Republic Day 2025: राजपथ क्यों बना कर्तव्य पथ? जानें पूरी कहानी

Rajpath Become Kartavya Path Full Story: भारत इस साल अपना 76वां रिपब्लिक डे या फिर कहें तो गणतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. ऐसे में दिल्ली के कर्तव्य से परेड निकलने वाली है. आज हम आपको बताने वाले हैं कि आखिर दिल्ली के कर्तव्य पथ का नाम यह पड़ा कैसे. चलिए विस्तार से जानते हैं.

Kartavya Path Full Story: हर साल 26 जनवरी गणतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के कर्त्तव्य पथ पर परेड का आयोजन किया जाता है. देशभर से लोग इस परेड को देखने के लिए यहां मौजूद होते हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल भी रिपब्लिक डे के मौके पर यहां काफी ज्यादा भीड़ होने वाली है. अगर आप भी इस परेड का हिस्सा बनने जा रहे हैं तो आपके लिए यह भी जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर इस मार्ग को कर्त्तव्य पथ क्यों कहा जाता है. अगर आपको इस बारे में कुछ भी नहीं मालूम तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको इस साधारण से सवाल का काफी मजेदार जवाब मिलने वाला है. तो चलिए जानते हैं.

कर्त्तव्य पथ से पहले इस नाम से थी पहचान

कर्त्तव्य पथ के नाम से पहले इस पथ को राजपथ नाम से जाना जाता था. लेकिन, राजपथ नाम पड़ने से पहले भी इसे क्वींसवे मार्ग के नाम से जाना जाता था. बता दें यह मार्ग करीबन तेन किलोमीटर लंबी है और इस रोड का नाम पहली बार ब्रिटिश राजा किंग जॉर्ज पंचम ने रखा था. इस सड़क या फिर मार्ग को देश के सबसे ऐतिहासिक सड़कों में गिना जाता है. यह सड़क इंडिया गेट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक जाती है. बता दें भारत की आजादी के आंदोलन के इतिहास में इस सड़क का काफी ज्यादा महत्व रहा है.

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क्यों पड़ा कर्तव्य पथ नाम?

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि कर्तव्य पथ के नाम से पहचाने जाने से पहले इस सड़क को राजपथ के नाम से जाना जाता था. लेकिन, साल 2022 में जब पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा था तो उसी समय इसका नाम बदलकर कर्तव्य पथ रख दिया गया था. यह तो रहा इसका इतिहास, लेकिन आखिर इसका अर्थ क्या है? कर्त्तव्य पथ का अर्थ होता है कर्तव्यों का मार्ग. इस शब्द का निर्माण कर्त्तव्य और पथ को मिलाकर हुआ है. कर्तव्य शब्द का अर्थ होता है कुछ ऐसा करना जो कि नैतिक रूप से जरूरी भी हो और सही भी. वहीं, पथ का अर्थ होता है रास्ता या फिर मार्ग. दोनों धब्दों को मिलाकर जब इसका अर्थ निकाला जाए तो यह वह मार्ग बनकर निकलता है जो कर्तव्यों को पूरा करने की तरफ लेकर जाता हो.

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Author: Saurabh Poddar

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