Hariyali Teej Ki Aarti: हरियाली तीज व्रत की पूजा के बाद जरुर पढ़ें ये आरती, नहीं तो आपकी पूजा मानी जाएगी अधूरी

Hariyali Teej Ki Aarti: हरियाली तीज व्रत में महिलाएं सोलह शृंगार करके शिव और पार्वती की पूजा करती हैं. पूजा करने के बाद माता पार्वती की आरती जरुर करनी चाहिए. मान्यता है कि बिना आरती किए पूजा अधूरी रह जाएगी.

Hariyali Teej Ki Aarti: आज हरियाली तीज का व्रत है. हरियाली तीज का व्रत महिलाओं के लिए खास होता है. इस दिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती है. हरियाली तीज व्रत में महिलाएं सोलह शृंगार करके शिव और पार्वती की पूजा करती हैं. मान्यता है कि इससे उनके पति की आयु में वृद्धि होती हैं. वहीं जो कुंवारी कन्याएं यह व्रत रखती हैं, उनके विवाह में आने वाली सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है. इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का पूजन करने के बाद ध्यान रखें की माता पार्वती की आरती जरुर करें. यहां से पढ़ें हरियाली तीज व्रत की आरती…

हरियाली तीज की पूजा सामग्री

भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति, एक चौकी, सोलह श्रृंगार की वस्तुएं, हरी साड़ी, एक चुनरी, वस्त्र, लाल फूल, दूर्वा, हल्दी, कुमकुम, जनेऊ, अक्षत्, कलश, घी, सिंदूर, बेलपत्र, भांग, धतूरा, पान, सुपारी, गंगाजल, दही, शहद, चंदन, फूल, माला, मिठाई, धूप, दीप, गंध आदि.

हरियाली तीज पूजा के लिए भोग

पूजा के दौरान आप माता पार्वती, शिवजी और गणेश जी को सूजी हलवा, शहद, खीर, घेवर, गुड़ की मिठाई आदि में से कोई भी भोग लगा सकते हैं.

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Hariyali Teej Ki Aarti: माता पार्वती जी की आरती

जय पार्वती माता जय पार्वती माता। ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता।।

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता।।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा। देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।। सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता।।

हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता।।

शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता। सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता। सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता।।

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता।।

देवन अरज करत हम चित को लाता। गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता। श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता।।

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता। जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।।

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लेखक के बारे में

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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