धनबाद, मनोहर कुमार : धनबाद जिले के गोविंदपुर स्थित केके पॉलिटेक्निक पोस्ट ऑफिस से 10 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी फंड गायब है. इसमें घोटाले की बू आ रही है. डायरेक्टर ऑफ अकाउंट्स पोस्टल (डीएपी) की रिपोर्ट में उक्त पोस्ट ऑफिस से हुए फर्जीवाड़ा का खुलासा किया गया है. इसके मुताबिक प्रथम दृष्टया केके पॉलिटेक्निक पोस्ट ऑफिस से करीब 1.80 करोड़ रुपये की राशि गायब (मिसिंग) है.
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डायरेक्टर ऑफ अकाउंट्स पोस्टल (डीएपी) ने पकड़ी गड़बड़ी
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8-9 खाते से हो रही थी सरकारी फंड की राशि की अवैध जमा व निकासी
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अगस्त 2022 से केके पॉलिटेक्निक पोस्ट ऑफिस में चल रहा था फर्जीवाड़ा
हालांकि, जांच के पश्चात यह राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक होने के अनुमान है. इधर डीएपी के निर्देश पर धनबाद के वरीय डाक अधीक्षक (एसएसपी) उत्तम सिंह ने कमेटी गठित कर मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी है. साथ ही संबंधित पोस्ट मास्टर सुमन सौरभ का तबादला केके पॉलिटेक्निक पोस्ट ऑफिस से झरिया पोस्ट ऑफिस में कर दिया गया है. वहीं मामले की जांच इंस्पेक्टर रंजन को सौंपा गया है.
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20 लाख रुपये जमा कराये गये
डीएपी द्वारा 1.80 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़ा की बात सामने आने के पश्चात उक्त पोस्ट ऑफिस के तत्कालीन पोस्टमाटर ने करीब 20 लाख रुपया जमा भी कराया है. धनबाद डिवीजन में यह चर्चा का विषय बना हुआ है. सूचना है कि केके पॉलिटेक्निक के तत्कालीन पोस्टर मास्टर की आइडी भी बंद कर दी गयी है.
प्रथम दृष्टया 1.80 करोड़ की हुई गड़बड़ी : एसएसपी
केके पॉलिटेक्निक पोस्ट ऑफिस में हुई गड़बड़ी मामले में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. प्रथम दृष्टया 1.80 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बात सामने आयी है. मामला में कमेटी गठित करते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी गयी है. जल्द ही पूरे मामले की खुलासा होगा.
उत्तम सिंह, वरीय डाक अधीक्षक (धनबाद डिवीजन)
अगस्त 2022 से ही चल रहा था फर्जीवाड़ा
सूचना के मुताबिक केके पॉलिटेक्निक पोस्ट ऑफिस में अगस्त 2022 से ही फर्जीवाड़ा चल रहा था. डीएपी ने करीब 8-9 खाते पकड़े है. जिसमें अवैध तरीके से सरकारी फंड की राशि जमा व निकासी की जा रही थी. इसमें 3-4 खाता धनबाद प्रधान डाकघर में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मियों के ही बताये जा रहे है. सूचना के मुताबिक गड़बड़ झाला की सूचना मिलने के बाद से वह फरार हैं.
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कैश के पैसे को चेक में किया कन्वर्ट
सूचना के मुताबिक केके पॉलिटेक्निक के पोस्टमास्टर द्वारा अपने चुनिंदा खातों में राशि जमा कर उसे चेक में दिखा दिया जाता था, ताकि उन्हें उक्त राशि ट्रेजरी में जमा नहीं करनी पड़े. साथ ही राशि को बैलेंस करने के लिए कैश को चेक में कनवर्ट कर दिया जा रहा था. इसके बाद उक्त राशि को एक खाते से दूसरे खाते व दूसरे खाते से तीसरे खाते में ट्रांसफर कर, उसकी अवैध निकासी का खेल चल रहा था.
