जेल में अमन सिंह का सिक्का चलता था. यही कारण है कि जेल अस्पताल का एक नंबर बेड हमेशा उसके लिए सुरक्षित रखा गया. वह जब भी धनबाद जेल में रहा, वह इसी बेड पर सोता व रहता था. इसके बगल के दो नंबर बेड पर उसका सहयोगी रहता था. घटना के दिन भी वह अस्पताल के एक नंबर बेड पर था. लेकिन वह किस बीमारी से ग्रसित था, इसका पता किसी को नहीं है. जेल अस्पताल में उसका रिकॉर्ड मरीज के रूप में नहीं मिल पाया है.
पुराने अस्पताल भवन में भी एक नंबर बेड पर रहता था
अमन सिंह जेल के अंदर पुराने अस्पताल भवन में भी एक नंबर बेड पर ही रहता था. यह भवन जर्जर होने के बाद दूसरी जगह इसे शिफ्ट किया गया. दाे तल्ले के इस अस्पताल में भी उसे एक नंबर बेड दिया गया. पहले तल्ले के कोने में एक नंबर बेड को रखा गया. उसके बगल में दो नंबर बेड है. जिसमें उसका सहयोगी रहता था. घटना के दिन उसका सहयोगी वहां से भाग गया. दो नंबर बेड अब खाली पड़ा है.
नीचे 17 व ऊपर के वार्ड में 15 मरीज थे भर्ती
अस्पताल में घटना वाले दिन करीब 32 मरीज भर्ती थे. नीचे के वार्ड में 17 मरीज थे, वहीं ऊपर के वार्ड में 15 मरीज थे. जांच में अधिकांश मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी. ये लोग बहाना बना कर वहां रह रहे थे. टीम यह भी जांच करने में जुटी है कि मरीजों को किस कारण से जेल के अस्पताल में रखा गया था.
घटना के दिन ही छुट्टी पर चले गये जेल डॉक्टर
जेल अस्पताल के डॉ राजीव कुमार सिंह तीन दिसंबर की शाम अचानक छुट्टी पर चले गये. बताया जा रहा है कि वह मौखिक रूप से बोल कर छुट्टी पर चले गये थे. मंगलवार को छुट्टी का पत्र सिविल सर्जन कार्यालय से जारी किया गया. बताया जा रहा है डॉ राजीव कुमार सिंह अपने परिवार में किसी शादी समारोह में शामिल होने सीवान गये हैं. घटना के दिन वह दोपहर को जेल गये थे और रात में छुट्टी पर चले गये. अचानक उनके छुट्टी पर जाने से भी कई सवाल उठ रहे है.
