दोहा (कतर): राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश ने कहा कि वर्तमान भूमंडलीकृत विश्व में एक सशक्त शिक्षा प्रणाली किसी भी राष्ट्र के भाग्य को बदल सकती है क्योंकि शिक्षा असमानता और गरीबी को दूर करने के साथ समग्र आर्थिक विकास, बेहतर स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और सामाजिक समावेश सुनिश्चित करती है.
राज्यसभा के उपसभापति अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 140वीं बैठक में ‘शांति, सुरक्षा और कानून के शासन के लिए शिक्षा को बढ़ाने के लिए मंच के रूप में संसद’ संबंधी परिचर्चा में हिस्सा ले रहे थे.
हरिवंश ने कहा, गुणवत्तापरक शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाती है. भारत के सांसद इस तथ्य के प्रति जागरूक हैं कि शिक्षा व्यक्ति को विश्व से परिचित कराती है और विभिन्न राष्ट्रों को एक वैश्विक परिवार के रूप में परिवर्तित कर देती है.
उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य से संसद को राष्ट्र की विकास योजनाओं और बजटों तथा इसके द्वारा अनुमोदित मदों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है.
संसद ने सदैव देश में सोशल इंजीनियरिंग की स्थापना के साधन के रूप में शिक्षा के प्रसार पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित किया है. हरिवंश ने कहा, वर्तमान भूमंडलीकृत विश्व में एक सशक्त शिक्षा प्रणाली किसी भी राष्ट्र के भाग्य को बदल सकती है क्योंकि शिक्षा असमानता को दूर करने और गरीबी का उपशमन करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास, बेहतर स्वास्थ्य, स्त्री- पुरुष समानता और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देती है.
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भारत की विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया, जिसमें सर्व शिक्षा अभियान, समग्र शिक्षा, स्वयंप्रभा, सारांश आदि शामिल है. हरिवंश ने कहा कि सोशल मीडिया की वैश्वीकरण प्रकृति ने कई चुनौतियां पैदा की हैं और सांसदों को अवैध प्रचार गतिविधि एवं दुष्प्रचार को पहचानने और रोकने के लिए सोशल मीडिया को जिम्मेदार बनाने का तरीका खोजना है.
उन्होंने इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की पहल अध्यक्षीय शोध कदम (अशोक) का उल्लेख भी किया. राज्यसभा सदस्य डॉ सोनल मानसिंह ने अंतर-संसदीय संघ की लोकतंत्र और मानवाधिकार संबंधी तीसरी स्थायी समिति की परिचर्चा में हिस्सा लिया. लोकसभा महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव और सचिव राज्यसभा डॉ पी पी के रामाचार्युलु ने भी बैठक में हिस्सा लिया.
