Cg Election: खरसिया में रहा है पटेलों का जलवा, भूपेश बघेल सरकार में उमेश पटेल को मिले कई अहम विभाग

छत्तीसगढ़ में अब तक हुए विधानसभा चुनावों में खरसिया सीट पर पटेलों का जलवा रहा है. सभी 4 चुनावों में पटेल ही जीते हैं. वर्ष 2003 के पहले चुनाव में नंद कुमार पटेल कांग्रेस के टिकट पर जीते. दूसरे चुनाव में बीजेपी के टिकट पर वही जीते. तीसरे और चौथे चुनाव में उमेश पटेल ने कांग्रेस के लिए यह सीट जीती.

Cg Election 2023: छत्तीसगढ़ के खरसिया विधानसभा सीट पर अब तक पटेलों का ही कब्जा रहा है. वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव हों या उसके बाद अब तक हुए असेंबली इलेक्शन. हर बार पटेल ही जीता है. दो बार नंद कुमार पटेल ने इस विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की, तो दो बार उमेश पटेल ने कांग्रेस का परचम लहराया. हालांकि, नंद कुमार पटेल एक बार कांग्रेस के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे, तो दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर जीतकर विधायक बने.

2018 में उमेश पटेल को मिले थे 52.92 फीसदी वोट

वर्ष 2018 के छत्तीसगढ़ विधासभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उमेश पटेल ने खरसिया विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 52.92 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. दूसरे नंबर पर बीजेपी के ओपी चौधरी रहे थे, जिन्हें 43.39 फीसदी मत मिले थे. निर्दलीय उम्मीदवार विजय शर्मा को एक फीसदी से भी कम 0.7 फीसदी वोट प्राप्त हुए. विजय शर्मा को जितने वोट मिले थे, उससे ज्यादा मतदाताओं ने नोटा (NOTA) दबाया था. नोटा दबाने वाले वोटरों का प्रतिशत 1.33 था.

खरसिया में 2018 में पड़े थे 87.43 फीसदी वोट

वोट की बात करें, तो छत्तीसगढ़ के इस अनारक्षित विधानसभा सीट पर कुल 2,03,609 वोटर मतदान के लिए पंजीकृत थे. लेकिन इनमें से 87.43 फीसदी (1,78,006) मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इनमें से उमेश पटेल के पक्ष में 94,201 लोगों ने वोट किया, तो ओपी चौधरी को 77,324 लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ. 1,252 लोगों ने विजय शर्मा के पक्ष में मतदान किया और 2,368 लोगों ने नोटा का बटन दबाया.

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अमेरिका और बैंकॉक की यात्रा कर चुके हैं उमेश पटेल

अब एक नजर उमेश पटेल के व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन पर डालते हैं. उमेश पेटल शहीद नंदकुमार पटेल के बेटे हैं. उनका जन्म रायगढ़ जिले के नंदेली में 28 नवंबर 1983 को हुआ. 19 मई 2013 को वह विवाह बंधन में बंधे. उनकी पत्नी का नाम सुधा पटेल है. उनका जन्म 16 जनवरी 1989 को हुआ था. उमेश और सुधा की एक पुत्री है. बीई (आईटी) की पढ़ाई करने वाले उमेश पटेल का व्यवसाय कृषि है. उन्होंने अमेरिका और बैंकॉक की यात्रा की है.

2013-14 में बने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के महासचिव

कांग्रेस पार्टी के युवा नेता उमेश पटेल वर्ष 2013-14 में छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के महासचिव बनाये गये थे. वर्ष 2013 में उन्होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीते. वर्ष 2018 में एक बार फिर कांग्रेस ने उन पर दांव लगाया और उमेश पटेल ने यह सीट पार्टी की झोली में डाल दी. छत्तीसगढ़ में मंत्री बनने के पहले वह कई समितियों के सदस्य रहे.

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छत्तीसगढ़ विधानसभा की कई समितियों में रहे सदस्य

वर्ष 2014-15 में उमेश पटेल को सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति, पुस्तकालय समिति, महिलाओं एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति का सगस्य बनाया गया. वर्ष 2015-16 में वह प्र्सन एवं संदर्भ समिति, आचरण समिति, महिलाओं एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति में सदस्य रहे. वर्ष 2016-17 में उनको प्राक्कलन समिति, प्रत्यायुक्त विधान समिति का सदस्य बनाया गया.

भूपेश बघेल सरकार में मंत्री बने उमेश पटेल

वर्ष 2017-18 में उन्हें गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति का सदस्य बनाया गया. इसके साथ-साथ सदस्य सुविधा एवं सम्मान समिति का भी उन्हें सदस्य बनाया गया. वर्ष 2018 में जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी, तो उमेश पटेल को उच्च शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेल और युवा कल्याण मंत्री बनाया गया.

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खरसिया में एक बार बीजेपी, तीन बार कांग्रेस जीती

खरसिया विधानसभा सीट से छत्तीसगढ़ बनने के बाद हुए चार चुनावों में दो-दो बार नंद कुमार पटेल और उमेश पटेल ने जीत दर्ज की है. वर्ष 2003 में नंद कुमार पटेल ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था. वर्ष 2008 में वह बीजेपी में शामिल हो गये और यह सीट बीजेपी की झोली में चली गयी. लेकिन वर्ष 2013 और वर्ष 2018 के चुनावों में उमेश पटेल ने बीजेपी से यह सीट छीनकर फिर कांग्रेस की झोली में डाल दी. इस तरह खरसिया विधानसभा सीट से चार चुनावों में एक बार बीजेपी ने जीत दर्ज की, जबकि तीन बार कांग्रेस ने.

नवंबर-दिसंबर में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव

छत्तीसगढ़ इलेक्शन 2023 के लिए एक बार फिर सभी दलों ने कमर कस ली है. खासकर कांग्रेस और बीजेपी ने. बीजेपी एक बार फिर छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ होना चाहती है, तो कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से जीतने के लिए बेताब है. 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव नवंबर-दिसंबर में होने हैं. वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के सबसे ज्यादा 71 सदस्य हैं. बीजेपी के अब सिर्फ 13 विधायक रह गये हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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