इंटरनेट से बढ़ती चिंता

बच्चे सुरक्षित हों और इंटरनेट अपराध का अड्डा ना बने, इसके लिए जल्द-से-जल्द एक समुचित रणनीति बनायी जानी चाहिए. इस बारे में जागरूकता भी बढ़ायी जानी चाहिए.

आज की दुनिया के लिए वरदान कहलाने वाले इंटरनेट के स्याह पहलू भी हैं. इनमें एक गंभीर चुनौती चाइल्ड पोर्नोग्राफी की है. दुनियाभर में इसकी रोकथाम के प्रयास होते रहे हैं, मगर इसमें सबसे बड़ी अड़चन नियम-कानूनों के उलझे होने से आती है. इंटरनेट पर मौजूद बच्चों के यौन शोषण वाले वीडियो या तस्वीरों के लिए कसूरवार कौन है, यह तय करना बहुत ही जटिल काम है. इंटरनेट सेवा प्रदान करनेवाली कंपनियां हों या सोशल मीडिया समूह, हर कोई जवाबदेही से बचना चाहता है, लेकिन भारत सरकार ने अब इसे लेकर सख्ती बरतने का फैसला किया है. पिछले सप्ताह केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने तीन बड़ी सोशल मीडिया इंटरमीडियरी कंपनियों को नोटिस भेजा है. यूट्यूब, एक्स (पुराना ट्विटर) और टेलिग्राम को अपने प्लेटफॉर्म से बाल यौन शोषण सामग्रियों को हटाने या डिसेबल करने का आदेश दिया गया है. तीनों कंपनियों को चेतावनी दी गयी है कि यदि उन्होंने आदेश के अनुपालन में देरी की, तो उन्हें आइटी अधिनियम की धारा 79 में ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान के तहत मिली कानूनी सुरक्षा छिन जायेगी. वर्ष 2000 के आइटी एक्ट में शामिल सेफ हार्बर प्रावधान से इन सोशल मीडिया कंपनियों को उन सामग्रियों को लेकर कानूनी तौर पर राहत मिली हुई है, जिन्हें यूजर शेयर करते हैं. यह बचाव खत्म होने से ये कंपनियां आइटी कानून के दायरे में आ जायेंगी, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्रियों के इंटरनेट पर प्रसारण को लेकर कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है.

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आइटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि सरकार इंटरनेट को एक सुरक्षित और भरोसेमंद माध्यम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर ने इस वर्ष मार्च में प्रस्तावित नये डिजिटल इंडिया एक्ट का खाका पेश करते हुए भी कहा था कि कंपनियों को राहत देनेवाले इस प्रावधान को लेकर पुनर्विचार किया जा रहा है. इस साल मार्च में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बाल यौन शोषण सामग्रियों की चुनौती पर एक बैठक की थी, जिसमें बताया गया था कि ऐसी सामग्रियों की संख्या में तेज वृद्धि देखी जा रही है. दिल्ली में इंटरनेट कंपनियों समेत विभिन्न तबकों के प्रतिनिधियों के साथ समस्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई थी और समस्याओं की पहचान की गयी थी. बच्चे सुरक्षित हों और इंटरनेट अपराध का अड्डा न बने, इसके लिए जल्द-से-जल्द एक समुचित रणनीति बनायी जानी चाहिए. इस बारे में जागरूकता भी बढ़ायी जानी चाहिए, जिससे समाज का हर वर्ग ऐसे अपराधों को लेकर सतर्क और जिम्मेदार बने.

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Published by: संपादकीय

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