Exclusive: भाग्यश्री का बेटा हूं,अपनी यह पहचान नहीं चाहता हूं- अभिमन्यु दसानी

मर्द को दर्द नहीं होता है,मीनाक्षी सुंदरेश्वर जैसी फिल्मों से इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रहे अभिनेता अभिमन्यु दसानी (Abhimanyu Dassani) की फ़िल्म निकम्मा इस शुक्रवार सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है.

मर्द को दर्द नहीं होता है,मीनाक्षी सुंदरेश्वर जैसी फिल्मों से इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रहे अभिनेता अभिमन्यु दसानी (Abhimanyu Dassani) की फ़िल्म निकम्मा इस शुक्रवार सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. अभिमन्यु की यह पहली कमर्शियल फ़िल्म है.उनकी इस फ़िल्म और कैरियर पर उर्मिला कोरी की बातचीत…

निजी जिंदगी में क्या कभी आप निकम्मा रहे हैं?

हां रहा हूं, घर पर सुना भी हूं अपने लिए ये शब्द.मेरा फाइनेंस का कोर्स हो गया था.एक दिन मैं थोड़ा देर तक सो रहा था.मेरे पूज्य पिताजी मेरे कमरे में गुस्से से आए और चिल्लाने लगे कि तेरे उम्र में मेरे बच्चे हो गए थे.(हंसते हुए)मुझे लगा कि भाई मुझे शादी करनी है क्या .मुझे लगता है कि निकम्मा एक शब्द नहीं,बल्कि फीलिंग है.हर घर में कभी ना कभी कोई ना कोई निकम्मा होता ही है. एक दिन या एक सप्ताह या फिर एक साल.कोई ना कोई कभी ना कभी बनता ही है निकम्मा.

इस फ़िल्म के लिए आपको वजन बढ़ाना पड़ा और क्या तैयारी करनी पड़ी?

निकम्मा हूं,तो थोड़ा वजन बढ़ाना पड़ा.गोविंदा सर की सारी फिल्में देखीं.उनके अलावा और कौन होगा बेस्ट कमर्शियल हीरो हो सकता है.निर्देशक साबिर सर के साथ वर्कशॉप्स की,क्योंकि यह मेरे जोन की फ़िल्म नहीं थी. मैं अपनी हर फिल्म से इमेज ब्रेक करना चाहता हूं.यही वजह है कि मैंने इस फ़िल्म को चुना.वैसे कमर्शियल फिल्मों का अपना फायदा होता है. मेरी दो फिल्मों से इंडस्ट्री ने मुझे जाना,इससे दर्शक मुझे जानने लगेंगे.

शिल्पा शेट्टी के साथ डांसिंग स्टेप मैच करना कितना कितना मुश्किल था?

मैं बताना चाहूंगा कि जिस दिन उस गाने की शूटिंग थी,मेरा पेट खराब था.सेट पर मैं दही चावल और आइसक्रीम खा रहा था.मेरा वैनिटी वैन एकदम पास में था,तो बार बार उसमें भाग रहा था.बस कर लिया इस बात का शुक्र है. शिल्पा मैम और कोरियोग्राफर गणेश आचार्य सर से बहुत कुछ सीखा क्योंकि मैं पहली बार डांस नंबर कर रहा था.

इससे पहले धर्मा की फ़िल्म मीनाक्षी सुंदरेश्वर आपकी रिलीज हुई थी,जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था,कितना फायदा हुआ है क्योंकि फ़िल्म ओटीटी पर रिलीज हुई थी?

मीनाक्षी सुंदरेश्वर के बाद,मुझे हफ्ते में कम से कम तीन फिल्मों के नरेशन सुनने को मिलते हैं. मैं वही प्रोजेक्ट्स चुन रहा हूं,जिससे मुझे सुबह उठने के लिए अलार्म क्लॉक की ज़रूरत ना पड़े. मैं अपने हर किरदार में अलग रंग भरना चाहता हूं.अब तक छोटे शहरों की कहानियों में जितने भी एक्टर्स नज़र आए हैं,वो बहुत जल्दीबाजी में बात करते हैं,लेकिन मैंने धीरे बात की,क्योंकि छोटे शहर में लोग धीरे बात करते हैं. मैं हर किरदार को अलग ढंग से निभाना चाहता हूं.

आपकी मौजूदा कैरियर जर्नी पर मां भाग्यश्री का क्या रिएक्शन है?

वो तो बहुत खुश है.वो तो इस फ़िल्म के ट्रेलर लॉन्च पर खुशी से रो दी थी.बचपन में सब मुझे अवंतिका का भाई कहते थे,क्योंकि वो बहुत सोशल है.एक्टिंग में आया तो लोग कहने लगे कि भाग्यश्री का बेटा है.(हंसते हुए) लगने लगा कि मेरी खुद की पहचान है या नहीं,सब दिया हुआ है.मेरी ख्वाहिश है कि लोग मेरी माँ को देखकर कहे कि यह अभिमन्यु की मां है, मगर वो मुश्किल लग रहा है,क्योंकि वो एक्टिंग में वापस आ रही हैं.

आपकी बहन अवंतिका भी एक्टिंग में है,क्या घर में कोई प्रतिस्पर्धा रहती है?

बिल्कुल भी नहीं,वो मुझसे ज़्यादा सुंदर है.मुझसे ज़्यादा टैलेंटेड है.वो स्क्रीन पर एफर्टलेस दिखती है,जबकि मेरी मेहनत दिखती है.आप रणबीर कपूर को स्क्रीन पर देखते हैं,तो वो एकदम एफर्टलेस नज़र आते हैं.रणवीर सिंह को देखकर लगता है कि उन्होंने बहुत मेहनत की है.मैं भी परदे पर हर किरदार में एफर्टलेस नज़र आना चाहता हूं.

पेंडेमिक ने सभी को परिवार की अहमियत समझायी,क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ?

मैं हमेशा से ही अपने परिवार के बहुत करीब रहा हूं.मम्मी,पापा, बहन के साथ साथ मैं अपने दादा-दादी के भी बहुत करीब हूं.मैं घर पर घुसते ही सबसे पहले अपनी दादी के पास जाता हूं,उनको देखता हूं बस मैं खुश हो जाता हूं. मैं अपनी दादी के हाथ के बनीं चाय पीना पसंद करता हूं.वो मुझे हर 15 दिनों में बालों में चम्पी देती हैं. मैंने नया फ्लैट भी लिया,तो उसी बिल्डिंग में,ताकि परिवार के साथ रह सकूं. अपने परिवार के लिए बहुत कुछ करना चाहता हूं,उन्हें प्राउड फील करवाना चाहता हूं.

आपकी यह तीसरी फिल्म है,इन फिल्मों से मिलने वाले पैसों से आपने क्या खास अपने लिए खरीदा?

मैं बताना चाहूंगा कि 15 साल पहले से ही मैं आत्मनिर्भर बन चुका हूं.अपने खर्चे खुद उठाता हूं. जहां तक बात फिल्मों में एक्टिंग करके मिले पैसों से है,तो मैं खुद के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार के लिए कुछ खास करना चाहता हूं.मम्मी को सफारी पर भेजना है.डैड को लंदन में म्यूजिक कॉन्सर्ट में भेजना चाहता हूं.दादी-दादा और परिवार के दूसरे लोगों को वीकेंड ट्रिप पर भेजना है.मेरी बहन को लंदन भेजना है.वो अगले महीने घूमने के लिए जा रही,तो उसका तो कर दिया है,उम्मीद है कि और सब भी जल्द से जल्द कर दूंगा.

कोई बायोपिक फ़िल्म करने की ख्वाहिश है?

एक वक्त था जब फुटबॉल मेरा पहला प्यार था,मैं अभी भी फुटबॉल खेलना बहुत पसंद करता हूं.एथलीट रहा हूं,तो पता है कि उनकी लाइफ कितनी टफ होती है. मौका मिला तो ओलिम्पिक में गोल्ड मेडल विनर नीरज चोपड़ा की बायोपिक करना चाहूंगा.

आपकी अगली फिल्म

आंखमिचौली, पूरी तरह से एक कॉमेडी फिल्म है.

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लेखक के बारे में

Author: कोरी

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