Jharkhand News: गढ़वा में तेंदुआ हुआ ट्रेसलेस, रंका में हाथियों के दूसरे झुंड का उत्पात जारी

गढ़वा में इन दिनों तेंदुआ के नाम अफवाह फैलाने की खबरें आ रही है. हालांकि, वन विभाग के लाख कोशिश के बावजूद तेंदुआ का पता नहीं चल पाया है. वहीं, हाथियों का उत्पात अब भी जारी है. बूढ़ापरास में दो से तीन जंगली हाथियों के झुंड को देखा गया है.

Jharkhand News: गढ़वा जिले के रंका और चिनियां में तेंदुआ ट्रेसलेस हो चुका है. चिनियां के पाल्हे गांव जहां अंतिम बार गत 22 दिसंबर, 2022 को तेंदुआ को देखा गया था, वहां लगातार पिंजड़ा लगाया जा रहा है, लेकिन तेंदुआ वन विभाग की पकड़ से बाहर है. इस बीच जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से तेंदुआ के होने की काफी अफवाहें भी निकल कर आ रही है. अफवाह की वजह से वन विभाग के पदाधिकारी परेशान हो गये हैं. जिले के दक्षिण क्षेत्र के अलावे उतरी क्षेत्र से भी तेंदुआ के होने एवं देखे जाने की अफवाह मिल रही है. अफवाह की वजह से पूरे जिले में सनसनी फैली हुई है.

तेंदुआ के नाम पर फैलाया जा रहा अफवाह

दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी शशि कुमार ने बताया कि तेंदुआ द्वारा किसी भी जानवर या इंसान के गर्दन पर वार किया जाता है. दूसरी जगह पर वार कर शिकार करना तेंदुआ का प्राकृतिक तरीका नहीं है, लेकिन लोग जहां-तहां से जानवरों पर खरोंच और चोट आदि लगने की बात कहकर अफवाह फैला रहे हैं, लेकिन 22 दिसंबर, 2022 को पाल्हे गांव के अलावे कहीं और तेंदुआ का किसी अन्य जगह से पगमार्ग नहीं मिला है.

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गढ़वा में हाथियों के कितने झुंड हैं

इधर, जिले के दक्षिण क्षेत्र रंका प्रखंड के विभिन्न गावों में हाथियों का उत्पात एक बार फिर से शुरू हो गया है. मंगलवार को रंका-अंबिकापुर मार्ग एनएच 343 पर हाथियों का झुंड आ गया. इससे सड़क पर आवागमन कर रहे लोग डर गये. बूढ़ापरास नामक इस स्थल पर दो से तीन जंगली हाथियों का झुंड देखने को मिला है. वन विभाग के अनुसार, हाथियों का यह झुंड पहलेवाले 13 हाथियों के झुंड से अलग है. बताया गया कि पहलेवाला हाथियों का झुंड जिला के सीमा से बाहर चला गया है. वर्तमान में हाथियों का जो झुंड घूम रहा है और घरों को क्षतिग्रस्त कर रहा है वह दूसरा है. संभावना जतायी जा रही है कि यह झुंड छतीसगढ़ की ओर जा रहा है और अपने मार्ग के बीच में है. इसके अलावा भंडरिया के जंगल में भी हाथियों के होने की सूचना है. वहां एक हाथी के देखे जाने का दावा किया गया है, लेकिन संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है.

रिपोर्ट : पीयूष तिवारी, गढ़वा.

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By Samir Ranjan

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