Navratri 2022, Maa Bharamacharini Puja LIVE: आज नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

Navratri 2022 Day 2, Maa Bharamacharini Puja LIVE: नवरात्रि के दूसरे दिन आज मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराज्ञ्य की देवी माना जाता है. मां दुर्गा के इस स्वरूप में उनके एक हाथ में जप की माता और दूसरे हाथ में कमण्डल है.आइए जानते हैं इस नवरात्रि दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, आरती और भोग.

Live Updates
6:36 AM. 28 Sept 22 6:36 AM. 28 Sept

मां दुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा

मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है. नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-अर्चन किया जाता है. इनका यह स्वरुप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है. बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है. इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. दस भुजाओं वाली देवी के हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र विभूषित है.

6:36 AM. 28 Sept 22 6:36 AM. 28 Sept

हर छह महीने के अंतराल पर आती है नवरात्रि

हर साल 6 महीने के अंतराल पर नवरात्रि आती हैं. पहेल दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कुष्मांडा, 5वे दिन स्कंद माता, 6ठे दिन मां कात्यायनी, 7वें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नवें दिन मां सिद्धिदात्री के रूप की पूजा की जाती है. मां के हर रूप का महत्व है और हर रूप की अलग खासियत है. 4 अप्रैल को नवरात्रि का तीसरा दिन है और आज के दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जा रही है.

6:36 AM. 28 Sept 22 6:36 AM. 28 Sept

इसलिए पड़ा मां चंद्रघंटा नाम

देवी मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है. इनके शरीर का रंग सोने के समान चमकीला है. मां के 10 हाथ हैं. इनके हाथों में खड्ग, अस्त्र-शस्त्र और कमंडल विराजमान है.

6:36 AM. 28 Sept 22 6:36 AM. 28 Sept

मां चंद्रघंटा का भोग और प्रिय रंग

मां चंद्रघंटा की पूजा के समय सफेद, भूरा या स्वर्ण रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. इसके साथ भक्त इस दिन दूध से बने मिष्ठान का भोग लगा सकते हैं. मान्यता है कि माता को शहद भी प्रिय है.

6:36 AM. 28 Sept 22 6:36 AM. 28 Sept

मां चंद्रघंटा पूजा विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन सर्वप्रथम जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें. फिर मां चंद्रघंटा का ध्यान करें और उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें. अब माता रानी को अक्षत, सिंदूर, पुष्प आदि चीजें अर्पित करें.

4:55 PM. 27 Sept 22 4:55 PM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी संध्या आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता

ब्रह्मा जी के मन भाती हो

ज्ञान सभी को सिखलाती हो

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा

जिसको जपे सकल संसारा

जय गायत्री वेद की माता,

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता,

कमी कोई रहने न पाए,

कोई भी दुख सहने न पाए,

उसकी विरति रहे ठिकाने,

जो ​तेरी महिमा को जाने,

रुद्राक्ष की माला ले कर,

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर,

आलस छोड़ करे गुणगाना,

मां तुम उसको सुख पहुंचाना,

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम,

पूर्ण करो सब मेरे काम,

भक्त तेरे चरणों का पुजारी,

रखना लाज मेरी महतारी.

3:14 PM. 27 Sept 22 3:14 PM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी का ऐसा है स्वरूप

शास्त्रों में मां ब्रह्माचारिणी को ज्ञान और तप की देवी माना जाता है. कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करते हैं, उन्हें धैर्य के साथ और ज्ञान की प्राप्ति होती है. ब्रह्म का मतलब तपस्या होता है, तो वहीं चारिणी का मतलब आचरण करने वाली. इस तरह ब्रह्माचारिणी का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली. मां ब्रह्माचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला और बाएं में कमंडल है.

3:14 PM. 27 Sept 22 3:14 PM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

2:32 PM. 27 Sept 22 2:32 PM. 27 Sept

नवरात्रि में घर लाएं मोर पंख

मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मोर पंख को घर में लाना शुभ माना गया है. बताया गया कि नवरात्रि के दौरान घर में मोर पंख लाने से वास्तु दोष दूर होता है और उसकी पूजा करने के बाद अगर बच्चों के कमरे में रखा जाए तो उनका पढ़ाई में मन लगा रहेगा.

10:24 AM. 27 Sept 22 10:24 AM. 27 Sept

सुपारी अर्पित करने से विवाह का वरदान मिलता है

नवरात्रि पूजा में देवी को सुपारी अर्पित करने से विवाह का वरदान प्राप्त होता है. इसके लिए एक संपर्ण सुपारी लें, सुपारी जितनी बड़ी हो उतना ही शुभ होगा. इसके चारों ओर सिंदूर लगाएं. इसके बाद सुपारी को पीले कपड़े में लपेट कर देवी को अर्पित कर दें. इसके बाद देवी से विवाह की प्रार्थना करें. ये उपाय करने से शीघ्र विवाह का आशीर्वाद मिलता है.नवरात्रि के बाद कपड़े के साथ सुपारी को अपने शयनकक्ष में रख लें.

10:24 AM. 27 Sept 22 10:24 AM. 27 Sept

लौंग के प्रयोग से मनोकमना पूर्ण होगी

देवी की पूजा में लौंग का प्रयोग ज्यादा होता है. इसका उपयोग करने से मनोकामनाएं पूरी होती है.उपाय करने के लिए आपको अपनी उम्र के बराबर लौंग लेना है, जिसे काले धागे में बांधकर माला बना लें. नवरात्रि में किसी भी जो आपको ठीक लगे उस दिन देवी को लौंग की माला अर्पित करें. इसके बाद अपनी मनोकामना की प्रार्थना करें. मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद माला को जल में प्रवाहित कर दें. बता दें कि नवरात्रि में देवी को चांदी के लौंग चढ़ाने से तंत्र मंत्र की बाधा कट जाती है.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में करे ये उपाय

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों के साथ चंद्रमा के मंत्रों का जाप करना उचित माना जाता है. इस दिन माता को चांदी की वस्तु अर्पित की जाती हैं. साथ ही शिक्षा या ज्ञान के लिए आप मां सरस्वती की भी पूजा कर सकते हैं. भोग लगाने के बाद घर के सभी सदस्यों को प्रसाद दें. ऐसा करने से घर के सभी सदस्यों की लंबी आयु का वरदान मिलता है. नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाना चाहिए.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

आज किन बातों का रखना है खास ख्याल

पूजा दूसरे दिन भी आपको सारे नियम का पालन करना जरूरी है. 9 दिनों तक मां को प्रसन्न करने के लिए घटस्थापना, अखंड ज्योति, आरती, भजन किए जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार सभी देवी-देवताओं में मां दुर्गा की पूजा में नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है. नवरात्रि में यदि आप ने घर में कलश की स्थापना या माता रानी की चौकी या अखंड ज्योति लगाई है तो घर खाली ना छोड़े. साथ ही कलश और अखंड ज्योति बुझाने न दे. इस बात का खास ध्यान रखें

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्माचारिणी आरती (Maa Brahmacharini Aarti)

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता

ब्रह्मा जी के मन भाती हो

ज्ञान सभी को सिखलाती हो

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा

जिसको जपे सकल संसारा

जय गायत्री वेद की माता,

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता,

कमी कोई रहने न पाए,

कोई भी दुख सहने न पाए,

उसकी विरति रहे ठिकाने,

जो ​तेरी महिमा को जाने,

रुद्राक्ष की माला ले कर,

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर,

आलस छोड़ करे गुणगाना,

मां तुम उसको सुख पहुंचाना,

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम,

पूर्ण करो सब मेरे काम,

भक्त तेरे चरणों का पुजारी,

रखना लाज मेरी महतारी.

7:31 AM. 27 Sept 22 7:31 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से लाभ (Maa Brahmacharini Puja benefit)

मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से जातक की शक्ति, संयम, त्याग भावना और वैराग्य में बढ़ोत्तरी होती है.

संकट में देवी भक्त को संबल देती है. तप के जरिए देवी ने असीम शक्ति प्रप्ता की थी, इसी शक्ति से मां राक्षसों का संहार किया था. माता के आशीर्वाद से भक्त को अद्भुत बल मिलता है जो शत्रु का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है.

आत्मविश्वास और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है. देवी के प्रभाव से जातक का मन भटकता नहीं.

7:31 AM. 27 Sept 22 7:31 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी प्रिय फूल (Maa Brahmacharini Favourite Flower)

देवी को बरगद (वट) वृक्ष का फूल पसंद है.इसका रंग लाला होता है.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

कैसा है मां ब्रह्माचारिणी स्वरूप ?

शास्त्रों में मां ब्रह्माचारिणी को ज्ञान और तप की देवी माना जाता है. कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करते हैं, उन्हें धैर्य के साथ और ज्ञान की प्राप्ति होती है. ब्रह्म का मतलब तपस्या होता है, तो वहीं चारिणी का मतलब आचरण करने वाली. इस तरह ब्रह्माचारिणी का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली. मां ब्रह्माचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला और बाएं में कमंडल है.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

शारदीय नवरात्रि द्वितीया तिथि

नवरात्रि के दूसरे मां ब्रह्माचारिणी की पूजा का विधान है. द्वितीया तिथि की शुरुआत 27 सितंबर को 03:09 AM से ही रही है, जो कि अगले दिन 28 सितंबर को 02:28 AM तक है.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी का भोग – रंग (Maa Brahmacharini Puja Color)

देवी ब्रह्मचारिणी को शक्कर और पंचामृत का भोग अति प्रिय है. देवी को इसका भोग लगाने से दीर्धायु का आशीष मिलता है. नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की लाल रंग शुभ माना गया है.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र (Maa Brahmacharini Puja Mantra)

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र (Maa Brahmacharini Beej Mantra)

ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।

मां ब्रह्मचारिण प्रार्थना मंत्र (Maa Brahmacharini Prayer Mantra)

दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja vidhi)

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में लाल रंग का ज्यादातर उपयोग करें. स्नान के बाद लाल वस्त्र पहने.

जहां कलश स्थापना की है या फिर पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करते हुए उन्हें रोली, अक्षत, हल्दी अर्पित करें.

देवी को पूजा में लाल रंग के फूल चढ़ाएं. माता की चीनी और पंचामतृ का भोग लगाएं. फल में सेब जरूर रखें. अगरबत्ती लगाएं और देवी के बीज मंत्र का 108 बार जाप करें

नवरात्रि में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने बहुत शुभ माना गया है. अंत में देवी ब्रह्मचारिणी की कपूर से आरती करें.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

मां ब्रह्मचारिणी को ब्राह्मी भी कहा जाता है. ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी मतलब आचरण करने वाली यानी कि तप का आचरण करने वाली शक्ति. देवी के दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल है. भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तप किया था जिससे ये मां ब्रह्मचारिणी कहलाईं.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

शारदीय नवरात्रि 2022 शुभ योग (Navratri 2022 Maa Brahmacharini Puja Shubh yoga)

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन तीन योग ब्रह्म, इंद्र और द्विपुष्कर योग का संयोग बन रहा है. इसमें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सर्व कार्य सिद्धि का वरदान प्राप्त होगा.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी पूजा 2022 मुहूर्त (Maa Brahmacharini Puja muhurat 2022)

अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि शुरू – 27 सितंबर 2022, सुबह 03.08

अश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि समाप्त – 28 सितंबर 2022, सुबर 02.28

ब्रह्म मुहूर्त – सबुह 04:42 – सुबह 05:29

अभिजित मुहूर्त – सुबह 11:54 – दोपहर 12:42 पी एम

गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:06 – शाम 06:30

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

इस प्रसाद से दूर होगा विषाद

नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का शीघ्र आशीर्वाद पाने के लिए माता को नैवेद्य में केसर की खीर, हलवा या फिर चीनी का विशेष रूप से भोग लगाएं. इसके साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति को प्रसाद स्वरूप चीनी भी प्रदान करें. ध्यान रहे कि ऐसा करते समय आपके मन में जरा भी अभिमान न आए, इसीलिए दान की बजाय प्रसाद के रूप में उस व्यक्ति की मदद करें. मान्यता है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के इस उपाय को करने पर साधक का जीवन सुखमय हो जाता है और उसे जीवन में कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होती है.

इन शुभ मुहूर्त में करें पूजा

ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 am से 05:24 am

अभिजित मुहूर्त- 11:48 am से 12:36 pm

विजय मुहूर्त- 02:12 pm से 03:00 pm

गोधूलि मुहूर्त- 06:00 pm से 06:24 pm

अमृत काल- 11:51 pm से 01:27 am, 28 सितम्बर

निशिता मुहूर्त- 11:48 pm से 12:36 am, 28 सितम्बर

द्विपुष्कर योग- 06:16 am से 02:28 am, 28 सितम्बर

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की साधना का महामंत्र

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की प्रिय वस्तु

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प प्रिय हैं। ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प अर्पित करें.

10:06 AM. 27 Sept 22 10:06 AM. 27 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

वहीं इस दिन की पूजा विधि की बात करें तो सर्वप्रथम देवी को पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद इन्हें पुष्प, अक्षत, कुमकुम और सिंदूर वगैराह अर्पित करें. देवी ब्रह्मचारिणी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाने चाहिए. इन्हें मिश्री या सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं. उसके बाद ही मां की आरती करें.

6:59 PM. 26 Sept 22 6:59 PM. 26 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की कथा

मां ब्रह्मचारिणी ने अपने पूर्व जन्म में राजा हिमालय के घर में पुत्री रूप में लिया था. तब देवर्षि नारद के उपदेश से इन्होंने भगवान शंकर को अपने पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी. इस दुष्कर तपस्या के चलते इन्हें तपस्चारिणी यानी कि ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया (chaitra navratri 2nd day) गया. कथा के अनुसार एक हजार वर्ष उन्होंने केवल फल, मूल खाकर व्यतीत किए और सौ वर्षों तक केवल शाक पर निर्वाह किया था. कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखते हुए देवी ने खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के भयानक कष्ट भी सहे

मुख्य बातें

Navratri 2022 Day 2, Maa Bharamacharini Puja LIVE: नवरात्रि के दूसरे दिन आज मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराज्ञ्य की देवी माना जाता है. मां दुर्गा के इस स्वरूप में उनके एक हाथ में जप की माता और दूसरे हाथ में कमण्डल है.आइए जानते हैं इस नवरात्रि दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, आरती और भोग.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >