भारत-फ्रांस संबंध

भारत और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों को राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी की परस्पर निकटता से बड़ा आधार मिला है.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि हैं. यह उनकी तीसरी भारत यात्रा है. उल्लेखनीय है कि फ्रांस ऐसा देश है, जिसके राष्ट्राध्यक्ष को भारत ने सबसे अधिक बार गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है. पिछले वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस का राजकीय दौरा किया था. राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा अनेक कारणों से महत्वपूर्ण है. भारत और फ्रांस रणनीतिक सहयोगी हैं. इस यात्रा से दोनों देशों के कूटनीतिक एवं आर्थिक संबंध और गहरे होंगे. भारत और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों को राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी की परस्पर निकटता से बड़ा आधार मिला है. वर्ष 2022-23 में दोनों देशों का व्यापार 19.2 अरब डॉलर के उल्लेखनीय स्तर पर पहुंच गया. अप्रैल 2000 से मार्च 2023 के बीच फ्रांस से 10.5 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत आया है. भारत में फ्रांस 11वां सबसे बड़ा निवेशक है. हाल के वर्षों में लड़ाकू विमानों की खरीद, पनडुब्बी निर्माण, अंतरिक्ष अनुसंधान आदि में बढ़ते सहयोग से रणनीतिक सहकार को बड़ी गति मिली है. भारत के महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी मिशन में भी फ्रांस महत्वपूर्ण सहयोगी है. शहरी योजना और वास्तुकला में फ्रांस की विशेषज्ञता से यह मिशन लाभान्वित हो रहा है. जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने तथा स्वच्छ ऊर्जा में वृद्धि के उद्देश्य से राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी के साझा नेतृत्व में इंटरनेशनल सोलर अलायंस गठित किया गया है, जिसमें सौ से अधिक देशों की उपस्थिति है. फ्रांस यूरोपीय संघ का प्रभावशाली सदस्य है.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ठोस व्यापार समझौते पर लंबे समय से बातचीत चल रही है. कुछ दिन पहले ही चार यूरोपीय देशों के एक समूह के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता हुआ है. आशा है कि इस दौरे में व्यापार समझौते को लेकर उत्साहजनक प्रगति होगी. चाहे 1998 में भारत का परमाणु परीक्षण हो, जम्मू-कश्मीर का मसला हो, सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का दावा हो, पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद हो या फिर चीन के बरक्स भारत की क्षमता बढ़ाने में सहयोग हो, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने बड़े मुद्दों पर हमेशा भारत का साथ दिया है. उभरती ताकत के रूप में भारत की संभावना को फ्रांस ने बहुत पहले समझ लिया था. भारत ने भी फ्रांस के प्रति सकारात्मक रवैया रखा. इस परस्पर भरोसे के अच्छे परिणाम अब सामने आने लगे हैं. द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एवं ग्लोबल साउथ के बीच सहकार की मुख्य कड़ी बन सकते हैं.

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