वाशिंगटन : भारत में आत्मघाती हमलावर तैयार करने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवादी घोषित कर सकता है. इससे पहले अमेरिका ने माना कि मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार हैं. उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित नहीं करना क्षेत्रीय स्थिरता एवं शांति के लिए खतरा होगा. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप-प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडिनो ने ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता एवं शाति के लिए काम कर रहे हैं. यदि हम जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं, तो हम आतंकवाद के खात्मे के अपने संकल्प को पूरा नहीं कर पायेंगे.
अमेरिका ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अहम निर्णय लिये जाने से पहले यह बयान दिया. समाचार एजेंसी ANI ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पलाडिनो के बयान को ट्वीट किया. इसमें लिखा, ‘अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और सरगना है. उसे संयुक्त राष्ट्र की ओर से आतंकवादी घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं.’
पालाडीनो ने आगे कहा कि जैश कई आतंकवादी हमलों में शामिल रहा है और वह क्षेत्रीय स्थिरता एवं शांति के लिए खतरा है. पलाडिनो ने कहा कि अमेरिका और भारत आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं. उन्होंने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र में हुई बातचीत पर सीधी टिप्पणी नहीं की.
उल्लेखनीय है कि 50 वर्षीय अजहर ने भारत में कई आतंकवादी हमले कराये हैं और वह संसद, पठानकोट वायुसेना स्टेशन, उरी तथा जम्मू-कश्मीर में कई अन्य जगह सैन्य शिविरों पर हमले और हाल में पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए आत्मघाती हमले का साजिशकर्ता है. पुलवामा में 14 फरवरी को हुए जैश के हमले में 40 जवान शहीद हो गये थे.
इस हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए प्रस्ताव पेश किया था. इससे पहले सुरक्षा परिषद में अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने की कई कोशिशों को पाकिस्तान का मित्र चीन बाधित कर चुका है.
परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में शामिल चीन अब तक यह कहता आया है कि अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं. पुलवामा हमले के बाद वैश्विक आक्रोश के मद्देनजर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस को उम्मीद है कि इस बार चीन समझदारी से काम लेगा और उनके कदम को बाधित नहीं करेगा. पुलवामा हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है.
