रतिशत शिया मुसलमान हैं. कारगिल ज़िले की आबादी 1.5 लाख बताई जाती है, जिनमें से 30,000 कारगिल शहर में आबादी है.</p><figure> <img alt="करगिल" src="https://c.files.bbci.co.uk/A53C/production/_108300324_b6cd54f8-7367-48a9-bf63-c744aefa6f79.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>भारत सरकार के इस क़दम पर जहाँ लेह में जश्न मनाया जा रहा है, वहीं कारगिल में इसका विरोध हो रही है.</p><p>लेह और कारगिल की आपसी नाराज़गी पुरानी है. वहीं कारगिल वालों का कश्मीर घाटी से रिश्ता प्राचीन समय से है. </p><p>यहाँ के एक वरिष्ठ पत्रकार सज्जाद कारगिली कहते हैं कि भारत सरकार के इस इस फ़ैसले से ये प्राचीन रिश्ता टूट जाएगा. &quot;श्रीनगर हमारे यहाँ से नज़दीक है. हम रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए घाटी पर निर्भर हैं.&quot; </p><p>वो कहते हैं कि कारगिल की जनता इस फ़ैसले काफ़ी परेशान है. उनके अनुसार अभी तो कई लोगों को इसकी तफ़सील भी नहीं मालूम. </p><p>नासिर मुंशी कारगिल ज़िले के कांग्रिस पार्टी के अध्यक्ष हैं. उनके अनुसार कारगिल और कश्मीर घाटी में धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक रिश्ते हैं.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49327578?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अमरिंदर सिंह ने यूं जीता कश्मीरियों का दिल</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49325087?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">सैनिकों से इतने ख़ुश हुए कि ईद पर बुलाया घर</a></li> </ul><figure> <img alt="करगिल" src="https://c.files.bbci.co.uk/F35C/production/_108300326_5a5ae721-8301-413b-9988-55f7ef56446c.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>लेकिन नासिर मुंशी के अनुसार कारगिल और कश्मीर घाटी में एक बड़ा फ़र्क़ है, &quot;हम भारत में रहना चाहते हैं. देश प्रेमी हैं. हमने घाटी में जारी मिलिटेंसी को कभी सपोर्ट नहीं किया. यहाँ ना कभी कोई मिलिटेंट बना. लेकिन भारत सरकार ने हमारे साथ भेदभाव किया.&quot;</p><p>कुछ लोग इस बात से भी घबराए हैं कि अब भारत के दूसरे इलाक़ों से यहाँ आकर लोग जायदाद ख़रीदेंगे और व्यवसाय करेंगे. वो अपने युवाओं की नौकरियों को लेकर भी परेशान हैं. </p><p>नज़मुल हुदा नामी एक युवा वकील ने कहा कि स्थानीय लोग साधारण लोग होते हैं और वो भारत के लोगों से मुक़ाबला नहीं कर सकते. </p><p>नज़मुल हुदा और दूसरे कई लोग इस बात पर नाराज़ थे कि केंद्र सरकार ने इतना बड़ा फ़ैसला करने से पहले स्थानीय हिल काउंसिल और स्थानीय लोगों से विचार-विमर्श क्यों नहीं किया.</p><figure> <img alt="करगिल" src="https://c.files.bbci.co.uk/1417C/production/_108300328_c4e20675-e524-4f2f-baba-0ff382bd6665.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>नेशनल कॉन्फ़्रेन्स के मुर्तज़ा अली कहते हैं, &quot;जब किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन किया जाता है तो लोगों से राय ली जाती है. हमसे किसी ने कुछ नहीं पूछा.&quot;</p><p>कारगिल के लोगों की माँग है कि उन्हें आर्टिकल 370 और 35A में जो ख़ास सुविधाएँ मिली थीं, उसी तरह की सुरक्षा प्रदान की जाए, जिससे उनके युवाओं की नौकरियों, उनकी शिक्षा और उनकी जायदाद के लिए कोई अलग से प्रावधान किया जाए. ताकि उनका भविष्य और उनकी पहाड़ी संस्कृति की सुरक्षा बनी रहे. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.</strong><strong>)</strong></p>

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