Bihar News: बगहा में बकरी चराने गये किशोर का बाघ ने किया शिकार, जंगल में क्षत-विक्षत हालत में मिला शव

बिहार के पश्चिमी चंपारण के बगहा में बाघ ने एकबार फिर एक युवक का शिकार कर लिया. 13 वर्षीय राजकुमार बकरी चराने जंगल की ओर गया और अचानक बाघ ने उसपर हमला करके उसकी जान ले ली.

Bihar News: बगहा में शनिवार की दोपहर बाद वीटीआर के चिउटाहा वन क्षेत्र अंतर्गत वन कक्ष संख्या के-32 में बाघ के हमले से जिमरी नौतनवा पंचायत के जिमरी निवासी लक्ष्मण बैठा का पुत्र 13 वर्षीय राजकुमार बैठा की दर्दनाक मौत हो गयी. बताया जा रहा है कि चिउटाहा थाना क्षेत्र के जिमरी निवासी व मृत किशोर अपने साथी के साथ जंगल के समीप बकरी चराने गया था कि अचानक जंगल की झाड़ियों से निकल कर एक बाघ ने उस पर हमला बोल दिया.

साथियों ने भागकर गांव में बताया

बाघ के हमले को देख अन्य साथी शोरगुल मचाते हुए गांव के तरफ भागे और ग्रामीणों को इसकी जानकारी. जिसके बाद स्थानीय ग्रामीण व परिजन तुरंत वन क्षेत्र कार्यालय को सूचना दिए तथा जंगल में पहुंचे. इस बीच सूचना पर प्रभारी वनपाल व वनरक्षी भी वन कर्मियों के साथ उक्त स्थल पर पहुंच चुके थे. काफी खोजबीन करने के बाद क्षत विक्षत हालत में राजकुमार का शव मिला.

क्षत विक्षत हालत में मिला राजकुमार मृत घोषित

क्षत विक्षत हालत में मिले राजकुमार को ग्रामीण व वन कर्मियों की टीम इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल ले गये. जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. हालांकि मौके पर ही उपस्थित चिकित्सक ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम कर उसके परिजनों को सौंप दिया. बताते चलें कि मृतक के पिता लक्ष्मण बैठा प्रवासी मजदूर हैं जो मजदूरी के सिलसिले में बाहर गये हुए है.

ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया आरोप

बता दें कि इन दिनों जंगली जानवर लगातार निकल रिहायशी इलाके में आ रहे हैं. बाघ, तेंदुए, जंगली भैंसा आदि खूंखार जानवर आए दिन जंगल से बाहर आ रहे हैं. जिसको लेकर लोगों में दहशत का माहौल बन गया है. बाघ व जंगली भैंसों से हो रही घटनाओं को देखते हुए वनवर्ती गांव के लोगों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दिनों ना ही वन क्षेत्र अधिकारियों के द्वारा ना ही फोन रिसीव किया जाता है और ना ही पेट्रोलिंग किया जाता है.

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नजरअंदाजी की सजा भुगत रहे ग्रामीण 

आरोप लगाया कि वनरक्षी व वन कर्मियों की भी गश्ती इन दिनों ढीली पड़ गयी है. वनवर्ती गांव के लोग वन क्षेत्र अधिकारियों की इस नजरअंदाजी की सजा भुगत रहे हैं. वन क्षेत्र अधिकारियों के द्वारा कभी भी वनवर्ती गांव तथा सरेहों मे जानवरों की चहलकदमी तथा शिकारी तस्करों की निगरानी के लिए पेट्रोलिंग नहीं की जाती है.

वीटीआर में कब-कब हुए हमले

गौरतलब हो कि वर्ष 2017 में बाघ के हमलों में सबसे ज्यादा लोगों की जान गयी. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बाघ के हमले में 2017 में करीब 16 लोगों की मौत हुई थी. जबकि वर्ष 2018 में बाघ के महलों में तीन लोगों की मौत हुई थी. वही 2019 में एक शख्स की बाघ ने हत्या कर दी थी.

बीते आठ मई को भी बाघ ने किया हमला

वर्ष 2020 में फरवरी को आया था. जब फूलचंद नाम के शख्स के बाघ ने अपना निशाना बनाया था. इसके चार दिन बाद इसी इलाके में यानी पांच फरवरी को रुपलाल नाम के शख्स को बाघ ने अपना निशाना बनाया था. 2020 साल के जून में बाघ का अंतिम हमला हुआ था. जब शिवेंदु मंडल का सामना बाघ से हो गया था और बाघ ने उसे मार डाला. वही बीते आठ मई 2022 को हरनाटांड़ वन क्षेत्र के कौशिल जंगल के समीप 17 वर्षीय किशोर अविनाश कुमार पर बाघ ने हमला कर बुरी तरह से जख्मी कर दिया था.

POSTED BY: Thakur Shaktilochan

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By Prabhat Khabar News Desk

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