संयुक्त राष्ट्रः दक्षिण एशियाई देशों में 2008-17 के दौरान वास्तविक औसत पारिश्रमिक में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गयी है. अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है. आईएलओ की वैश्विक पारिश्रमिक रिपोर्ट 2018-19 के अनुसार किसी अन्य क्षेत्र के मुकाबले एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2008-17 में ज्यादा तेजी से आर्थिक वृद्धि दर्ज की गयी. इसका लाभ इस क्षेत्र के श्रमिकों को मिला है, जिनके वास्तविक औसत पारिश्रमिक में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गयी. इसमें चीन, भारत, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं.
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दक्षिण एशियाई देशों में वास्तविक औसत पारिश्रमिक वृद्धि के मामले में भारत का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा. वर्ष 2008-17 के बीच भारत की इस मद में वृद्धि दर 5.5 फीसदी रही, जबकि पूरे क्षेत्र की वृद्धि दर 3.7 फीसदी रही. भारत के बाद नेपाल में यह आंकड़ा 4.7 फीसदी, श्रीलंका में चार फीसदी, बांग्लादेश में 3.4 फीसदी और पाकिस्तान में 1.8 फीसदी रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जी-20 समूह के उभरते देशों में केवल मेक्सिको को छोड़कर सभी देशों में 2008 से 2017 के बीच औसत पारिश्रमिक में वास्तविक वृद्धि सकारात्मक रही है.
रिपोर्ट में कहा गया कि सउदी अरब, भारत और इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि लगातार जारी रही, जबकि तुर्की में यह 2017 में करीब एक फीसदी गिरी है. रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में 2012 से 2016 के बीच शून्य वृद्धि के बाद 2016 से सकारात्मक वृद्धि का दौर शुरू हुआ. ब्राजील में 2015- 16 के दौरान गिरावट रही. तेल मूल्यों में गिरावट की वजह से रूस में 2015 में वेतन वृद्धि में उल्लेखनीय गिरावट रही, लेकिन इसके बाद इसमें वृद्धि का रुख बन गया.
